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आंखों की सेहत में बदलाव ला रहा सेंट्यूरियन यूनिवर्सिटी का ऑप्टोमेट्री विभाग

आंखों की सेहत में बदलाव ला रहा सेंट्यूरियन यूनिवर्सिटी का ऑप्टोमेट्री विभाग

आंखों की सेहत में बदलाव ला रहा सेंट्यूरियन यूनिवर्सिटी का ऑप्टोमेट्री विभाग

23 मार्च 2026 को दुनियाभर में World Optometry Day मनाया गया। यह दिन उन विशेषज्ञों को समर्पित है जो चुपचाप करोड़ों लोगों की नजर बेहतर बनाने का काम करते हैं। ऑप्टोमेट्रिस्ट लोगों को दुनिया साफ और स्पष्ट देखने में मदद करते हैं। वैश्विक स्तर पर इस पेशे से जुड़े विशेषज्ञों का सम्मान किया जा रहा है। इसी कड़ी में Centurion University of Technology and Management (CUTM) का ऑप्टोमेट्री विभाग भारत में आंखों की सेहत के क्षेत्र में अहम बदलाव ला रहा है।

यह दिन याद दिलाता है कि कुशल पेशेवर धुंधले सपनों को साफ और उज्ज्वल भविष्य में बदल सकते हैं — हर एक आंख की जांच के साथ।

ऑप्टोमेट्री क्या है?

ऑप्टोमेट्री आंखों और दृष्टि देखभाल का विज्ञान है। यह केवल चश्मा लगाने तक सीमित नहीं है। ऑप्टोमेट्रिस्ट आंखों की पूरी जांच करते हैं, ग्लूकोमा और डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसी बीमारियों के शुरुआती लक्षण पहचानते हैं, चश्मे और कॉन्टैक्ट लेंस लिखते हैं और विज़न थेरेपी भी प्रदान करते हैं।

भारत में प्रशिक्षित ऑप्टोमेट्रिस्ट की मांग तेजी से बढ़ रही है। स्क्रीन टाइम बढ़ने, डायबिटीज और बढ़ती उम्र की वजह से देश में 50 करोड़ से अधिक लोग किसी न किसी दृष्टि समस्या से जूझ रहे हैं।

World Health Organization (WHO) के अनुसार, दुनिया में 2.2 अरब लोग दृष्टि बाधित हैं, जिनमें से 1 अरब मामलों को रोका जा सकता है। विश्व ऑप्टोमेट्री दिवस इसी गंभीर स्थिति की ओर ध्यान खींचता है और ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर नेत्र सेवाओं की मांग करता है। ओडिशा के ग्रामीण इलाकों में CUTM इस दिशा में मजबूत उपस्थिति रखता है।

सेंट्यूरियन यूनिवर्सिटी का ऑप्टोमेट्री विभाग

CUTM का ऑप्टोमेट्री विभाग कक्षा की पढ़ाई और वास्तविक प्रशिक्षण के बीच की दूरी को कम करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया था। यहां अत्याधुनिक बी.ऑप्टोम (B.Optom) कोर्स संचालित किया जाता है, जिसे All India Council for Technical Education (AICTE) से मान्यता प्राप्त है।

पहले साल से ही छात्रों को प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी जाती है, जिसमें ऑटो-रिफ्रैक्टर, स्लिट लैंप और फंडस कैमरा जैसे आधुनिक उपकरणों का उपयोग सिखाया जाता है। पाठ्यक्रम में एनाटॉमी, फिजियोलॉजी, फार्माकोलॉजी और लो-विजन रिहैबिलिटेशन शामिल हैं, जिससे छात्र क्लिनिक, अस्पताल और ऑप्टिकल कंपनियों में काम करने के लिए तैयार होते हैं। कई छात्र प्रमुख आईवियर कंपनियों जैसे Lenskart में भी करियर बनाते हैं।

CUTM को खास क्या बनाता है?

यूनिवर्सिटी का “वर्क-स्टडी मॉडल” इसे अलग पहचान देता है। पढ़ाई का आधा हिस्सा फील्ड में पार्टनर आई हॉस्पिटल और ऑप्टिकल कंपनियों के साथ होता है। इसका फायदा यह है कि छात्रों पर पढ़ाई का आर्थिक बोझ कम होता है और वे पढ़ाई के दौरान ही कमाई भी करते हैं।

अनुभवी फैकल्टी छात्रों का मार्गदर्शन करती है। कई शिक्षक अंतरराष्ट्रीय योग्यता रखते हैं और World Council of Optometry जैसे संगठनों से जुड़े हैं।

सामुदायिक सेवा भी विभाग की बड़ी ताकत है। पिछले साल जनजातीय इलाकों में लगे कैंपों में 5,000 से अधिक आंखों की जांच की गई, जरूरतमंदों को मुफ्त चश्मे दिए गए और 200 से ज्यादा गंभीर मामलों को तुरंत इलाज के लिए भेजा गया।

यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. दीपक कुमार साहू के अनुसार, ऑप्टोमेट्रिस्ट सिर्फ डिग्री धारक नहीं, बल्कि समाज में बदलाव लाने वाले पेशेवर हैं जो लोगों की जिंदगी में रोशनी भरते हैं।

CUTM में ऑप्टोमेट्री कोर्स और करियर अवसर

बेंगलुरु, हैदराबाद और देश के अन्य शहरों के छात्रों के लिए CUTM का ऑप्टोमेट्री कोर्स बेहतरीन करियर का रास्ता बन सकता है। इस क्षेत्र में शुरुआती वेतन आमतौर पर 3 से 5 लाख रुपये सालाना होता है, जो अनुभव के साथ 10 लाख रुपये सालाना तक पहुंच सकता है।

भारत का आईवियर बाजार 25,000 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है और इसमें हर साल लगभग 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान है। ऐसे में इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं। निजी प्रैक्टिस हो, अस्पताल सेवा या रिसर्च — ऑप्टोमेट्री एक स्थिर और प्रभावशाली करियर विकल्प है।

उज्ज्वल दृष्टि, बेहतर भविष्य

इस विश्व ऑप्टोमेट्री दिवस पर CUTM ने सभी के लिए बेहतर और साफ दृष्टि वाला भविष्य बनाने का संकल्प दोहराया है। इच्छुक छात्र यूनिवर्सिटी की आधिकारिक वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन कर विज़न के इस बदलाव का हिस्सा बन सकते हैं।

आज आंखों की अच्छी देखभाल, कल बेहतर भारत की नींव है।

Asmita Sarkar

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