
राजस्थान की राजधानी जयपुर में 20 अप्रैल को आयोजित एडइनबॉक्स रीजनल हायर एजुकेशन समिट 2026 (EdInBox Regional Higher Education Summit 2026) के पैनल डिस्कशन्स में विशेषज्ञों ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब हर उद्योग का अहम हिस्सा बन चुका है, इसलिए शिक्षा व्यवस्था को छात्रों को AI के साथ “प्रतिस्पर्धा” नहीं बल्कि “सहयोग” करना सिखाना होगा।
चर्चा की शुरुआत इस सवाल से हुई कि छात्र AI को समझने के लिए कितने तैयार हैं। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि “AI लिट्रेसी” केवल तकनीकी जानकारी भर नहीं है, बल्कि इसका नैतिक उपयोग, डेटा की समझ और इन तकनीकों से उत्पादक तरीके से काम करना भी शामिल है।
AI टूल्स की बढ़ती उपलब्धता पर चिंता जताते हुए बताया गया कि छात्रों में क्रिटिकल थिंकिंग कमजोर न हो, इसके लिए शिक्षकों को विवेकपूर्ण उपयोग सिखाने की जरूरत है। “टेक्नोलॉजी मदद करती है, लेकिन सोचने की क्षमता इंसान ही विकसित करता है,” पैनलिस्टों ने कहा।
उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच गैप पर बात करते हुए विशेषज्ञों ने कहा कि क्लासरूम में सैद्धांतिक AI सिखाया जाता है, जबकि वास्तविक कार्यस्थलों पर इसका उपयोग अधिक व्यावहारिक और समस्या-समाधान आधारित होता है। इस अंतर को कम करना अब समय की मांग है।
भविष्य को लेकर पैनलिस्टों ने बताया कि जैसे-जैसे AI और उन्नत होगा, वैसे-वैसे मानवीय कौशल—जैसे नेतृत्व, रचनात्मकता, निर्णय क्षमता और सहानुभूति—और अधिक महत्वपूर्ण होते जाएंगे।




Add comment