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पेपर लीक के पीछे बड़ा ‘खेल’

ताज़ा मामला नीट का है। यानी देशभर में मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए आयोजित होने वाली परीक्षा का। ख़बरें आई हैं कि राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा यानी नेशनल एंट्रेंस कम एलिजिबिलिटी टेस्ट (NEET) का भी पेपर लीक हो गया। 5 मई को आयोजित इस परीक्षा में देशभर से लगभग 24 लाख छात्र शामिल हुए थे। अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि इस परीक्षा के रद्द होने से छात्रों को कितनी परेशानी का सामना करना पड़ेगा, छात्रों के मनोबल पर इसका कितना असर पड़ेगा।    

दरअसल, देश में परीक्षाओं के पेपर लीक होना अब एक आम-सी बात हो गयी है। पेपर लीक के मामले लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं। बीते सात साल में ही पेपर लीक के 70 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। और इस पेपर लीक की वजह से एक अनुमान के मुताबिक लगभग दो करोड़ छात्र प्रभावित हुए हैं। उत्तरप्रदेश में तो साल 2024 के महज फ़रवरी महीने में ही आयोजित तीन-तीन परीक्षाओं के पेपर लीक हो चुके हैं और परीक्षाएं रद्द की जा चुकी हैं। उत्तम प्रदेश होने का दावा करने वाले इस सूबे में पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा, समीक्षा अधिकारी (RO) और सहायक समीक्षा अधिकारी (ARO) परीक्षा और 12वीं क्लास के जीव विज्ञान और गणित की परीक्षा का पेपर व्हाट्सएप पर लीक हो गया था। 2017-2024 के बीच ही उत्तर प्रदेश में पेपर लीक के कम से कम एक दर्जन मामले सामने आ चुके हैं। 

इससे पहले बिहार में कुछ महीने पूर्व शिक्षक भर्ती परीक्षा के पेपर लीक होने की वजह से परीक्षा रद्द की जा चुकी है। राजस्थान, गुजरात जैसे प्रदेशों से भी कई परीक्षाओं के पेपर लीक होने के मामले हाल के दिनों में सामने आ चुके हैं। ऐसे में समझा जा सकता है कि देश का युवा हताशा के कैसे सागर में गोते खा रहा है। उसका मनोबल इससे कितना कमजोर हो रहा है। सरकारें भले ही फुलप्रूफ परीक्षा कराने के बड़े-बड़े दावे करती रही हों, मगर परीक्षाओं के पेपर लीक होने से नहीं रोक पा रही हैं। ऐसे में सवाल यह भी उठता है कि आखिर पेपर लीक को रोकना क्यों चुनौती बनता जा रहा है? क्यों एजेंसियां पेपर लीक को रोकने में अक्षम साबित हो रही हैं ?

इन सवालों पर महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में कुलपति और उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक रहे विभूति नारायण राय कहते हैं- दरअसल, पेपर लीक अब एक बड़ा खेल बन चुका है। इस खेल में बिचौलियों, शिक्षा माफियाओं और यूनिवर्सिटी-कॉलेज प्रशासन के कुछ लोगों के शामिल होने से पेपर लीक के मामले बढ़े हैं। इनका मकसद हर हाल में सिर्फ पैसे कमाना है। ये पेपर लीक करके इसे मुंहमांगी कीमत पर छात्रों को बेचते हैं और अपना हित साधते हैं।

विभूति नारायण राय कहते हैं कि जब तक पेपर लीक के मामलों में बड़े अफसरों को जवाबदेह नहीं बनाया जाएगा, तब तक समस्या का समाधान निकलना मुश्किल है। उनका साफ़ कहना है कि जिन सेंटरों पर पेपर लीक हों, उनके शीर्ष अधिकारियों पर नकेल कसी जानी चाहिए। अभी पेपर लीक मामले में चपरासी या मास्टर या लाइब्रेरियन वगैरह को दोषी ठहराकर पकड़ लिया जाता है और यह मामला नहीं रुक पाता है। हालांकि पेपर लीक में तकनीक के शामिल होने को भी वे एक बड़ी वजह मानते हैं। वे कहते हैं कि सारा खेल भर्ती परीक्षा के केंद्रों के अलॉटमेंट में होता है। ये गड़बड़ी पेपर बनाने वाली मशीनों से लेकर परीक्षा केंद्रों तक पेपर ले जाने के दौरान भी की जाती है।

