
बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर में 18 से 20 फरवरी तक होने वाले राष्ट्रीय सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के जाने-माने प्रगतिशील किसान डॉ. राजाराम त्रिपाठी विशेष आकर्षण होंगे। बैंकिंग नौकरी छोड़कर कृषि को अपनाने वाले डॉ. त्रिपाठी ने पॉलीहाउस के महंगे मॉडल के बजाय पेड़ों पर आधारित ‘नेचुरल ग्रीनहाउस’ विकसित कर खेती को नई दिशा दी है। करीब दो लाख रुपये प्रति एकड़ की कम लागत वाला यह मॉडल आज बहुवर्षीय आय का प्रभावी स्रोत बन चुका है और आदिवासी किसानों के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है।
डॉ. त्रिपाठी ने काली मिर्च, सफेद मूसली, स्टीविया और हल्दी जैसी औषधीय व नकदी फसलों के मॉडल के माध्यम से बस्तर क्षेत्र के सैकड़ों किसानों की आमदनी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है। सम्मेलन में वे सतत खेती से जुड़े अपने अनुभव, चुनौतियाँ और समाधान साझा करेंगे, जिससे किसानों, वैज्ञानिकों और शोधार्थियों को टिकाऊ कृषि के नए रास्ते समझने का अवसर मिलेगा।
सम्मेलन में आधुनिक एग्री-टेक का भी प्रदर्शन होगा। फ्लाइटलाइन एविएशन एकेडमी एग्री-ड्रोन के जरिए मिट्टी के नमूने एकत्र करने का लाइव डेमो देगी। फ्लाइटलाइन ग्रुप और बीएयू के संयुक्त उद्यम ‘भारती’ के तहत तैयार इस तकनीक के जरिए मिट्टी की गुणवत्ता जांच को अधिक तेज, सटीक और किफायती बनाने का दावा किया गया है।
‘रेजिलिएंट सॉइल हेल्थ मैनेजमेंट विद रिसोर्स कंजर्वेशन फॉर एग्रीकल्चरल एंड एनवायरनमेंटल सस्टेनेबिलिटी (RSHM–2026)’ विषय पर आयोजित यह राष्ट्रीय सम्मेलन लखनऊ स्थित एकेडमी ऑफ नेचुरल रिसोर्स कंजर्वेशन एंड मैनेजमेंट के सहयोग से हो रहा है। जलवायु परिवर्तन, घटती मिट्टी की उर्वरता और संसाधन संरक्षण जैसी चुनौतियों के बीच यह मंच देशभर के कृषि वैज्ञानिकों, नीतिगत विशेषज्ञों, शोधार्थियों और किसानों को टिकाऊ समाधानों पर गहन विचार-विमर्श का अवसर देगा।
कृषि विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि यह सम्मेलन बिहार सहित देश के किसानों के लिए नई तकनीक, आधुनिक मॉडल और नवाचारों को अपनाने का महत्वपूर्ण अवसर बनेगा।




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