
भारतीय छात्रों के लिए विदेश में उच्च शिक्षा के विकल्प लगातार बढ़ रहे हैं, और इसी बीच Germany एक पसंदीदा डेस्टिनेशन के रूप में तेजी से उभर रहा है। स्थिर नीतियां, कम ट्यूशन फीस और विभिन्न विषयों में उपलब्ध कोर्सेज इसकी लोकप्रियता को बढ़ा रहे हैं।
German Academic Exchange Service के अनुसार, जर्मनी के विश्वविद्यालयों में 59,419 भारतीय छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। हाल के वर्षों में यह संख्या हर साल करीब 25 से 30 प्रतिशत की दर से बढ़ी है, जो इस ट्रेंड को मजबूत करती है।
विदेश में पढ़ाई का बढ़ता रुझान
यह बढ़ोतरी केवल जर्मनी तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेश में पढ़ाई के बड़े रुझान का हिस्सा है। Ministry of External Affairs के आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में 13 लाख से ज्यादा भारतीय छात्र विदेशों में पढ़ाई कर रहे थे। यूरोप में जर्मनी सबसे तेजी से उभरते डेस्टिनेशन में शामिल है।
वहीं UNESCO Institute for Statistics भी लगातार भारत को अंतरराष्ट्रीय छात्रों के सबसे बड़े स्रोत देशों में गिनता रहा है।
जर्मनी क्यों बन रहा है पहली पसंद?
जर्मनी की खासियत इसकी मजबूत अकादमिक व्यवस्था है, जहां लगभग 20,000 कोर्स उपलब्ध हैं। इनमें से कई कोर्स पब्लिक यूनिवर्सिटीज में मुफ्त या बहुत कम फीस पर कराए जाते हैं। इसके अलावा पढ़ाई के बाद काम करने के मौके और पूरे यूरोप के जॉब मार्केट तक पहुंच भी छात्रों को आकर्षित करती है।
सरल वीजा प्रक्रिया और अंग्रेजी में पढ़ाए जाने वाले कोर्सेज की बढ़ती संख्या ने भी भारतीय छात्रों के लिए यहां पढ़ाई को आसान बनाया है।
महाराष्ट्र से बढ़ रही छात्रों की संख्या
भारत के अंदर Maharashtra इस ट्रेंड में अहम भूमिका निभा रहा है। शिक्षा से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक मुंबई और पुणे जैसे शहरों से बड़ी संख्या में छात्र जर्मनी का रुख कर रहे हैं।
Mumbai और Pune के छात्र इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट और आर्ट्स जैसे कोर्सेज में दाखिला ले रहे हैं। जर्मन भाषा सीखने की बेहतर सुविधाएं और स्टडी ऑप्शन की बढ़ती जानकारी इस बदलाव को गति दे रही है।
कुछ एजुकेशन कंसल्टेंसी के अनुसार, हर साल 700 से 800 छात्रों को जर्मनी भेजने में मदद की जाती है, हालांकि यह आंकड़े संस्थान के अनुसार बदल सकते हैं।
आर्थिक रिश्ते भी बढ़ा रहे आकर्षण
भारत और जर्मनी के बीच मजबूत आर्थिक संबंध भी छात्रों की रुचि को प्रभावित कर रहे हैं। Department for Promotion of Industry and Internal Trade के मुताबिक, 2019 से 2024 के बीच जर्मनी से भारत में आए कुल विदेशी निवेश का लगभग 49 प्रतिशत हिस्सा महाराष्ट्र में गया है। इससे इंडस्ट्री और करियर के नए अवसर बन रहे हैं।
संस्थागत सहयोग से मिल रही मजबूती
दोनों देशों के बीच शैक्षणिक और औद्योगिक सहयोग भी लगातार बढ़ रहा है। Indo-German Chamber of Commerce, जो जर्मनी के बाहर सबसे बड़ा चैंबर ऑफ कॉमर्स है, इस सहयोग को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है। इससे छात्रों और प्रोफेशनल्स के बीच आवाजाही भी बढ़ी है।
वैश्विक स्तर पर छात्रों को आकर्षित करने की प्रतिस्पर्धा के बीच जर्मनी अपनी कम लागत, विविध कोर्सेज और बेहतर करियर अवसरों के चलते भारतीय छात्रों की पहली पसंद बनता जा रहा है। इस बदलाव में महाराष्ट्र की भूमिका भी तेजी से मजबूत हो रही है, जो आने वाले समय में और बढ़ सकती है।




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