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विज्ञान का वरदान कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)

आज विज्ञान ने हर क्षेत्र में तरक्की की है। हर दिन नए-नए तकनीक, नए-नए इनोवेशन विज्ञान के क्षेत्र में आ रहे हैं। मनोविज्ञान मानव के जीवन को अधिक से अधिक सुलभ बनाने की मुहिम में जुटी है। कंप्यूटर के क्षेत्र में ऐसी ही नई तकनीक है- कृत्रिम बुद्धिमता जिसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कहते हैं। अब वह दिन दूर नहीं जब आप अपने दोस्तों के घर जाएंगे और आपका स्वागत एक मशीनयुक्त आदमी करेगा जो आपको बैठाने के साथ-साथ चाय कॉफी भी लाकर देगा। इतना ही नहीं, आप अगर किसी मॉल में सामान खरीदने जाएंगे तो वहां भी वह हर तरह से आपके आदेश का पालन करेगा। यही कारण है कि करियर के लिहाज से भी यह क्षेत्र बहुत महत्वपूर्ण बन गया है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का जनक जॉन मैकार्थी को कहा गया है। यह एक ऐसी विधा है जिसमें मशीन से मशीन की बातें होती है। अब तक आपने देखा होगा मशीन से लोगों को बात करते हुए लेकिन अब एक कंप्यूटर दूसरे कंप्यूटर से बात करता है। इसे विज्ञान का अद्भुत चमत्कार ही कहा जायेगा।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का मुख्य लक्ष्य है एक ऐसा उपकरण का निर्माण जो बुद्धिमानी के साथ स्वतंत्र रूप से कार्य कर सके जिससे मानव का श्रम कम हो। इस विषय पर विशेष जानकारी हेतु हमने अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक और सवोनिया विश्वविद्यालय, फिनलैंड के सभोनिया यूनिवर्सिटी ऑफ एप्लाइड साइंस के प्रोफेसर डॉ राजीव कंठ से विस्तृत चर्चा की। उनसे चर्चा के क्रम में पता चला कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आने वाले समय में हमारे जीवन में कितना महत्वपूर्ण हो जाएगा।आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के संदर्भ में प्रोफ़ेसर कंठ बताते हैं कि यह मानव बुद्धि की नकल करने के लिए मशीन लर्निंग का उपयोग करता है। करियर के लिहाज से भी यह क्षेत्र काफी अच्छा माना जाता है। इसमें मैकेनिकल इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग, अप्लाइड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ-साथ रोबोटिक ऑटोमेशन इंजीनियरिंग में डिप्लोमा, बैचलर डिग्री, मास्टर डिग्री और रिसर्च आदि में बहुत अच्छा करियर है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की शुरुआत 1950 के दशक में ही हो गयी थी। लेकिन इसके महत्व को लोग 1970 के दशक में समझ पाए। सबसे पहले इस ओर जापान ने पहल की और 1981 में पांचवें जनरेशन नामक योजना की शुरुआत की थी। इसमें सुपर कंप्यूटर के विकास के लिए 10 वर्षीय कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गई। धीरे-धीरे अन्य देशों ने भी इसे बारीकी से लिया। ब्रिटेन ने इसके लिए ‘एल्वी’ नाम का प्रोजेक्ट बनाया। यूरोपीय संघ के देशों ने भी ‘एस्प्रीट’ नाम से कार्यक्रम की शुरुआत की थी। इसके बाद 1983 में कुछ निजी संस्थाओं ने मिलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर लागू होने वाली उत्तम तकनीकों जैसे–‘वेरी लार्ज स्केल इंटीग्रेटेड सर्किट’ का विकास करने के लिए एक संघ ‘माइक्रो इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कंप्यूटर टेक्नोलॉजी’ की स्थापना की। इस प्रकार दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विकासपथ पर अग्रसर हुआ।आज दुनिया का कोई ऐसा क्षेत्र नहीं बचा है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दखल ना हो।

भारत में भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की विस्तृत संभावनाएं हैं। कई अस्पतालों में रोबोटिक सर्जरी शुरू हो गई है। देश के सबसे बड़े अस्पताल में शुमार एम्स में भी रोबोटिक सर्जरी शुरू हुआ है। जिस तरह से भारत में तेजी से यह क्षेत्र फैल रहा है, उससे लगता है कि निकट भविष्य में चौथी प्रौद्योगिकी क्रांति इसके द्वारा संभव है। आज रोबोटिक्स, वर्चुअल रियलिटी, क्लाउड टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आदि के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर भारत प्रगति के पथ पर अग्रसर है। पिछले दिनों एक कार्यक्रम में नीति आयोग के सीईओ रहे अमिताभ कांत ने कहा कि, “कृत्रिम बुद्धिमता देश में व्यवसाय करने के तरीके को बदलने जा रही है। विशेष रूप से देश के सामाजिक और समावेशी कल्याण के लिए नवाचारों में विशिष्ट रूप से इसका उपयोग किया जाएगा। स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में क्षमता बढ़ाने, शिक्षा में सुधार लाने, नागरिकों के लिए अभिनव शासन प्रणाली विकसित करने और देश की समग्र आर्थिक उत्पादकता में सुधार के लिए देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा मशीन लर्निंग जैसे भविष्य की प्रौद्योगिकी को स्वीकार करने का समय आ गया है।“ इतना ही नहीं, उन्होंने गूगल से नीति आयोग की साझेदारी को देश के विकास हित में बताया। उन्होंने कहा कि गूगल के साथ नीति आयोग की साझेदारी से कई प्रशिक्षण पहले शुरू होगी, स्टार्टअप्स को समर्थन मिलेगा और पीएचडी छात्रवृत्ति के माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा। इतना ही नहीं, राष्ट्रीय स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कार्यक्रम की रूपरेखा बनाने के लिए नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है। इसमें सरकार के प्रतिनिधियों के अलावा शिक्षाविदों तथा उद्योग जगत को भी प्रतिनिधित्व देने की बात की गई है। इसके लिए एक बजट का भी प्रावधान किया गया है।

बहरहाल कह सकते हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार भी कृतसंकल्पित है। यह युवा भारत की दशा और दिशा तय करेगी।

रईस अहमद 'लाली'

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