
उच्च शिक्षा के लिए कभी सबसे पसंदीदा देशों में शामिल रहा United Kingdom अब भारतीय छात्रों के बीच अपनी पकड़ खोता नजर आ रहा है। हालिया सर्वे और आंकड़ों से संकेत मिलता है कि ब्रिटेन की यूनिवर्सिटीज में विदेशी छात्रों, खासकर भारतीय छात्रों के एडमिशन में गिरावट आई है। यह बदलाव ऐसे समय में सामने आया है, जब देश ने छात्र वीजा से जुड़े नियमों को और सख्त करना शुरू किया है।
सर्वे में सामने आई बड़ी गिरावट
British Universities International Liaison Association (BUILA) द्वारा किए गए एक सर्वे के मुताबिक, जनवरी 2026 में करीब 70 प्रतिशत ब्रिटिश यूनिवर्सिटीज में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के एडमिशन में कमी दर्ज की गई। पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में कुल एडमिशन में लगभग 31 प्रतिशत की गिरावट सामने आई है। यह आंकड़े संकेत देते हैं कि ब्रिटेन का हायर एजुकेशन सेक्टर धीरे-धीरे अपनी वैश्विक आकर्षण क्षमता खो रहा है।
दक्षिण एशिया से सबसे ज्यादा असर
गिरावट का सबसे ज्यादा असर दक्षिण एशियाई देशों के छात्रों पर देखा गया है। सर्वे के अनुसार, 76 प्रतिशत यूनिवर्सिटीज ने माना कि भारतीय छात्रों के एडमिशन में कमी आई है। वहीं, 82 प्रतिशत संस्थानों ने पाकिस्तान से आने वाले छात्रों की संख्या में गिरावट की बात कही, जहां औसतन 75 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई। बांग्लादेश के छात्रों के मामले में भी 65 प्रतिशत यूनिवर्सिटीज ने एडमिशन घटने की पुष्टि की है।
यह रुझान इस बात का संकेत है कि अब केवल भारतीय ही नहीं, बल्कि अन्य देशों के छात्र भी ब्रिटेन को लेकर पहले जैसा आकर्षण महसूस नहीं कर रहे हैं।
क्यों घट रहा है छात्रों का भरोसा?
विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे सबसे बड़ी वजह सख्त होते वीजा नियम हैं। हाल के वर्षों में ब्रिटिश सरकार ने छात्र वीजा को लेकर कई नए प्रावधान लागू किए हैं, जिससे आवेदन प्रक्रिया ज्यादा कठिन हो गई है। इसके अलावा यूनिवर्सिटीज ने भी अपनी एडमिशन रणनीतियों में बदलाव किया है।
करीब एक-तिहाई यूनिवर्सिटीज ने कुछ खास देशों के छात्रों को एडमिशन देना सीमित या बंद कर दिया है। वहीं 58 प्रतिशत संस्थानों ने छात्रों की विश्वसनीयता जांच को और सख्त कर दिया है। इंटरव्यू प्रक्रिया भी पहले के मुकाबले ज्यादा कठोर हो गई है। वीजा रिजेक्शन से बचने के लिए कई यूनिवर्सिटीज ने वित्तीय शर्तें भी कड़ी कर दी हैं, जिसके तहत अब छात्रों को अधिक फंड या सेविंग दिखानी पड़ रही है।
प्रतिष्ठा पर पड़ सकता है असर
BUILA के अध्यक्ष एंड्रयू बर्ड ने चेतावनी दी है कि इन बदलावों का असर सिर्फ एडमिशन संख्या तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे ब्रिटेन की वैश्विक छवि भी प्रभावित हो सकती है। उनका कहना है कि ब्रिटेन पहले ही सख्त छात्र वीजा नियमों वाले देशों में गिना जाता है और लगातार बदलते नियम छात्रों को हतोत्साहित कर सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह ट्रेंड जारी रहता है, तो ब्रिटेन को अपने हायर एजुकेशन सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए नीतियों पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है। वहीं भारतीय छात्रों के लिए अब अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे विकल्प पहले से ज्यादा आकर्षक बनते जा रहे हैं।
छात्रों के लिए क्या है संकेत?
इस बदलते माहौल में विदेश में पढ़ाई की योजना बना रहे छात्रों को अब पहले से ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। वीजा नियम, खर्च और यूनिवर्सिटी की नीतियों को समझकर ही निर्णय लेना जरूरी हो गया है। सही जानकारी और तैयारी के साथ ही बेहतर विकल्प चुना जा सकता है।




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