
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 10वीं की सेकेंड बोर्ड परीक्षा 2026 को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। बोर्ड ने साफ किया है कि स्कूल छात्रों से किसी भी तरह की अतिरिक्त या अनधिकृत फीस नहीं ले सकते। यह कदम तब उठाया गया जब सीबीएसई को जानकारी मिली कि कुछ स्कूल सेकेंड बोर्ड परीक्षा के लिए उम्मीदवारों की सूची (LOC) जमा करते समय छात्रों से तीन महीने की ट्यूशन फीस तक मांग रहे हैं।
बोर्ड ने ऐसी वसूली को नियमों के खिलाफ बताते हुए कहा है कि एनओसी या एलओसी से जुड़ी प्रक्रिया में छात्रों से केवल परीक्षा शुल्क ही लिया जा सकता है। इसके अलावा किसी भी तरह की रकम मांगना पूरी तरह गलत है। सीबीएसई 10वीं की सेकेंड बोर्ड परीक्षा मई 2026 में आयोजित करेगा।
छात्रों को प्रदर्शन सुधारने का अवसर
सेकेंड बोर्ड परीक्षा उन विद्यार्थियों के लिए बड़ा मौका है, जो अपने अंकों में सुधार करना चाहते हैं। छात्र अधिकतम तीन विषयों में दोबारा परीक्षा देकर अपने मार्क्स बेहतर कर सकते हैं। यह व्यवस्था उन छात्रों को मदद करती है जिन्हें मुख्य परीक्षा के बाद लगता है कि वे बेहतर कर सकते थे।
एलओसी प्रक्रिया तीन चरणों में
सीबीएसई ने एलओसी (List of Candidates) भरने की प्रक्रिया भी स्पष्ट की है। यह प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी होगी—
पहला चरण: केवल एलओसी फॉर्म भरना होगा। इस समय कोई फीस नहीं ली जाएगी। इसका उद्देश्य यह जानना है कि कितने छात्र परीक्षा में शामिल होने वाले हैं।
दूसरा और तीसरा चरण: छात्रों को अपनी जानकारी अपडेट करने, विषय जोड़ने या हटाने और परीक्षा शुल्क जमा करने का अवसर मिलेगा। इसी चरण में एलओसी फाइनल होगी।
स्कूलों को चेतावनी
बोर्ड ने अपने आधिकारिक नोटिफिकेशन में कहा है कि सभी स्कूल नियमों का कड़ाई से पालन करें। यदि कोई स्कूल गलत तरीके से अतिरिक्त फीस वसूलते पाया गया, तो उस पर कार्रवाई तय है।
पूरी प्रक्रिया स्कूलों के माध्यम से ही पूरी की जाएगी और इसका लाभ केवल उन छात्रों को मिलेगा जिन्होंने मुख्य बोर्ड परीक्षा में हिस्सा लिया है।
सेकेंड एग्जाम नहीं देने पर क्या होगा?
यदि कोई छात्र सेकेंड बोर्ड परीक्षा में शामिल नहीं होता है, तो उसका रिजल्ट मुख्य परीक्षा में मिले अंकों के आधार पर ही जारी किया जाएगा। यानी सेकेंड परीक्षा में बैठना पूरी तरह वैकल्पिक है, लेकिन यह उन छात्रों को सुधार का एक और मौका देता है।




Add comment