
प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया (PM SHRI Schools Scheme) के तहत देश में अब तक 13,076 स्कूलों को मंजूरी मिल चुकी है। हालांकि केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे तीन राज्यों में यह योजना अभी तक लागू नहीं हो पाई है। इन राज्यों में फिलहाल चुनावी प्रक्रिया जारी है, जिसे इसकी एक बड़ी वजह माना जा रहा है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय लंबे समय से कोशिश कर रहा है कि ये राज्य भी इस योजना से जुड़ें, लेकिन अब तक सहमति नहीं बन सकी है। इसे लेकर सियासी मतभेद भी खुलकर सामने आए हैं, जिससे योजना का विस्तार प्रभावित हुआ है।
केरल में समझौते के बाद भी रुकी योजना
केरल सरकार ने अक्टूबर 2025 में केंद्र के साथ इस योजना को लेकर समझौता किया था, लेकिन बाद में विवाद बढ़ने के चलते इसे रोक दिया गया। शिक्षा से जुड़े जानकारों का मानना है कि अब इन राज्यों में चुनाव के बाद ही स्थिति साफ हो पाएगी। अगर सत्ता में बदलाव होता है, तो योजना के लागू होने की संभावना बढ़ सकती है। वहीं, मौजूदा सरकारें बनी रहती हैं तो उनके रुख पर नजर रहेगी।
दिल्ली का उदाहरण भी सामने है, जहां पहले यह योजना लागू नहीं हो सकी थी, लेकिन सरकार बदलने के बाद इसे शुरू कर दिया गया।
संसदीय समिति ने जताई चिंता
हाल ही में संसद की स्थायी समिति की रिपोर्ट में भी इस मुद्दे का जिक्र किया गया है। समिति ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के दौरान इस योजना के लिए आवंटित बजट का उपयोग अपेक्षा के अनुरूप नहीं हो पाया है। इसकी एक बड़ी वजह राज्यों की धीमी खर्च प्रक्रिया बताई गई है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि तमिलनाडु, केरल और पश्चिम बंगाल ने अभी तक केंद्र के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, जिससे योजना का क्रियान्वयन अटका हुआ है। समिति ने सुझाव दिया है कि केंद्र और राज्य आपसी सहमति से इस मुद्दे को सुलझाएं और लंबित फंड जल्द जारी किए जाएं।
तीन राज्यों में 1500 स्कूल बाकी
पीएम-श्री (PM-SHRI) योजना के तहत देशभर में कुल 14,500 स्कूल विकसित किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें से 13,076 स्कूलों को मंजूरी मिल चुकी है, जबकि करीब 1,500 स्कूल अभी केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में स्थापित होने बाकी हैं।
शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, सभी राज्यों को PM-SHRI स्कूलों का एक मानक मॉडल भी दिया गया है, ताकि वे अपने अन्य सरकारी स्कूलों को भी इसी स्तर पर विकसित कर सकें।
विपक्ष के आरोप भी तेज
इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। All India Trinamool Congress (TMC) के सांसद कीर्ति आजाद ने आरोप लगाया है कि विपक्ष शासित राज्यों—जैसे पंजाब, तमिलनाडु, केरल और पश्चिम बंगाल—को केंद्र सरकार की योजनाओं के तहत पूरा फंड नहीं मिलता। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र अपनी शर्तों को राज्यों पर थोपने की कोशिश कर रहा है।
आगे क्या?
पीएम-श्री (PM-SHRI) योजना को देश में स्कूल शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। लेकिन तीन बड़े राज्यों में इसके लागू न होने से इसकी गति प्रभावित हुई है। अब सबकी नजर चुनावी नतीजों और केंद्र-राज्य के बीच बनने वाली सहमति पर टिकी है, जिससे तय होगा कि यह योजना पूरे देश में कब तक पूरी तरह लागू हो पाती है।




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