
जामिया मिल्लिया इस्लामिया (Jamia Millia Islamia) में एक कार्यक्रम के दौरान कुलपति के बयान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (Students Federation of India – SFI) की जामिया यूनिट ने कुलपति मजहर आसिफ (Mazhar Asif) के बयान की कड़ी आलोचना की है और इसे अवैज्ञानिक बताया है।
क्या है पूरा मामला
मामला उस वक्त सामने आया जब एक कार्यक्रम के दौरान कुलपति ने अपने संबोधन में कहा कि भारत में रहने वाले लोगों की भाषा, संस्कृति और धर्म अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन सभी भारतीय एक हैं क्योंकि “महादेव का DNA हम सबके DNA में है।” यह कार्यक्रम कथित तौर पर राष्टीय स्वयंसेवक संघ यानी Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) से जुड़े ‘युवा कुंभ’ के तहत आयोजित किया गया था।
इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इस बयान पर तालियों से प्रतिक्रिया दी।
SFI ने बताया ‘अवैज्ञानिक’
SFI ने इस बयान को “अवैज्ञानिक और प्रतिगामी सोच” करार दिया है। संगठन का कहना है कि एक प्रमुख शैक्षणिक संस्थान के प्रमुख द्वारा इस तरह का बयान वैज्ञानिक दृष्टिकोण और शिक्षा के मूल्यों के खिलाफ है।
छात्र संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि जिस समय छात्र इस कार्यक्रम का विरोध कर रहे थे, उसी दौरान प्रशासन ने सख्ती बरती।
छात्रों पर कार्रवाई के आरोप
SFI के अनुसार, शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ प्रॉक्टोरियल टीम ने कार्रवाई की। संगठन का दावा है कि कुछ छात्रों को घसीटा गया, उनके साथ मारपीट की गई और दुर्व्यवहार हुआ।
संगठन ने यह भी कहा कि विरोध के चलते कार्यक्रम करीब दो घंटे देरी से शुरू हुआ, लेकिन इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन कार्यक्रम में शामिल रहा।
लोकतांत्रिक माहौल पर सवाल
SFI ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में छात्रों की लोकतांत्रिक गतिविधियों पर रोक लगाई जा रही है, जबकि दूसरी ओर कुछ संगठनों के कार्यक्रमों को अनुमति दी जा रही है। संगठन के मुताबिक इससे परिसर के लोकतांत्रिक माहौल पर असर पड़ रहा है।
जवाबदेही की मांग
SFI ने कुलपति और विश्वविद्यालय प्रशासन से इस मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की है। संगठन ने कहा है कि वह “गैर-वैज्ञानिक बयानबाजी” और छात्रों के खिलाफ कथित कार्रवाई के विरोध में अपनी आवाज उठाता रहेगा।
फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस पूरे मामले पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे विवाद और गहराने की संभावना बनी हुई है।




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