
1 फरवरी को संसद में पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 में सरकार ने शिक्षा क्षेत्र को प्राथमिकता देते हुए स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक कई अहम प्रावधान किए हैं। बजट का फोकस न केवल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर है, बल्कि शैक्षणिक संस्थानों की गुणवत्ता, सामग्री और पहुंच बढ़ाने पर भी साफ तौर पर दिखाई देता है। खास तौर पर विद्यालय शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के अंतर्गत आने वाले स्वायत्त निकायों के लिए आवंटन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है।
केन्द्रीय विद्यालय, नवोदय और एनसीईआरटी को कितना मिला फंड
बजट दस्तावेजों के अनुसार, केन्द्रीय विद्यालय संगठन (KVS) को 2026-27 के लिए 10,129.41 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। यह स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में सबसे बड़ा आवंटन है। वहीं, ग्रामीण और प्रतिभाशाली छात्रों की शिक्षा के लिए अहम भूमिका निभाने वाली नवोदय विद्यालय समिति (NVS) को 6,025 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इसके अलावा, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) के लिए 681.79 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
सरकार का मानना है कि इन संस्थानों के जरिए देशभर में समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को मजबूती मिलेगी, खासकर उन क्षेत्रों में जहां संसाधनों की कमी रही है।
पिछले वर्षों की तुलना में बढ़ा भरोसा
अगर पिछले दो वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो शिक्षा से जुड़े इन प्रमुख संस्थानों के बजट में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिलती है। नवोदय विद्यालय समिति का वास्तविक खर्च जहां 2024-25 में 5,370.79 करोड़ रुपये था, वहीं 2026-27 में इसे बढ़ाकर 6,025 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में पढ़ने वाले छात्रों पर विशेष ध्यान दे रही है।
केन्द्रीय विद्यालय संगठन का बजट भी इसी तरह तेजी से बढ़ा है। 2024-25 में 8,727 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 में यह 10,129.41 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसे शहरी क्षेत्रों और केंद्रीय कर्मचारियों के बच्चों के लिए स्कूल शिक्षा को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
एनसीईआरटी के बजट में भी लगातार इजाफा हुआ है। 2024-25 में जहां इसका वास्तविक खर्च 517.42 करोड़ रुपये था, वहीं 2026-27 में इसे 681.79 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इससे नई पाठ्यपुस्तकों के विकास, शैक्षिक शोध और डिजिटल सामग्री को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
कुल स्वायत्त निकायों का बजट भी बढ़ा
वित्त वर्ष 2026-27 में विद्यालय शिक्षा से जुड़े स्वायत्त निकायों के लिए कुल बजट 16,866.71 करोड़ रुपये तय किया गया है। यह राशि पिछले वर्ष के 15,907 करोड़ रुपये के मुकाबले अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बढ़े हुए आवंटन से स्कूलों के बुनियादी ढांचे, शिक्षकों के प्रशिक्षण और शैक्षणिक संसाधनों में सुधार देखने को मिल सकता है।
कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट 2026-27 यह संकेत देता है कि सरकार स्कूल शिक्षा को देश की नींव मानते हुए उसमें दीर्घकालिक निवेश करने के मूड में है। केवीएस, नवोदय और एनसीईआरटी जैसे संस्थानों को मिला बढ़ा हुआ फंड आने वाले वर्षों में शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच दोनों को बेहतर बना सकता है।




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