
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करते हुए विदेश में पढ़ाई और इलाज कराने वाले परिवारों को बड़ी राहत देने का ऐलान किया है। बजट में शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े खर्चों पर लगने वाले टैक्स कलेक्टेड ऑन सोर्स (TCS) की दर को 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है। इस फैसले से विदेश में पढ़ाई कर रहे छात्रों और इलाज के लिए बाहर जाने वाले लोगों पर पड़ने वाला वित्तीय बोझ कम होगा और अभिभावकों को सीधे तौर पर हजारों रुपये की बचत होगी।
नए प्रावधान के अनुसार, यह राहत उदारीकृत प्रेषण योजना यानी LRS के तहत दी गई है। LRS के तहत विदेश में पढ़ाई या इलाज के लिए 10 लाख रुपये से अधिक की रकम भेजने पर TCS लगाया जाता है। पहले इस सीमा से ऊपर भेजी गई राशि पर 5 प्रतिशत TCS देना पड़ता था, लेकिन अब यह घटकर 2 प्रतिशत रह गया है। उदाहरण के तौर पर, अगर कोई अभिभावक विदेश में पढ़ाई के लिए 20 लाख रुपये भेजता है, तो पहले उसे 1 लाख रुपये TCS के रूप में चुकाने होते थे। अब इसी रकम पर सिर्फ 40 हजार रुपये टैक्स देना होगा। यानी सीधे 60 हजार रुपये की बचत होगी। हालांकि, इसके लिए पैन कार्ड का होना जरूरी है, क्योंकि बिना पैन के TCS की दर अधिक हो सकती है।
वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में साफ कहा कि शिक्षा और चिकित्सा जैसे जरूरी उद्देश्यों के लिए विदेश पैसा भेजना अब पहले के मुकाबले आसान और सस्ता होगा। इससे न केवल छात्रों को राहत मिलेगी, बल्कि गंभीर बीमारी के इलाज के लिए विदेश जाने वाले परिवारों पर भी आर्थिक दबाव कुछ हद तक कम होगा।
बजट में सिर्फ पढ़ाई और इलाज ही नहीं, बल्कि विदेश यात्रा करने वालों के लिए भी राहत का ऐलान किया गया है। विदेश घूमने, हॉलिडे या ट्रैवल पैकेज बुक करने पर लगने वाला TCS भी घटाया गया है। इससे विदेश यात्रा की योजना बना रहे लोगों को किफायती विकल्प मिल सकेंगे और ट्रैवल खर्च में थोड़ी राहत मिलेगी।
इसके अलावा बजट में छोटे व्यापारियों, आउटसोर्सिंग एजेंसियों और फ्रीलांस काम करने वालों के लिए भी टैक्स नियमों को सरल बनाने की बात कही गई है। कुल मिलाकर यह बजट उन लोगों के लिए राहत लेकर आया है, जो शिक्षा, स्वास्थ्य या यात्रा जैसे जरूरी और व्यक्तिगत कारणों से विदेश खर्च करते हैं। यह कदम मध्यम वर्ग के लिए खास तौर पर फायदेमंद माना जा रहा है।




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