
पश्चिम बंगाल के दूरदराज इलाके सुंदरबन के सांकिजाहान गांव में स्थित विवेकानंद आदर्श विद्यालय (Vivekananda Adarsha Vidyalaya) ने शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। 27 मार्च 2026 को यहां वार्षिक सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ आधुनिक STEM और डिजिटल लैब का उद्घाटन किया गया। इस मौके पर शिक्षा, प्रशासन और कॉर्पोरेट जगत से जुड़े कई प्रमुख चेहरे उपस्थित रहे, जिन्होंने इस पहल को ग्रामीण शिक्षा के लिए एक सकारात्मक बदलाव बताया।
कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों और समाजसेवियों की भागीदारी ने इस आयोजन को खास बना दिया। आयोजकों के मुताबिक, इस तरह के प्रयास ग्रामीण छात्रों को मुख्यधारा की शिक्षा और तकनीक से जोड़ने में अहम भूमिका निभाते हैं।
यह विद्यालय श्रीमती अनु चौधरी मेमोरियल फाउंडेशन के तहत संचालित होता है, जिसकी स्थापना वर्ष 2007 में पूर्व विधायक जयकृष्ण हलदार ने की थी। सीमित संसाधनों के बावजूद यह संस्थान आज करीब 300 छात्रों को शिक्षा दे रहा है, जहां 14 शिक्षक लगातार बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने में जुटे हैं।
फाउंडेशन के अध्यक्ष जयकृष्ण हलदार ने कार्यक्रम में कहा कि ग्रामीण भारत में शिक्षा सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज को मजबूत बनाने का भी माध्यम है। उन्होंने बताया कि पिछले एक साल में स्कूल ने अपने ढांचे को काफी बेहतर किया है। STEM और डिजिटल लैब की स्थापना के साथ-साथ खेल सुविधाओं का विस्तार, किचन गार्डन और बायोडायवर्सिटी पार्क जैसे प्रयासों ने छात्रों को सीखने का नया अनुभव दिया है।
फाउंडेशन के सचिव प्रोफेसर उज्ज्वल के. चौधरी ने कहा कि आज के समय में शिक्षा को किताबों से आगे ले जाना जरूरी है। उनके अनुसार, “डिजिटल और STEM लैब जैसे आधुनिक शिक्षण माध्यम हमारे छात्रों को विज्ञान और तकनीक से जोड़ने में मदद करेंगे।” उन्होंने बताया कि अब छात्र प्रयोग और सहयोग के जरिए सीख रहे हैं, जिससे उनकी समझ और आत्मविश्वास दोनों बढ़ रहे हैं।
सुंदरबन जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में यह स्कूल चुपचाप एक बड़े बदलाव की कहानी लिख रहा है। स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रेरित यह संस्थान शिक्षा को जीवन से जोड़कर देखने पर जोर देता है। यहां पढ़ाई के साथ-साथ खेल, कला और सामाजिक गतिविधियों के जरिए बच्चों के सर्वांगीण विकास पर ध्यान दिया जाता है।
पिछले एक वर्ष में स्कूल ने कई अहम उपलब्धियां हासिल की हैं। नए लैब की शुरुआत, खेल गतिविधियों का विस्तार और पर्यावरण शिक्षा को बढ़ावा देना—ये सभी पहल छात्रों के बेहतर भविष्य की दिशा में उठाए गए कदम हैं। स्कूल प्रशासन का मानना है कि इन प्रयासों में शिक्षकों, अभिभावकों और समाज के सहयोग की बड़ी भूमिका रही है।
विद्यालय के प्रधानाचार्य देवाशीष दास का कहना है कि सुंदरबन के ग्रामीण इलाकों में आज भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एक चुनौती बनी हुई है। ऐसे में इस तरह की सुविधाएं छात्रों को बड़े शहरों के बराबर अवसर देने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं। स्कूल में कक्षाओं के अलावा पुस्तकालय, डिजिटल लैब, STEM लैब, नाट्य मंच और विज्ञान हॉल जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, और भविष्य में इसके विस्तार की योजना भी तैयार की जा रही है।
स्कूल के आसपास फैला प्राकृतिक वातावरण भी शिक्षा का एक हिस्सा बन चुका है। लगभग 70 बीघा वन क्षेत्र और 40 बीघा जल क्षेत्र छात्रों को प्रकृति के करीब रहकर सीखने का अवसर देता है, जिससे उनका दृष्टिकोण और समझ दोनों विकसित होती हैं।
कुल मिलाकर, सांकिजाहान का यह विद्यालय आज एक ऐसे मॉडल के रूप में सामने आ रहा है, जो दिखाता है कि सही दिशा और प्रयास से ग्रामीण क्षेत्रों में भी गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा संभव है। यह पहल न केवल स्थानीय बच्चों के भविष्य को संवार रही है, बल्कि देश के अन्य दूरदराज इलाकों के लिए भी एक प्रेरणा बन सकती है।




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