ऐसे में पेपर लीक की रोकथाम के लिए क्या हो उपाय? इसपर उनका कहना है कि जिस तकनीक की वजह से पेपर लीक के मामले बढ़ रहे हैं, उसी को हथियार बनाया जाना चाहिए। सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी की मदद से परीक्षा प्रक्रिया को आसान बनाया जा सकता है। एक सेंट्रल सॉफ्टवेयर होना चाहिए, जिस पर समूची परीक्षा प्रणाली टिकी होनी चाहिए ताकि धांधली की गुंजाइश कम से कम हो सके। ऑटोमेटेड प्रॉसेस होना चाहिए, जिससे मैनुअल गलतियों से बचा जा सकता है और पेपर लीक की आशंका कम हो जाती है। पेपर सेट करने का तरीका भी इलेक्ट्रॉनिक होना चाहिए। सॉफ्टवेयर की ही मदद से क्वेश्चन पेपर के सेट तैयार किए जाने चाहिए। पेपर की प्रिंटिंग और डिलीवरी भी ऑनलाइन होनी चाहिए, जिससे पेपर लीक न होने पाए।

बहरहाल, यह एक कड़वी सच्चाई है कि पेपर लीक आज की तारीख में एक बड़ा सिरदर्द बन चुका है। एक बड़ा खेल जिसमें करोड़ों-अरबों के वारे न्यारे हो रहे हैं। जाहिर है जब अर्थ का इतना दखल है इसमें, तो इसका दायरा भी लगातार बढ़ रहा है। राजस्थान-गुजरात में तो बीते कुछ सालों में यह एक बड़े धंधे में तब्दील हो गया है। गुजरात में जहाँ हाल के वर्षों में चीफ ऑफिसर, तलाती परीक्षा, टीचर भर्ती, मुख्य सेविका, नायब चिटनिस, हेड क्लर्क, फॉरेस्ट गार्ड जैसी तमाम परीक्षाओ के पेपर लीक हो चुके हैं, वहीँ राजस्थान में भी टीचर भर्ती, यूजीसी नेट और पुलिस भर्ती के पेपर लीक हो चुके हैं। 

राजस्थान में 2019 के बाद से हर साल औसतन तीन पेपर लीक हुए हैं। एक जांच के दौरान पुलिस अधिकारियों को सबूत मिले कि हर एक पेपर को लीक करने के बदले में 5 से 15 लाख रुपये तक आरोपियों को मिले। पेपर लीक के मास्टरमाइंड ने पेपर को खरीदने के लिए एक शिक्षक को 40 लाख रुपये तक का भुगतान किया था, जिसे प्रति छात्र पांच लाख रुपये में बेचा था। मध्य प्रदेश बोर्ड एग्जाम 2023 में भी पेपर लीक होने की बात स्कूली शिक्षा विभाग ने मानी थी। बिहार और उत्तर प्रदेश भी इस मामले में गढ़ बनता जा रहा है। कई दूसरे प्रदेश भी धीरे धीरे इसकी चपेट में आ रहे हैं। तेलंगाना में केसीआर की सरकार के दौरान कांग्रेस ने इसे एक बड़ा मुद्दा बना दिया था। वहां तो सीधे-सीधे सीएम चंद्रशेखर राव को ही इस मामले में कटघरे में खड़ा कर दिया गया था। 

इसके अलावा पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, हरियाणा में भी पेपर लीक के मामले सामने आए हैं। दक्षिण भारतीय राज्यों की बात की जाए तो कर्नाटक का पीएससी, कर्नाटक इंजीनियरिंग परीक्षा, तमिलनाडु का टीएनपीएससी, महाराष्ट्र का एचएससी और केरल का एसएसएलसी का फिजिक्स पेपर लीक मामला सुर्खियों में रहा है। वहीं हरियाणा के एचएचएससी और कश्मीर के जूनियर इंजीनियर भर्ती परिक्षा का परिणाम मुख्य रहा है। पेपर लीक के मामले भ्रष्टाचार की ओर इशारा करने के साथ-साथ पूरे सिस्टम पर सवालिया निशान लगाते हैं। 

