
खनन उद्योग के लिए केंद्र सरकार ने एक अहम निर्णय लेते हुए मौजूदा खनन पट्टों के भीतर टेलिंग्स के पुनर्चक्रण को नई पर्यावरण मंजूरी (EC) से मुक्त कर दिया है। सरकार का यह फैसला लंबे समय से चल रही उद्योग की मांग को पूरा करता है और इसका लक्ष्य खनन कार्यों को अधिक टिकाऊ, तेज और दक्ष बनाने की दिशा में बढ़ना है।
सूत्रों के मुताबिक, नई व्यवस्था का उद्देश्य पर्यावरणीय प्रक्रियाओं को सरल करना और खनन कंपनियों को उन अपशिष्ट पदार्थों के बेहतर उपयोग की अनुमति देना है, जो अयस्क के बाद बच जाते हैं और जिन्हें टेलिंग्स कहा जाता है।
टेलिंग्स रीसाइक्लिंग की नई सुविधा से क्या बदलेगा?
नई नीति के लागू होने के बाद खनन कंपनियों को अब मौजूदा खनन क्षेत्र में ही टेलिंग्स को दोबारा प्रोसेस करने की इजाज़त होगी। इसके तहत कंपनियां बिना अलग पर्यावरण मंजूरी के— उपयोगी खनिजों को दोबारा निकाल पाएंगी, पानी और अन्य संसाधनों को पुनः प्राप्त कर सकेंगी, और टेलिंग्स डंपिंग से होने वाले पर्यावरणीय बोझ को कम कर सकेंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे खनन अपशिष्ट में छिपे मूल्यवान संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और नई खदानों पर निर्भरता कुछ हद तक घटेगी। साथ ही, परियोजनाओं की रफ्तार बढ़ेगी और लागत में कमी आएगी।
उद्योग विशेषज्ञों ने फैसले को बताया समय की जरूरत
उद्योग जगत ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा खदान क्षेत्रों के भीतर पुनर्चक्रण जैसी गतिविधियों के लिए भी पहले अलग पर्यावरण मंजूरी की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था, जिसके कारण कई परियोजनाएं महीनों तक अटकी रहती थीं और खर्च भी बढ़ जाता था।
वेदांता समूह की कंपनी Hindustan Zinc Limited के मुख्य परिचालन अधिकारी किशोर कुमार एस ने सरकार के निर्णय को खनन क्षेत्र के लिए प्रोत्साहनकारी बताया। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था से संचालन में लचीलापन आएगा और कंपनियां अधिक कुशलता से काम कर सकेंगी।
देश की जरूरतों के अनुरूप लिया गया कदम
भारत इस समय ऊर्जा संक्रमण और महत्वपूर्ण खनिजों की बढ़ती मांग के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में खनन क्षेत्र से उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ संसाधनों के सतत उपयोग पर भी जोर दिया जा रहा है। टेलिंग्स रीसाइक्लिंग को सरल बनाकर सरकार एक ओर पर्यावरणीय दबाव कम करने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने की दिशा में भी कदम बढ़ा रही है।
नई नीति से यह उम्मीद जताई जा रही है कि खनन उद्योग न सिर्फ अधिक आत्मनिर्भर होगा, बल्कि आने वाले वर्षों में खनिज संसाधनों के बेहतर प्रबंधन का मार्ग भी प्रशस्त करेगा।




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