
कर्नाटक सरकार ने लंबी इंतजार के बाद राज्य में अनुसूचित जातियों (एससी) के लिए उपलब्ध 15 प्रतिशत आरक्षण के भीतर आंतरिक आरक्षण लागू करने का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व में तैयार किए गए संशोधित फार्मूले के तहत आरक्षण को 5.25%, 5.25% और 4.50% की तीन श्रेणियों में बांटा गया है। आदेश जारी होते ही सभी नियुक्ति अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वित्त विभाग द्वारा स्वीकृत 56,432 रिक्त पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए, जो काफी समय से लंबित थी।
सरकार के इस फैसले के अनुसार कर्नाटक की 101 अनुसूचित जातियों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है। श्रेणी-A में मादिगा और संबद्ध जातियां (जिसे दलित लेफ्ट कहा जाता है) शामिल हैं, जिन्हें 5.25% आरक्षण मिलेगा। श्रेणी-B में होलेया और संबद्ध जातियां (दलित राइट) हैं, जिन्हें भी 5.25% का हिस्सा मिलेगा। श्रेणी-C के लिए 4.50% आरक्षण तय किया गया है, जिसमें भोवी, लम्बानी, कोरमा, कोरचा और 59 खानाबदोश समुदाय शामिल हैं। इसके साथ ही श्रेणी-C की सीटों में से 20% पद उन 59 सबसे पिछड़ी जातियों के लिए विशेष रूप से आरक्षित किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर आदेश की जानकारी साझा करते हुए बताया कि भर्ती प्रक्रिया को जारी रखने का निर्देश दिया गया है, लेकिन यह उच्च न्यायालय के अंतिम आदेश के अधीन रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल अदालत के निर्देशानुसार 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा को अस्थायी रूप से अपनाया गया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, सरकार ने आंतरिक आरक्षण के मुद्दे पर अपने वादे के अनुरूप निर्णय लिया है और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
इस फैसले के पीछे कानूनी पृष्ठभूमि भी अहम है। पिछली भाजपा सरकार ने एससी आरक्षण को 15% से बढ़ाकर 17%, और एसटी आरक्षण को 3% से बढ़ाकर 7% कर दिया था। इससे राज्य का कुल आरक्षण 56% हो गया था, जिसे उच्च न्यायालय ने इंदिरा साहनी (1992) के फैसले का हवाला देते हुए 50 प्रतिशत की सीमा से ऊपर नहीं जाने की सलाह दी थी। मामला अदालत में लंबित होने के चलते कांग्रेस सरकार ने फिलहाल 17 प्रतिशत की बजाय 15 प्रतिशत के दायरे में ही आंतरिक आरक्षण लागू करने का रास्ता चुना है।
सरकार का कहना है कि यह निर्णय न केवल आरक्षण व्यवस्था को संतुलित करेगा, बल्कि विभिन्न उपजातियों के बीच लंबे समय से चली आ रही असमानता को भी दूर करेगा। मुख्यमंत्री ने नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के साथ सरकारी आदेश की प्रति साझा करते हुए भरोसा जताया कि जल्द ही भर्ती प्रक्रिया तेज़ी से आगे बढ़ेगी और पात्र अभ्यर्थियों को इसका लाभ मिलेगा।




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