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NIT राउरकेला को बड़ी सफलता: थर्मल इमेजिंग और चाल पहचान आधारित स्वचालित सुरक्षा प्रणाली का पेटेंट

NIT राउरकेला को बड़ी सफलता: थर्मल इमेजिंग और चाल पहचान आधारित स्वचालित सुरक्षा प्रणाली का पेटेंट

ओडिशा के राउरकेला स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान राउरकेला (NIT Rourkela) के शोधकर्ताओं ने एक पूरी तरह स्वचालित सुरक्षा प्रणाली विकसित कर उसका पेटेंट हासिल किया है। यह नई तकनीक बड़े और जटिल भवनों में अनधिकृत प्रवेश करने वाले लोगों की पहचान उनके चलने के पैटर्न के आधार पर करती है। संस्थान के अधिकारियों का कहना है कि यह समाधान आधुनिक सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है और इसे अगली पीढ़ी की निगरानी तकनीक माना जा रहा है।

यह प्रणाली थर्मल इमेजिंग और गेट (चाल) रिकग्निशन तकनीक का इस्तेमाल करती है। बड़े परिसरों, कॉर्पोरेट इमारतों और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा बनाए रखना अक्सर चुनौतीपूर्ण होता है। पारंपरिक सीसीटीवी कैमरों पर आधारित निगरानी में लगातार मानव निगरानी और फुटेज विश्लेषण की जरूरत पड़ती है, जिससे न केवल समय अधिक लगता है बल्कि मानवीय त्रुटियों की संभावना भी बनी रहती है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर समित अरी के अनुसार, बड़े सेटअप में कई कैमरों से किसी व्यक्ति को लगातार ट्रैक करना आसान नहीं होता, खासकर तब जब रोशनी की स्थिति बदलती रहे या रास्ते में अवरोध हों। इन सीमाओं को दूर करने के लिए शोधकर्ताओं ने एक ऐसी गैर-घुसपैठ और पूरी तरह स्वचालित प्रणाली तैयार की है जो थर्मल इमेजिंग के जरिए लोगों का पता लगाती है, उनकी पहचान करती है और उनकी गतिविधियों पर नजर रखती है।

प्रोफेसर अरी ने बताया कि यह प्रणाली संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी के लिए विशेष रूप से तैयार की गई है। थर्मल इमेजिंग तकनीक कम इन्फ्रारेड शोर के कारण इंसानों को पृष्ठभूमि से अलग पहचानने में मदद करती है। यही वजह है कि कम रोशनी या रात के समय भी यह तकनीक सटीक तरीके से काम करती है।

पहचान की सटीकता बढ़ाने के लिए शोध दल ने मानव चाल को बायोमेट्रिक पहचान के रूप में इस्तेमाल किया है। हर व्यक्ति के चलने का तरीका अलग होता है और इसी विशेषता का उपयोग कर सिस्टम लोगों की पहचान करता है। इससे लगातार मैन्युअल निगरानी की जरूरत काफी कम हो जाती है।

सिस्टम के काम करने का तरीका भी सरल और प्रभावी है। जैसे ही कोई व्यक्ति प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करता है, सिस्टम उसके चलने के तरीके की तुलना अधिकृत लोगों के डेटा से करता है। अगर पैटर्न मेल नहीं खाता, तो व्यक्ति को संदिग्ध मानकर सुरक्षाकर्मियों को तुरंत अलर्ट भेजा जाता है। शोधकर्ताओं ने तीन थर्मल कैमरों और यूएसबी इंटरफेस के जरिए केंद्रीय सर्वर से जुड़े एक कार्यशील प्रोटोटाइप को भी विकसित किया है।

यह तकनीक शैक्षणिक संस्थानों, कॉर्पोरेट परिसरों, औद्योगिक इकाइयों और अनुसंधान केंद्रों में सुरक्षा मजबूत करने के लिए उपयोगी मानी जा रही है। रक्षा प्रतिष्ठानों और उच्च सुरक्षा क्षेत्रों में भी इसकी अहम भूमिका हो सकती है, जहां विश्वसनीय पहचान बेहद जरूरी होती है।

रात्रिकालीन निगरानी और कम दृश्यता वाले वातावरण में इसकी क्षमता इसे और खास बनाती है। कठिन परिस्थितियों में भी यह प्रणाली भरोसेमंद तरीके से काम करने के लिए डिजाइन की गई है। इससे न केवल सुरक्षा निगरानी बेहतर होती है, बल्कि खतरे का तेजी से और सटीक पता लगाकर समय पर कार्रवाई भी संभव हो पाती है।

साथ ही, सिस्टम में सुरक्षित रूप से संग्रहीत चाल डेटा भविष्य में फोरेंसिक जांच में भी मददगार हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक मैन्युअल निगरानी पर निर्भरता कम करेगी, परिचालन दक्षता बढ़ाएगी और संवेदनशील परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था को नई मजबूती देगी।

Asmita Sarkar

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