
राजस्थान में होने वाली सब-इंस्पेक्टर और प्लाटून कमांडर भर्ती परीक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा बदलाव करते हुए अपने ही आदेश में संशोधन कर दिया है। अदालत ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि 5 और 6 अप्रैल को होने वाली इस परीक्षा में पहले दी गई राहत को सीमित करते हुए अब केवल एक अभ्यर्थी को ही शामिल होने की अनुमति होगी।
यह फैसला उस आदेश में बदलाव के रूप में आया है, जो सुप्रीम कोर्ट ने 2 अप्रैल को सुनाया था। उस समय अदालत ने 713 अभ्यर्थियों को अस्थायी तौर पर परीक्षा में बैठने की अनुमति देने का निर्देश दिया था। हालांकि, राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की आपत्ति के बाद अदालत ने इस पर दोबारा विचार किया।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ, जिसने अवकाश के दिन भी सुनवाई की, ने आयोग की दलीलों को स्वीकार करते हुए पहले के आदेश में संशोधन किया। अब यह राहत केवल याचिकाकर्ता सूरज मल मीना तक सीमित कर दी गई है।
आरपीएससी ने अदालत में कहा था कि पिछली सुनवाई के दौरान कुछ महत्वपूर्ण तथ्य सामने नहीं आ पाए थे। इसी आधार पर आयोग ने आदेश में संशोधन की मांग की थी। अदालत ने इन दलीलों पर गौर करते हुए फैसला बदला और 700 से अधिक अन्य अभ्यर्थियों को दी गई अनुमति वापस ले ली।
गौरतलब है कि आरपीएससी 1,015 पदों के लिए यह भर्ती परीक्षा आयोजित कर रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के शामिल होने की संभावना है। पहले दिए गए आदेश के अनुसार, जिन अभ्यर्थियों को परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई थी, उनके परिणाम तब तक जारी नहीं किए जाने थे, जब तक राजस्थान हाई कोर्ट इस मामले से जुड़ी याचिकाओं पर अंतिम फैसला नहीं दे देता।
हालांकि, अब संशोधित आदेश के बाद यह स्थिति बदल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि अन्य प्रभावित अभ्यर्थी चाहें तो राजस्थान हाई कोर्ट का रुख कर सकते हैं। यदि हाई कोर्ट अपने अंतिम फैसले में दोबारा परीक्षा कराने का निर्देश देता है, तो वे उसमें शामिल होने के लिए अनुमति मांग सकते हैं।
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि भी अहम है। इससे पहले यह परीक्षा बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और कदाचार के आरोपों के चलते रद्द कर दी गई थी। इसके बाद आयोग ने बिना आयु सीमा में अतिरिक्त छूट दिए दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया, जिस पर अभ्यर्थियों ने आपत्ति जताई।
मामला पहले जयपुर स्थित राजस्थान हाई कोर्ट की एकल पीठ के सामने गया, जहां कुछ अभ्यर्थियों को अस्थायी राहत मिली। लेकिन बाद में हाई कोर्ट की खंडपीठ ने उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
ताजा फैसले के बाद अब इस भर्ती प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हैं, खासकर उन अभ्यर्थियों की, जो लंबे समय से इस परीक्षा और उससे जुड़े विवादों के समाधान का इंतजार कर रहे हैं।




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