
जयपुर में 20 अप्रैल को आयोजित एडइनबॉक्स रीजनल हायर एजुकेशन समिट 2026 (EdInBox Regional Higher Education Summit 2026) के पैनल डिस्कशन में विशेषज्ञों ने फोरेंसिक साइंस के बढ़ते महत्व पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि फिल्मों और वेब सीरीज़ ने इस क्षेत्र की एक ग्लैमरस छवि बना दी है, जबकि वास्तविकता इससे कहीं अधिक तकनीकी और नैतिक जिम्मेदारियों से भरी है।
विशेषज्ञों ने बताया कि डिजिटल फोरेंसिक, साइबर इन्वेस्टिगेशन और डेटा एनालिसिस के बढ़ते उपयोग ने पारंपरिक फोरेंसिक भूमिकाओं को बदल दिया है। अब यह क्षेत्र केवल भौतिक नमूनों की जांच तक सीमित नहीं, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, नेटवर्क लॉग और डिजिटल फूटप्रिंट के विश्लेषण तक फैल गया है।
पैनलिस्टों ने जोर दिया कि फोरेंसिक साइंस विज्ञान, कानून और तकनीक के संगम पर खड़ा विषय है। इसलिए छात्रों को इंटरडिसिप्लिनरी शिक्षा देना बेहद आवश्यक है, ताकि वे अदालतों, पुलिस जांच और वैज्ञानिक परीक्षण—तीनों की मांगों को समझ सकें।
शिक्षा व्यवस्था पर चर्चा करते हुए विशेषज्ञों ने कहा कि अभी भी कई संस्थानों में फोकस सिर्फ सिद्धांत पर है, जबकि असली जरूरत है जांच-आधारित सोच, केस-स्टडी, और प्रायोगिक प्रशिक्षण की।
भविष्य के अवसरों पर बात करते हुए बताया गया कि आने वाले वर्षों में डीएनए एनालिसिस, साइबर फोरेंसिक, फाइनेंशियल फोरेंसिक, फोरेंसिक मनोविज्ञान और बायोमेट्रिक तकनीकों जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर विशेषज्ञों की मांग बढ़ने वाली है।




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