
लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में 24 अप्रैल 2026 को आयोजित होने जा रहा एडइनबॉक्स रीजनल हायर एजुकेशन समिट 2026 (EdInBox Regional Higher Education Summit 2026) इस बार खास तौर पर फॉरेंसिक साइंस जैसे उभरते और जिज्ञासा से भरे क्षेत्र पर केंद्रित रहेगा। सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक चलने वाले इस आयोजन में शिक्षा जगत के विशेषज्ञों के साथ-साथ फॉरेंसिक क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश फॉरेंसिक साइंस लैबोरेट्री (विधि विज्ञान प्रयोगशाला) के निदेशक प्रो. (डॉ.) आदर्श कुमार और उप निदेशक ए.के. श्रीवास्तव बतौर ‘गेस्ट ऑफ ऑनर’ मौजूद रहेंगे।
प्रो. (डॉ.) आदर्श कुमार फॉरेंसिक मेडिसिन के जाने-माने विशेषज्ञ हैं और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली से जुड़े रहे हैं। करीब 30 वर्षों के अनुभव के साथ उन्होंने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के लिए मेडिको-लीगल विशेषज्ञ के रूप में कार्य किया है। खास बात यह है कि उन्हें कॉमनवेल्थ फेलोशिप दो बार मिलने वाला विश्व का एकमात्र वैज्ञानिक माना जाता है। उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की फॉरेंसिक प्रणाली में आधुनिकीकरण, शोध को बढ़ावा और गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रियाओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की उम्मीद है।
फॉरेंसिक विज्ञान आज के समय में युवाओं के लिए तेजी से आकर्षण का केंद्र बन रहा है। अपराध स्थल पर मिले छोटे-छोटे साक्ष्य—जैसे बाल, रक्त के निशान, सिगरेट बट पर मौजूद लार या टायर के निशान—कैसे बड़े मामलों को सुलझाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं, यह इस क्षेत्र की खासियत है। डीएनए प्रोफाइलिंग, टॉक्सिकोलॉजी, डिजिटल फॉरेंसिक और फिंगरप्रिंट विश्लेषण जैसी तकनीकों के जरिए वर्षों पुराने मामलों को भी सुलझाया जा सकता है।
समिट में इन पहलुओं को सरल और व्यावहारिक तरीके से समझाने पर जोर रहेगा, ताकि छात्र और प्रतिभागी यह जान सकें कि वास्तविक दुनिया में फॉरेंसिक वैज्ञानिक कैसे काम करते हैं और साक्ष्यों को कैसे इकट्ठा, सुरक्षित और विश्लेषित किया जाता है। साथ ही, अदालत में वैज्ञानिक तथ्यों को स्पष्ट और सटीक तरीके से प्रस्तुत करने की चुनौतियों पर भी चर्चा होगी।
इस समिट में बतौर मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक और उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय को आमंत्रित किया गया है।
आयोजन के दौरान रीजनल प्रिंसिपल्स मीट, एकेडमिक लीडरशिप डायलॉग और स्कूल–यूनिवर्सिटी कनेक्ट जैसे सत्र भी होंगे, लेकिन फॉरेंसिक साइंस पर केंद्रित चर्चा इस समिट का प्रमुख आकर्षण बनने की उम्मीद है।
आयोजकों का मानना है कि इस तरह के मंच न केवल छात्रों को नए करियर विकल्पों से परिचित कराते हैं, बल्कि उन्हें वैज्ञानिक सोच और व्यावहारिक समझ विकसित करने में भी मदद करते हैं।




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