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CBSE का बड़ा बदलाव: 9वीं से गणित-विज्ञान दो स्तरों में, 2028 से दिखेगा असर

CBSE का बड़ा बदलाव: 9वीं से गणित-विज्ञान दो स्तरों में, 2028 से दिखेगा असर

CBSE का बड़ा बदलाव: 9वीं से गणित-विज्ञान दो स्तरों में, 2028 से दिखेगा असर

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (Central Board of Secondary Education CBSE) ने स्कूल शिक्षा में अहम बदलाव करते हुए कक्षा 9 और 10 के लिए नया शैक्षणिक ढांचा लागू कर दिया है। इसके तहत 2026-27 सत्र से कक्षा 9 में गणित और विज्ञान को दो स्तरों—मानक (स्टैंडर्ड) और उन्नत (एडवांस्ड)—में पढ़ाया जाएगा। इस बदलाव का असर पहली बार 2028 में होने वाली कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में दिखाई देगा, जब छात्र इन विषयों में नई प्रणाली के तहत परीक्षा देंगे।

यह कदम National Education Policy 2020 (NEP 2020) और नए National Curriculum Framework (NCF) की सिफारिशों के अनुरूप उठाया गया है, जिसका उद्देश्य छात्रों की अलग-अलग सीखने की क्षमता और रुचि के हिसाब से पढ़ाई को अधिक लचीला बनाना है।

गणित और विज्ञान में दो-स्तरीय पढ़ाई कैसे होगी

CBSE के अनुसार, कक्षा 9 से सभी छात्रों के लिए गणित और विज्ञान का मानक स्तर अनिवार्य रहेगा। इसके तहत छात्र 80 अंकों की तीन घंटे की सामान्य परीक्षा में शामिल होंगे। वहीं, जिन छात्रों की इन विषयों में गहरी रुचि या बेहतर समझ है, वे वैकल्पिक रूप से उन्नत स्तर का चयन कर सकेंगे। यह विकल्प उन्हें आगे की पढ़ाई, खासकर विज्ञान और तकनीकी क्षेत्रों में बेहतर तैयारी का मौका देगा।

इस बदलाव को शिक्षा विशेषज्ञ एक बड़े संरचनात्मक सुधार के रूप में देख रहे हैं, क्योंकि अब छात्रों को अपनी क्षमता के अनुसार विषय की गहराई चुनने की आजादी मिलेगी।

2026 से लागू होगा तीन-भाषा फॉर्मूला

CBSE ने यह भी स्पष्ट किया है कि 2026 से कक्षा 6 में तीन-भाषा फॉर्मूला पूरी तरह लागू किया जाएगा। NCF के मुताबिक, इन तीन भाषाओं में से कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी है। भाषाओं को एक तय ढांचे के तहत अलग-अलग स्तरों—आर, आर2 और आरउ—में व्यवस्थित किया गया है, ताकि छात्रों की भाषा सीखने की प्रक्रिया क्रमबद्ध तरीके से आगे बढ़े।

हालांकि, बोर्ड ने कुछ विशेष परिस्थितियों में लचीलापन भी रखा है। अगर कोई छात्र विदेश के किसी स्कूल से पढ़कर भारत आता है और उसने वहां जो तीसरी भाषा पढ़ी है, वह यहां उपलब्ध नहीं है, तो ऐसे मामलों में निर्धारित नियमों के तहत छूट दी जा सकती है।

छात्रों के लिए क्या बदलेगा

नई व्यवस्था के लागू होने के बाद छात्रों को अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार विषय चुनने का ज्यादा अवसर मिलेगा। जहां एक ओर सामान्य स्तर सभी के लिए आधार तैयार करेगा, वहीं उन्नत स्तर उन छात्रों के लिए रास्ता खोलेगा जो आगे चलकर इंजीनियरिंग, रिसर्च या अन्य तकनीकी क्षेत्रों में जाना चाहते हैं।

CBSE का यह कदम शिक्षा को अधिक लचीला, व्यावहारिक और छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में एक अहम प्रयास माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह नई व्यवस्था छात्रों के सीखने के अनुभव और उनके करियर विकल्पों को किस तरह प्रभावित करती है।

Asmita Sarkar

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