
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को लगातार नौवां केंद्रीय बजट पेश किया, जिसमें शिक्षा को एक बार फिर प्राथमिकता वाले क्षेत्र के रूप में रखा गया है। बजट 2026-27 में शिक्षा के लिए कुल 1,39,289 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 8.27 प्रतिशत अधिक है। इसमें से 55,727 करोड़ रुपये उच्च शिक्षा विभाग और 83,562 करोड़ रुपये स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के लिए निर्धारित किए गए हैं।
सरकार का कहना है कि इस बढ़े हुए आवंटन का मकसद शिक्षा व्यवस्था को भविष्य के लिए तैयार करना और युवाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। बीते कुछ वर्षों में शिक्षा क्षेत्र लगातार सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहा है और बजट के आंकड़े भी इसी ओर इशारा करते हैं।
लगातार बढ़ता शिक्षा बजट
आंकड़ों पर नजर डालें तो शिक्षा क्षेत्र के लिए आवंटन में हर साल इजाफा हुआ है। वर्ष 2021-22 में जहां शिक्षा बजट 93,224 करोड़ रुपये था, वहीं 2022-23 में यह बढ़कर 1,04,277 करोड़ रुपये हो गया। इसके बाद 2023-24 में 1,12,899 करोड़ रुपये, 2024-25 में 1,20,627 करोड़ रुपये और 2025-26 में 1,28,650 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। अब 2026-27 में यह राशि बढ़कर 1,39,289 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। इससे साफ है कि सरकार शिक्षा को दीर्घकालिक निवेश के तौर पर देख रही है।
नए संस्थानों और हब की घोषणा
केंद्रीय बजट 2026-27 में शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास से जुड़े कई नए संस्थानों और ढांचागत पहलों की घोषणा की गई है। इनमें पांच क्षेत्रीय मेडिकल हब, दो नए राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थान, तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान और एक राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान शामिल हैं। इसके अलावा पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप, खगोल विज्ञान से जुड़ी चार नई या उन्नत सुविधाएं, एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल के नए संस्थान और वेटनरी व पैरा-वेट कॉलेज एवं अस्पताल स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है।
सरकार ने एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स यानी AVGC सेक्टर पर भी खास ध्यान दिया है। इसके तहत 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों में AVGC लैब स्थापित करने की घोषणा की गई है। साथ ही डिजिटल नॉलेज ग्रिड और हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल बनाने का भी प्रावधान बजट में शामिल है।
पिछले बजट की पहलों को आगे बढ़ाने की तैयारी
पिछले केंद्रीय बजट 2025-26 में शिक्षा को तकनीक और रोजगार से जोड़ने पर खास जोर दिया गया था। उस बजट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की घोषणा की गई थी, जिसके लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया था। इसका उद्देश्य शिक्षा प्रणाली में एआई आधारित समाधान विकसित करना और पढ़ाई को नई तकनीक से जोड़ना था।
इसी तरह स्कूल स्तर पर नवाचार को बढ़ावा देने के लिए अगले पांच वर्षों में 50,000 नई अटल टिंकरिंग लैब स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया था। इसका मकसद छात्रों में वैज्ञानिक सोच, प्रयोगात्मक सीख और तकनीकी समझ को मजबूत करना है।
उच्च शिक्षा और कौशल पर भी जोर
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी सरकार विस्तार की योजना पर काम कर रही है। 2014 के बाद स्थापित पांच आईआईटी में बुनियादी ढांचे के विस्तार के जरिए करीब 6,500 अतिरिक्त छात्रों के लिए सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव पहले ही रखा जा चुका है। इसके साथ ही युवाओं को वैश्विक स्तर की विशेषज्ञता देने के लिए पांच राष्ट्रीय कौशल उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की योजना भी सामने आई थी।
कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट 2026-27 यह संकेत देता है कि सरकार शिक्षा को केवल सामाजिक क्षेत्र नहीं, बल्कि रोजगार, नवाचार और आर्थिक विकास से जोड़कर देख रही है। बढ़ता बजट, नए संस्थानों की घोषणा और तकनीक पर जोर आने वाले वर्षों में भारत की शिक्षा व्यवस्था को अधिक मजबूत और आधुनिक बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।




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