Edinbox Hindi
केंद्रीय बजट 2026-27: उच्च शिक्षा को बढ़ावा, लेकिन कटौतियों की छाया अब भी बरकरार

केंद्रीय बजट 2026-27: उच्च शिक्षा को बढ़ावा, लेकिन कटौतियों की छाया अब भी बरकरार

केंद्रीय बजट 2026-27: उच्च शिक्षा को बढ़ावा, लेकिन कटौतियों की छाया अब भी बरकरार

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश किया, जिसमें उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिए कुल 55,727.22 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह राशि चालू वित्त वर्ष 2025-26 के बजट अनुमान की तुलना में लगभग 11 प्रतिशत अधिक है। वहीं, पूरे शिक्षा क्षेत्र के लिए सरकार ने 1,39,289.48 करोड़ रुपये का बजट तय किया है, जो पिछले वर्ष के 1,28,650.05 करोड़ रुपये से करीब 8.2 प्रतिशत ज्यादा है।

आंकड़े यह संकेत देते हैं कि सरकार ने शिक्षा को प्राथमिकता देने की कोशिश की है, लेकिन बजट दस्तावेज यह भी बताते हैं कि चालू वर्ष में कई अहम योजनाओं के आवंटन में बड़ी कटौती की गई थी। अब 2026-27 में कुछ योजनाओं में बढ़ोतरी दिखाई दे रही है, जिसे आंशिक सुधार के तौर पर देखा जा रहा है।

बीते वर्षों में उच्च शिक्षा बजट का रुझान

पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो शिक्षा मंत्रालय और उच्च शिक्षा विभाग, दोनों के बजट में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2022-23 में जहां उच्च शिक्षा के लिए 40,828 करोड़ रुपये आवंटित थे, वहीं 2026-27 में यह राशि बढ़कर 55,727 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। इससे साफ है कि सरकार उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार और गुणवत्ता सुधार पर जोर दे रही है।

पीएम-यूषा और पीएमआरएफ में उतार-चढ़ाव

सरकारी उच्च शिक्षा संस्थानों को सहयोग देने वाली प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा योजना (पीएम-यूषा) के लिए 2026-27 में बजट बढ़ाकर 1,850 करोड़ रुपये कर दिया गया है। हालांकि यह बढ़ोतरी इसलिए ज्यादा नजर आती है क्योंकि 2025-26 के संशोधित अनुमान में इस योजना का बजट 1,815 करोड़ रुपये से घटाकर सिर्फ 800 करोड़ रुपये कर दिया गया था। यानी पहले भारी कटौती हुई और अब आंशिक बहाली की गई है।

इसी तरह प्रधानमंत्री अनुसंधान फैलोशिप (पीएमआरएफ) योजना का मामला भी रहा। 2025-26 में इसका संशोधित बजट घटाकर 290 करोड़ रुपये कर दिया गया था, जबकि मूल प्रावधान 600 करोड़ रुपये का था। अब 2026-27 के लिए एक बार फिर इसका बजट 600 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जिससे शोधार्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है।

विश्व स्तरीय संस्थान और नियामक संस्थानों पर फोकस

विश्व स्तरीय संस्थान योजना के लिए 2026-27 में 900 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष के बराबर है। वहीं, उच्च शिक्षा से जुड़े नियामक संस्थानों—विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) और राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई)—के बजट में भी बढ़ोतरी की गई है।

यूजीसी का बजट 2024-25 में घटकर 2,500 करोड़ रुपये रह गया था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 3,709 करोड़ रुपये कर दिया गया है। हालांकि यह अभी भी 2023-24 के स्तर से कम है, जब यूजीसी को 5,360 करोड़ रुपये मिले थे। एआईसीटीई का बजट भी बढ़ाकर 230 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो तकनीकी शिक्षा के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

प्रमुख संस्थानों को कितना मिला?

बजट में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs), राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (NITs) और केंद्रीय विश्वविद्यालयों के आवंटन में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। 2026-27 में IITs को 12,123 करोड़ रुपये और केंद्रीय विश्वविद्यालयों को 17,440 करोड़ रुपये दिए गए हैं। वहीं दूसरी ओर, भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER), भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) और भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) जैसे कुछ संस्थानों के बजट में कटौती भी दर्ज की गई है।

कुल मिलाकर क्या संदेश देता है यह बजट?

केंद्रीय बजट 2026-27 उच्च शिक्षा के लिए सकारात्मक संकेत जरूर देता है, खासकर IITs, केंद्रीय विश्वविद्यालयों और शोध से जुड़ी योजनाओं के लिए। लेकिन साथ ही यह भी साफ है कि पिछले वर्षों में की गई कटौतियों का असर अब भी दिख रहा है। कई योजनाओं में बढ़ोतरी दरअसल पहले की गई कटौती की भरपाई है, न कि पूरी तरह नया विस्तार।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत को वैश्विक ज्ञान अर्थव्यवस्था में मजबूत स्थान बनाना है, तो उच्च शिक्षा में स्थिर और दीर्घकालिक निवेश जरूरी होगा। बजट 2026-27 इस दिशा में एक कदम है, लेकिन अभी रास्ता लंबा है।

Asmita Sarkar

Add comment

Recent posts

Most popular

Most discussed