
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई), नई दिल्ली का 64वां दीक्षांत समारोह 13 फरवरी 2026 को गरिमामय माहौल में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) मुख्य अतिथि और समारोह के अध्यक्ष के रूप में शामिल हुए। केंद्रीय राज्य मंत्री Bhagirath Choudhary और Ramnath Thakur विशिष्ट अतिथि रहे।
इस अवसर पर कृषि मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, शिक्षक, छात्र, अभिभावक और किसान प्रतिनिधि बड़ी संख्या में मौजूद रहे। Mangi Lal Jat, जो कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक हैं, भी समारोह में उपस्थित रहे।
“आईएआरआई केवल संस्थान नहीं, कृषि प्रगति का केंद्र”
अपने संबोधन में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आईएआरआई सिर्फ एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि भारत की कृषि प्रगति का महत्वपूर्ण केंद्र है। उन्होंने याद दिलाया कि हरित क्रांति की शुरुआत इसी संस्थान से हुई थी और जब भी देश खाद्यान्न संकट से जूझा, तब पूसा ने समाधान दिया।
उन्होंने “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि विकसित कृषि और समृद्ध किसान इस लक्ष्य की आधारशिला हैं। कृषि देश की अर्थव्यवस्था का प्रमुख स्तंभ है और करोड़ों परिवारों की आजीविका इससे जुड़ी है।
विज्ञान आधारित खेती पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने छात्रों से कहा कि वे केवल डिग्रीधारी नहीं, बल्कि भविष्य के कृषि नेता हैं। उन्होंने कृषि क्षेत्र में लगभग 5 प्रतिशत वृद्धि दर बनाए रखने की जरूरत बताई और जलवायु परिवर्तन, मृदा क्षरण, जल संकट तथा पोषण सुरक्षा जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए विज्ञान आधारित और टिकाऊ खेती मॉडल अपनाने का आह्वान किया।
उन्होंने जल संरक्षण, माइक्रो इरिगेशन, मृदा स्वास्थ्य सुधार, प्राकृतिक खेती, जैविक इनपुट, ड्रोन और डिजिटल तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही। उनका कहना था कि “लैब टू लैंड” केवल नारा नहीं, बल्कि हर वैज्ञानिक की जिम्मेदारी है।
युवाओं को स्टार्टअप की ओर बढ़ने का संदेश
शिवराज सिंह चौहान ने विद्यार्थियों को नौकरी तलाशने के बजाय रोजगार सृजक बनने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने एग्री-स्टार्टअप, एग्री-प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन के जरिए किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दिया। साथ ही संस्थान के पुनर्विकास की योजना का उल्लेख करते हुए आधुनिक प्रयोगशालाओं, एग्री-इनोवेशन पार्क और स्टार्टअप इनक्यूबेशन हब के विकास की जानकारी दी।
470 विद्यार्थियों को मिली डिग्री
संस्थान के निदेशक डॉ. सी.एच. श्रीनिवास राव ने बताया कि इस वर्ष कुल 470 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें 290 एमएससी/एमटेक और 180 पीएचडी छात्र शामिल हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से वैज्ञानिक ईमानदारी और सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का आग्रह किया।
डीन डॉ. अनुपमा सिंह ने छात्रों को निरंतर सीखते रहने और बहु-विषयक दृष्टिकोण अपनाने का संदेश दिया।
मेधावी छात्रों और वैज्ञानिकों को सम्मान
समारोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों और वैज्ञानिकों को सम्मानित किया गया। पांच पीएचडी और पांच एमएससी छात्रों को मेरिट मेडल प्रदान किए गए।
वर्ष 2025 के लिए “आईसीएआर–आईएआरआई सर्वश्रेष्ठ छात्र पुरस्कार” और “नाबार्ड–प्रो. वी.एल. चोपड़ा स्वर्ण पदक” भी प्रदान किए गए। पीएचडी कार्यक्रम में राकेश वी. (कीट विज्ञान) और एमएससी कार्यक्रम में सुमन बर्मन (कीट विज्ञान) को यह सम्मान मिला।
वैज्ञानिक योगदान के लिए “डॉ. एच.के. जैन स्मृति युवा वैज्ञानिक पुरस्कार” डॉ. वेदा कृष्णन और डॉ. रोआफ अहमद पर्रे को दिया गया।
आईएआरआई, जिसे देश में कृषि अनुसंधान का अग्रणी संस्थान माना जाता है, एक सदी से अधिक समय से कृषि शिक्षा और शोध में अहम भूमिका निभा रहा है। 64वां दीक्षांत समारोह इस संस्थान की परंपरा, उपलब्धियों और भविष्य की दिशा का प्रतीक रहा।




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