
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) ने नए शैक्षणिक सत्र को देखते हुए एनसीईआरटी की किताबों की उपलब्धता, छपाई और वितरण व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की है। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किताबें समय पर हर छात्र तक पहुंचें, खासकर ग्रामीण इलाकों में किसी तरह की देरी न हो।
इस उच्चस्तरीय बैठक में शिक्षा मंत्रालय, NCERT और स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। विभाग के सचिव संजय कुमार भी बैठक में मौजूद रहे। बैठक का फोकस यह सुनिश्चित करना था कि देशभर में किताबों की सप्लाई चेन मजबूत रहे और राज्यों के साथ बेहतर तालमेल बनाकर वितरण में किसी तरह की बाधा न आए।
समीक्षा के दौरान मंत्री ने नई एनसीईआरटी किताबों की तैयारी की स्थिति का जायजा लिया और विभिन्न राज्यों में उपलब्ध स्टॉक की जानकारी ली। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि वितरण एजेंसियों और राज्य सरकारों के बीच समन्वय बेहतर हो, ताकि दूर-दराज के क्षेत्रों, विशेषकर गांवों में, किताबें समय पर पहुंच सकें।
धर्मेंद्र प्रधान ने साफ कहा कि किसी भी छात्र की पढ़ाई किताबों की कमी या देरी के कारण प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इसके लिए उन्होंने जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त छपाई कराने और पूरी सप्लाई प्रक्रिया की निगरानी को और सख्त करने के निर्देश दिए।
सरकार ने डिजिटल विकल्प को भी समानांतर रूप से मजबूत किया है। ePathshala ऐप के जरिए छात्र ऑनलाइन किताबें एक्सेस कर सकते हैं, ताकि जब तक सभी के पास फिजिकल किताबें न पहुंचें, तब तक उनकी पढ़ाई बिना रुकावट जारी रह सके।
सरकार की यह पहल ऐसे समय में आई है जब नए सत्र की शुरुआत के साथ किताबों की मांग तेजी से बढ़ जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वितरण व्यवस्था को जमीनी स्तर तक मजबूत किया जाता है, तो इससे छात्रों की पढ़ाई पर सकारात्मक असर पड़ेगा, खासकर उन इलाकों में जहां संसाधनों की कमी अब भी चुनौती बनी हुई है।




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