
बिहार में विशेष उच्च शिक्षा और आपराधिक न्याय व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राज्य की राजधानी पटना में National Forensic Sciences University (NFSU) का पहला कैंपस स्थापित किया जाएगा। इस नए कैंपस में शैक्षणिक सत्र जुलाई 2026 से एक अस्थायी ट्रांजिट परिसर में शुरू होने की उम्मीद है, जबकि पूर्ण बुनियादी ढांचे का विकास चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।
बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने इस पहल की घोषणा करते हुए इसे “बिहार की शैक्षणिक गौरवगाथा का एक नया अध्याय” बताया। उन्होंने कहा कि आधुनिक जांच और न्यायिक प्रक्रियाओं में फॉरेंसिक विज्ञान की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है, ऐसे में इस संस्थान का राज्य में आना बेहद महत्वपूर्ण है।
फॉरेंसिक शिक्षा और रिसर्च को मिलेगा बढ़ावा
आगामी NFSU कैंपस में फॉरेंसिक साइंस और उससे जुड़े क्षेत्रों में विशेषज्ञता वाले पाठ्यक्रम, उन्नत प्रशिक्षण और शोध के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। आज के समय में अपराधों की प्रकृति तेजी से जटिल होती जा रही है, खासकर साइबर क्राइम और डिजिटल फॉरेंसिक जैसे क्षेत्रों में। ऐसे में प्रशिक्षित विशेषज्ञों की मांग पूरे देश में तेजी से बढ़ी है।
NFSU को भारत का प्रमुख फॉरेंसिक संस्थान माना जाता है। वर्तमान में इसके देशभर में 16 कैंपस और एक अंतरराष्ट्रीय कैंपस संचालित हैं। यह दुनिया का पहला ऐसा विश्वविद्यालय भी माना जाता है जो पूरी तरह फॉरेंसिक साइंस और संबंधित विषयों को समर्पित है, जबकि पारंपरिक विश्वविद्यालयों में यह विषय आमतौर पर बड़े कोर्स का हिस्सा होते हैं।
भारत में फॉरेंसिक मामलों का बढ़ता बैकलॉग
पटना में इस कैंपस की शुरुआत ऐसे समय में हो रही है जब देश फॉरेंसिक जांच के मामलों में भारी लंबित मामलों की समस्या से जूझ रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वर्ष 2024–25 तक लगभग 60,000 से 80,000 फॉरेंसिक रिपोर्ट लंबित हैं, जिससे आपराधिक जांच और न्यायिक प्रक्रिया में देरी हो रही है।
इस स्थिति के पीछे एक बड़ी वजह प्रशिक्षित विशेषज्ञों की कमी है। देशभर की फॉरेंसिक साइंस लैबोरेट्री (FSL) में लगभग 40 से 49 प्रतिशत वैज्ञानिक पद खाली हैं, जिससे कार्यक्षमता पर गंभीर असर पड़ रहा है।
इसके अलावा, कई क्षेत्रों—जैसे केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़, लक्षद्वीप और लद्दाख, तथा मध्य प्रदेश और सिक्किम जैसे राज्यों—में अभी भी पर्याप्त साइबर फॉरेंसिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, हालांकि पंजाब और नागालैंड जैसे राज्यों में इस दिशा में प्रयास जारी हैं।
क्यों अहम है यह नया कैंपस
बिहार में NFSU कैंपस की स्थापना कई स्तरों पर महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। इससे पूर्वी भारत में फॉरेंसिक शिक्षा तक पहुंच बढ़ेगी और कानून प्रवर्तन एजेंसियों व न्यायपालिका के लिए प्रशिक्षित विशेषज्ञों की नई पीढ़ी तैयार होगी। साथ ही, उभरती फॉरेंसिक तकनीकों में शोध और नवाचार को भी मजबूती मिलेगी, जिससे आपराधिक जांच अधिक तेज और सटीक हो सकेगी।
NFSU से पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए फॉरेंसिक लैब, जांच एजेंसियों, कानूनी सलाहकार सेवाओं और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में बेहतर करियर के अवसर खुलते हैं।
आधुनिक न्याय व्यवस्था की ओर एक कदम
भारत में जैसे-जैसे आपराधिक न्याय प्रणाली का आधुनिकीकरण हो रहा है, फॉरेंसिक साइंस की भूमिका और भी अहम होती जा रही है। डीएनए विश्लेषण से लेकर साइबर अपराध की जांच तक, वैज्ञानिक साक्ष्य अब समयबद्ध और सटीक न्याय सुनिश्चित करने का आधार बन चुके हैं।
जुलाई से पटना कैंपस में कक्षाएं शुरू होने के साथ ही बिहार देश में फॉरेंसिक विशेषज्ञों की नई पीढ़ी तैयार करने में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर सकता है। यह पहल न केवल शिक्षा के क्षेत्र में, बल्कि राष्ट्रीय जांच तंत्र को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभाएगी।




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