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एआई वॉयस क्लोनिंग : साइबर फ्रॉड यानि ठगी का एक नया हथियार

यह बात सुनकर आप चौंक जाएंगे कि आपकी आवाज से भी हो सकती है लूट, लेकिन बात यह सोलह-आने सच है। दरअसल, स्कैमर्स ने अब टेक्नोलॉजी का सहारा लेना शुरू कर दिया है। आपकी आवाज की क्लोनिंग की जा रही है और फिर आवाज का इस्तेमाल कर आपके अपनों को ठगा जा रहा है। जी हाँ, साइबर अपराध की दुनिया में ‘एआई वॉयस क्लोनिंग’ (AI Voice Cloning) ठगी का एक नया हथियार बन चुका है। 
 
     

तकनीक के बगैर दुनिया की कल्पना नहीं की जा सकती। टेक्नोलॉजी के तेजी से बदलते स्वरूप के बीच लगातार नए-नए अपडेट लोगों को अक्सर लुभाते हैं। एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस भी इसी कड़ी में एक नया चमत्कार है। कहें तो विज्ञान का नया वरदान। लेकिन हमारी ज़िन्दगी को आसान बनाने के साथ ही एआई ने हमारे लिए कई तरह के खतरे भी बढ़ा दिए हैं। एआई वॉयस क्लोनिंग से भी ऐसा ही एक खतरा आज हमारे सामने विकराल रूप में आ खड़ा हुआ है। साइबर अपराधियों ने लोगों को ठगी का शिकार बनाने के लिए वॉयस क्लोनिंग को एक नया हथियार बना लिया है और लोग इसका बड़े पैमाने पर शिकार भी हो रहे हैं।   
 
‘एआई वॉयस क्लोनिंग स्कैम’ गूगल सर्च इंजन के लिए खोज की एक चचित शब्दावली बन चुकी है। दरअसल, साइबर अपराधी एआई टूल की मदद से लोगों की आवाज की कॉपी कर रहे हैं, और फिर इस नकली आवाज का इस्तेमाल कर उसके दोस्तों, रिश्तेदारों और जान पहचान वालों को ठग रहे हैं। ठगी भी कई तरीकों से। कभी ज़रूरत का हवाला देकर पैसों की मांग करना, कभी मुसीबत में फंसे होने की सूचना देकर पैसों की डिमांड तो कभी बैंक व क्रेडिट कार्ड से जुड़ी गोपनीय जानकारी मांग कर चूना लगाने का उपक्रम। यानी असली आवाज़ की नक़ल तैयार कर उसका इस्तेमाल असल फ्रॉड करने में इन दिनों धड़ल्ले से हो रहा है।

एआई वॉयस क्लोनिंग स्कैम आज हमारे लिए कितने बड़े खतरे के रूप में उभर चुका है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले छह महीने में भारत में जितने स्कैम हुए हैं उनमें 83 फीसदी वॉयस क्लोन वाले ही हैं। वॉयस क्लोन स्कैम में लोगों ने करोड़ों रुपये गंवाए हैं। इसके जरिए हर रोज किसी-ना-किसी को शिकार बनाया जा रहा है। इसमें हर साल 38 फीसदी का इजाफा हो रहा है। वॉयस क्लोन स्कैम का शिकार सबसे ज्यादा आपके चाहने वालों और सबसे करीबियों को ही बनाया जा रहा है। 

हाल ही में मुंबई में एक मामला सामने आया, जहां एआई वॉयस क्लोनिंग के जरिए एक 68 वर्षीय व्यवसायी से 80 हजार रुपये ठग लिए गए। दरअसल, खुद को दुबई में भारतीय दूतावास का अधिकारी बताकर एक व्यक्ति ने उसे कॉल किया और कहा कि आपके बेटे को दुबई में गिरफ्तार कर लिया गया है। कॉल करने वाले व्यक्ति ने फोन पर बिजनेसमैन को उसके बेटे की आवाज भी सुनाई। बेटे की आवाज सुनकर हड़बड़ाए बिजनेसमैन ने तुरंत ऑनलाइन 80 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए, जो उस व्यक्ति ने उसके बेटे को बचाने के लिए मांगे थे। थोड़ी देर बाद जब बिजनेसमैन ने दुबई में बैठे अपने बेटे को फोन लगाया तो पता चला कि वह अपने घर पर है और उसे किसी ने गिरफ्तार नहीं किया था। दरअसल, एआई वॉयस क्लोनिंग के जरिए बेटे की आवाज से मिलती आवाज बनाकर किसी ने बिजनेसमैन को ठग लिया था। 

