
कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की किताब में बदलाव को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। National Council of Educational Research and Training (NCERT) ने पाठ्यपुस्तक से “मराठा साम्राज्य का नक्शा” हटाने का फैसला लिया है, जिसके बाद अलग-अलग पक्षों से विरोध सामने आ रहा है।
NCERT ने क्यों हटाया नक्शा
NCERT के मुताबिक यह फैसला एक उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों पर आधारित है। समिति ने दो बैठकों में इस नक्शे की समीक्षा की और पाया कि इसमें “व्यापक सामान्यीकरण” (overgeneralisation) की समस्या है, जिससे ऐतिहासिक तथ्यों की गलत व्याख्या हो सकती है।
यह मुद्दा 24 अप्रैल को प्रधानमंत्री कार्यालय के शिकायत पोर्टल पर सांगली के एक वकील द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के बाद सामने आया, जिसके जवाब में NCERT ने अपना पक्ष स्पष्ट किया।
विवाद की वजह क्या है
दरअसल, हटाए गए नक्शे में बीकानेर, बूंदी और जैसलमेर जैसे क्षेत्रों को Maratha Empire का हिस्सा दिखाया गया था। इस पर राजस्थान के कुछ राजपरिवारों और जनप्रतिनिधियों ने आपत्ति जताई।
उनका कहना था कि जैसलमेर रियासत का मराठों से न तो कोई युद्ध हुआ और न ही वहां मराठाओं का सीधा शासन रहा। ऐसे में इन क्षेत्रों को मराठा साम्राज्य का हिस्सा दिखाना ऐतिहासिक रूप से सही नहीं है।
फैसले के खिलाफ विरोध तेज
नक्शा हटाए जाने के बाद अब मराठा समाज और Chhatrapati Shivaji Maharaj के वंशजों ने इस पर नाराजगी जताई है। उनका आरोप है कि यह कदम मराठा इतिहास को कम करके दिखाने या मिटाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
शिकायत करने वाले पक्ष ने भी इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा है कि पर्याप्त जांच के बिना निर्णय लिया गया। उन्होंने संकेत दिया है कि इस मामले में उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की जा सकती है।
शिक्षा और इतिहास के बीच संतुलन की चुनौती
यह मामला एक बार फिर इस सवाल को सामने लाता है कि स्कूली पाठ्यक्रम में इतिहास को किस तरह प्रस्तुत किया जाए। एक ओर शुद्धता और तथ्यात्मक सटीकता की जरूरत है, तो दूसरी ओर अलग-अलग ऐतिहासिक दृष्टिकोणों को संतुलित तरीके से शामिल करने की चुनौती भी है।
फिलहाल NCERT अपने फैसले पर कायम है, लेकिन बढ़ते विरोध के बीच यह मुद्दा आने वाले समय में और चर्चा का विषय बना रह सकता है।




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