
भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर सहमति बनने के साथ ही दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक बड़ी प्रगति दर्ज हुई है। महज नौ महीनों में तैयार हुए इस समझौते का लक्ष्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देना, किसानों की आय बढ़ाना और छोटे उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा करना है। सरकार का कहना है कि यह साझेदारी देश के कृषि और विनिर्माण क्षेत्र के लिए नए द्वार खोलेगी।
सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि भारत ने समझौते में अपने संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की है। डेयरी सेक्टर को पूरी तरह बाहर रखा गया है, जिससे विदेशी आयात का सीधा असर घरेलू डेयरी किसानों पर नहीं पड़ेगा। इसी तरह प्याज, मटर, चना, मक्का, बादाम, चीनी और खाद्य तेल जैसी फसलों को भी इस दायरे से बाहर रखा गया है। इससे भारतीय किसानों को विदेशी प्रतिस्पर्धा की आशंका से राहत मिलेगी।
समझौता कृषि निर्यात में भी नई रफ्तार लाने की क्षमता रखता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस करार के बाद न्यूजीलैंड को भारत से मसाले, प्रोसेस्ड फूड और कृषि-आधारित अन्य उत्पादों का निर्यात बढ़ने की संभावना है। इससे किसानों और खाद्य उत्पादक उद्योगों को एक नया स्थिर बाजार मिलेगा।
बागवानी क्षेत्र के लिए यह करार और भी अहम है। न्यूजीलैंड ने भारत में सेब, कीवी और शहद उत्पादन बढ़ाने के लिए विशेष एक्शन प्लान का समर्थन किया है। इस योजना के तहत भारतीय बागवानों को बेहतर किस्म के पौधे, फसल कटाई के बाद उसके सुरक्षित रखरखाव की आधुनिक तकनीक और फूड सेफ्टी से जुड़ी नई सीख हासिल होगी। सेब की उन्नत बागवानी और टिकाऊ शहद उत्पादन के लिए विशेष प्रोजेक्ट और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे, जिससे भारत का बागवानी क्षेत्र तकनीकी रूप से और मजबूत होगा।
उद्योग जगत के लिए भी यह समझौता बड़े अवसर लेकर आया है। न्यूजीलैंड ने भारत से आने वाले सभी 8,284 निर्यात उत्पादों पर शुल्क हटाने का फैसला किया है। इससे भारतीय निर्माताओं और छोटे उद्योगों—जैसे हस्तशिल्प, वस्त्र, कालीन, सूत, जूते-चप्पल और चमड़े—को न्यूजीलैंड के बाजार में बेहतर प्रतिस्पर्धा का मौका मिलेगा।
निवेश के मोर्चे पर न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है। इसमें कृषि, अक्षय ऊर्जा और ग्रामीण बुनियादी ढांचे को प्राथमिकता दी जाएगी। इस निवेश से ग्रामीण इलाकों की अर्थव्यवस्था को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है।
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इस समझौते को “अवसरों का नया दरवाजा” बताया। फिलहाल भारत और न्यूजीलैंड के बीच लगभग 1.3 अरब डॉलर का व्यापार होता है। सरकार का लक्ष्य इस FTA के लागू होने के बाद अगले पांच वर्षों में इस व्यापार को बढ़ाकर 5 अरब डॉलर तक ले जाना है।
भारत–न्यूजीलैंड समझौता न केवल व्यापार बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि यह किसानों, छोटे उद्योगों और बागवानी क्षेत्र के लिए तकनीकी सहयोग और सुरक्षित बाजार उपलब्ध कराने वाला महत्वपूर्ण समझौता भी साबित हो सकता है।




Add comment