वॉयस क्लोनिंग से हो रही ठगी गंभीर बात इसलिए भी है कि कुछ समय पहले एक स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इस स्टडी से पता चला है कि 38 फीसदी भारतीय अपने करीबी लोगों की रियल और क्लोन वॉयस के बीच अंतर नहीं कर पाते हैं। इस स्टडी के सामने आने से एक बात तो साफ है कि टेक्नोलॉजी इतनी एडवांस हो गई है कि क्लोन वॉयस हू-ब-हू रियल आवाज की तरह लग रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उर्फ एआई के जरिए स्कैमर्स पहले तो आपके करीबी लोगों की आवाज को कॉपी करते हैं। जब आवाज कॉपी हो जाती है तो फिर एआई की मदद से वॉयस का क्लोन जेनरेट किया जाता है। इस आवाज का इस्तेमाल कर स्कैमर्स लोगों को डराने का काम करते हैं, डर एक ऐसा भाव है जिसमें कोई भी व्यक्ति अपने चाहने वालों को बचाने के लिए बिना कुछ सोचे-समझे कोई भी कदम उठा बैठता है। 

ऐसे होती है ठगी
वॉयस क्लोनिंग साइबर ठगी का एक नया तरीका है, जिससे साइबर ठग एआई वॉयस क्लोन के जरिए लोगों को किसी दोस्त, रिश्तेदार या परिचित की आवाज में कॉल करते हैं। फिर खुद को किसी मुसीबत में बताकर रूपए की डिमांड करते हैं। साइबर ठगों के झांसे में ज्यादातर लोग आसानी से इसलिए आ जाते हैं क्योंकि फोन पर सुनाई देने वाली आवाज हू-ब-हू उनके परिचित से मिलती-जुलती होती है। अपराधी नकली आवाज के इस्तेमाल के जरिए सुरक्षित शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। साथ ही कॉल के दौरान पैसों और किसी खास तरह की जानकारी की भी मांग कर सकते हैं। 
जाहिर है कि अगर आपके पास कोई कॉल आए और उसमें आपका बेटा या फिर बेटी रोते हुए खुद को बचाने की रिक्वेस्ट करने लगे और उसके बाद आपको कोई पैसे ट्रांसफर करने को कहे तो आप बिना सोचे-समझे बच्चे को बचाने के लिए स्कैमर्स को रुपये ट्रांसफर कर देंगे। वाइस क्लोनिंग से साइबर क्रिमिनल्स कुछ इसी तरह स्कैम को अंजाम दे रहे हैं। 

शिकार होने से कैसे बचें  
एआई टूल की मदद से तैयार नकली आवाज को पहचानना आसान काम तो नहीं, लेकिन कुछ बातों को ध्यान में रखकर नुकसान से बचा जा सकता है। वॉयस क्लोनिंग का शिकार होने से बचने के लिए कॉलर से कोई पर्सनल सवाल पूछ सकते हैं। कोई नितांत व्यक्तिगत जानकारी हासिल करने की कोशिश की जा सकती है। वीडियो कॉल का भी सहारा लिया जा सकता है। आपको कभी भी फोन पर पैसों और कीमती जानकारी को साझा नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही फोन कॉल पर अगर कोई आपसे किसी स्टेप को फॉलो करके एप या वेबसाइट पर जाने के लिए कहे तो आपको सावधान होने की जरूरत है। कभी भी पैसों को एक फोन कॉल आने पर ही ट्रांसफर न करें। बल्कि किसी अन्य तरीके से उस जानकारी को वेरिफाई करें। 

ठग अपनाते हैं ये तरीका
– वाइस क्लोनिंग के लिए स्कैमर्स सबसे पहले अननोन नंबर से कॉल करते हैं। 
–  कॉल करने के बाद स्कैमर्स आपकी वाइस को रिकॉर्ड करते हैं। 
– करीब 5 सेकंड तक वाइस रिकॉर्ड होने के बाद फोन कॉल कट कर दी जाती है। 
– 5 सेकंड की आवाज के जरिए वाइस क्लोनिंग की जाती है। 
– बाद में इसी वाइस क्लोनिंग से आपके रिलेटिव्स को फोन करके धमकाते हैं।

रईस अहमद 'लाली'

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