
देशभर में बढ़ती गर्मी ने आम जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। राजधानी दिल्ली समेत कई राज्यों में दोपहर के समय हालात ऐसे हैं कि बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। कुछ दिनों की हल्की राहत के बाद तापमान फिर तेजी से बढ़ा है और लू के थपेड़ों ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। सड़कों पर कम आवाजाही, बाजारों में घटती भीड़ और सबसे ज्यादा असर स्कूल जाने वाले बच्चों पर देखने को मिल रहा है।
तेज धूप और गर्म हवाओं के बीच रोजाना स्कूल आना-जाना बच्चों के लिए चुनौती बनता जा रहा था। इसी स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने अहम निर्णय लिया है। बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए राज्य में इस बार गर्मियों की छुट्टियां तय समय से पहले घोषित कर दी गई हैं।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि प्रदेश में बढ़ती गर्मी और लू के खतरे को ध्यान में रखते हुए स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश अग्रिम रूप से लागू किया जा रहा है। नए निर्णय के अनुसार, राज्य के सभी स्कूलों में 20 अप्रैल से 15 जून तक छुट्टियां रहेंगी।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब कई इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की गर्मी छोटे बच्चों के लिए खासतौर पर खतरनाक हो सकती है, क्योंकि उन्हें धूप में लंबे समय तक रहना पड़ता है—चाहे वह स्कूल तक पैदल जाना हो या बस का इंतजार करना।
पिछले वर्षों में भी अप्रैल और मई के महीनों में लू के कारण बच्चों के बीमार होने की घटनाएं सामने आती रही हैं। ऐसे में सरकार का यह कदम एहतियात के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे छात्रों को घर पर सुरक्षित वातावरण में रहने का मौका मिलेगा।
करीब डेढ़ महीने से अधिक की इस छुट्टी से न केवल बच्चों को राहत मिलेगी, बल्कि अभिभावकों की चिंता भी कम होगी। इस दौरान छात्र आराम कर सकेंगे और गर्मी के असर से खुद को बचा पाएंगे।
निर्धारित अवकाश के बाद 15 जून के बाद स्कूल फिर से खुलेंगे और शैक्षणिक गतिविधियां सामान्य होंगी। इसी के साथ 11वीं कक्षा में नए सत्र के दाखिले की प्रक्रिया भी शुरू होने की संभावना है।
कुल मिलाकर, बढ़ती गर्मी के बीच लिया गया यह निर्णय बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है।




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