
कर्नाटक के हुबली में आयोजित ‘इनकॉमेक्स-2026’ उद्योग एवं व्यापार प्रदर्शनी में कृषि के भविष्य पर एक महत्वपूर्ण चर्चा सामने आई। कर्नाटक कृषि मूल्य आयोग के अध्यक्ष अशोक दलवाई ने अपने विशेष संबोधन में साफ कहा कि आज भारतीय कृषि के सामने फसल ज्यामिति और भूमि उपयोग नीति जैसी बुनियादी चुनौतियाँ खड़ी हैं। उनका मानना है कि 21वीं सदी में देश को दूसरी हरित क्रांति की तैयारी करनी चाहिए, जो पोषण, संसाधन प्रबंधन और किसानों की आय बढ़ाने पर केंद्रित हो।
दलवाई ने कहा कि अब वह दौर आ चुका है जब केवल कार्बोहाइड्रेट वाली फसलों पर टिके रहने से कृषि मजबूत नहीं हो सकती। उन्होंने बताया कि भारत को पोषक तत्वों से भरपूर फसलों—विशेषकर दालों और पौष्टिक अनाज—की ओर बढ़ना होगा, जिससे न सिर्फ उत्पादन बेहतर होगा बल्कि किसानों की आय भी बढ़ेगी। उन्होंने यह भी कहा कि नई किस्मों के विकास में अनुसंधान संस्थानों को देसी नस्लों की पौष्टिकता को ध्यान में रखना चाहिए। उनके अनुसार, “सही तकनीक मिलने पर किसान उच्च गुणवत्ता की उपज दे सकते हैं।”
‘उत्तर कर्नाटक में कृषि और खाद्य उत्पादन क्षमता बनाए रखने’ विषय पर बोलते हुए दलवाई ने उद्योग, नीतिनिर्माताओं और किसानों के बीच सोच में बदलाव की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि टिकाऊ, समग्र, जैविक और भविष्य उन्मुख कृषि मॉडल अपनाकर ही बढ़ती आबादी के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। भारत आज खाद्य सुरक्षा के मामले में मजबूत स्थिति में है, लेकिन इसे बनाए रखने के लिए फसलों में विविधता और संसाधनों का जिम्मेदार उपयोग जरूरी है।
दलवाई ने स्वीकार किया कि गेहूं और चावल का उत्पादन पर्याप्त है, लेकिन दालों और अन्य पोषक फसलों पर ध्यान न देने से ‘छिपी भूख’ यानी हिडन हंगर जैसी समस्या बढ़ सकती है। इस चुनौती से निपटने के लिए उत्पादन और खेती के तरीकों में बदलाव जरूरी है—खासकर जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने और पानी के बेहतर उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में।
उन्होंने आगे कहा कि दूसरी हरित क्रांति के साथ-साथ देश में ‘कृषि आय क्रांति’ की भी जरूरत है, क्योंकि बड़ी आबादी आज भी खेती पर निर्भर है और आर्थिक रूप से कमजोर है। दलवाई के अनुसार, जैव-आर्थिकी (बायो-इकोनॉमी) को मजबूती देना, एथेनॉल जैसे उप-उत्पादों को बढ़ावा देना और प्रसंस्करण उद्योग का विस्तार किसानों की कमाई बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। आज देश में केवल 20% कृषि उत्पादों का ही प्रोसेसिंग होती है, जिसे बढ़ाने पर लाखों किसानों को सीधा लाभ हो सकता है।
उन्होंने डेटा आधारित खेती, वैल्यू एडिशन और किसानों व उद्योग जगत के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया, ताकि कृषि को अधिक प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ बनाया जा सके।
‘इनकॉमेक्स-2026’ प्रदर्शनी में उद्योग की ताकत
यह प्रदर्शनी देशभर के औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों की क्षमताओं का बड़ा मंच साबित हुई। लगभग 300 स्टॉल्स में बड़ी औद्योगिक इकाइयों से लेकर एमएसएमई तक, सभी ने अपने उत्पाद और तकनीक प्रदर्शित किए। इसमें रेलवे कोच निर्माण, मेटल फैब्रिकेशन, इलेक्ट्रिकल और सोलर उपकरण, वाहनों, क्रेन, अर्थ मूवर्स, फूड प्रोडक्ट्स और इको-फ्रेंडली सामग्री जैसी विविध श्रेणियां शामिल हैं।
पाँच दिन चली इस प्रदर्शनी में व्यापारी ही नहीं, विभिन्न कॉलेजों के छात्रों ने भी बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। ‘इनकॉमेक्स-2026’ का समापन 29 अप्रैल को हुआ।




Add comment