हर राज्य में पेपर को लीक करने का अलग-अलग अंदाज रहा है। असम में परीक्षा शुरू होने के कुछ सेकंडो़ं में पूरे पेपर को वॉट्सअप पर लीक कर हजारों परीक्षार्थियों को भेजा गया, तो मध्य प्रदेश में आरोपियों ने मुंबई की उस कपंनी के सर्वर को हैक कर लिया था जिसे परीक्षा का आयोजन करने की जिम्मेदारी दी गई थी। महाराष्ट्र में सोशल मीडिया में पेपर लीक हुआ, तो राजस्थान में पेपर सोशल मीडिया पर नहीं बल्कि सरकार के ऑफिस से चुरा कर लीक किया गया। यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा में STF को जांच में पता चला कि ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन की जिस कंपनी को पेपर प्रिंट होने के बाद वेयरहाउस से ट्रांसपोर्ट करने की जिम्मेदारी दी गई थी, उनकी मिलीभगत से पेपर लीक का ये सारा खेल चला था। कई बार परीक्षा सेंटर से भी पेपर लीक किये जाने की बात सामने आयी है   

पेपर लीक के खिलाफ मुहिम चलाने वाले करियर एक्सपर्ट पवन कुमार बताते हैं कि उनके पास कई ऐसे गैंग के नंबर हैं जो पेपर लीक कराते हैं। हम लोग ऐसे लोगों को ट्रैक करते रहते हैं। एसटीएफ को हमने नंबर भी दिया लेकिन कोई एक्शन नहीं हुआ. कोई भी परीक्षा होनी होती है तो उसके महीनों पहले से पेपर लीक करने की तैयारी शुरू हो जाती है। कुछ ऐसी ही बात मध्य प्रदेश में हुए नर्सिंग परीक्षा पेपर लीक मामले में हाई कोर्ट में केस दायर करने वाले दिलीप शर्मा भी कहते हैं कि प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक मामलों के लिए काफी हद तक सरकारें भी जिम्मेदार हैं। सवाल ये है कि आरोपियों के पकड़े जाने के बाद भी वो आसानी से कैसे छूट जाते हैं जबकी कानून में तो सजा का कड़ा प्रावधान है। 

सुपर 30 के संस्थापक आनंद कुमार कहते हैं पेपर लीक होना पूरे सिस्टम की नाकामी है। कुछ ग़लत लोग पूरे सिस्टम से खिलवाड़ करते हैं। और इसका प्रभाव छात्रों पर पड़ता है। उनकी पूरी मेहनत पर पानी फिर जाता है। वे अपने को असहाय समझने लगते हैं और अंत में गलत कदम उठाते हैं। पिछले दिनों हताश निराश कन्नौज के एक युवा बृजेश पाल ने पेपर लीक की वजह से अपनी जान दे दी थी। अपने सुसाइड नोट में उसने लिखा था – मैं अब और जीना नहीं चाहता, मेरा मन भर गया है…मेरी मौत के बाद किसी को परेशान न किया जाए… मैंने अपनी बीएससी की सारी डिग्री जला दी हैं, ऐसी पढ़ाई का क्या फायदा जो एक नौकरी ना दिला सके… 

ये सिर्फ बृजेश पाल की कहानी नहीं,  कई मजबूर नौजवानों की कहानी है जिनकी सालों की मेहनत पर एक झटके में पानी फिर जाता है। सुनहरे भविष्य का उनका सपना बिखर जाता है, उनका भविष्य अंधेरे में उतर जाता है। और इसकी वजह है पेपर लीक, जो एक बड़ा खेल बन चुका है। सपनों से खेलने वाला, ज़िन्दगी से खेलने वाला।

एडइनबॉक्स टीम

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