
भारत के प्रीमियम चावल निर्यात तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority ने उत्तर प्रदेश सरकार के साथ मिलकर पीलीभीत में देश का पहला इंटीग्रेटेड बासमती और ऑर्गेनिक ट्रेनिंग-कम-डेमो फार्म स्थापित करने का फैसला किया है।
Ministry of Commerce and Industry द्वारा घोषित इस परियोजना को टांडा बिजैसी क्षेत्र में करीब सात एकड़ जमीन पर विकसित किया जा रहा है। यह जमीन राज्य के कृषि विभाग के साथ 70 साल की लीज पर ली गई है। यह पहल भारत में बासमती चावल उत्पादन, ऑर्गेनिक खेती प्रशिक्षण और कृषि निर्यात को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है।
देश का पहला इंटीग्रेटेड बासमती ऑर्गेनिक ट्रेनिंग हब
यह केंद्र शुरू होने के बाद बासमती खेती और ऑर्गेनिक कृषि प्रशिक्षण का राष्ट्रीय हब बनेगा, जहां पारंपरिक और आधुनिक खेती तकनीकों को एक ही प्लेटफॉर्म पर जोड़ा जाएगा। यह अपनी तरह की पहली सुविधा होगी, जिसका उद्देश्य किसानों के पारंपरिक ज्ञान और नई कृषि तकनीकों के बीच की दूरी को कम करना है।
इस केंद्र में अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिनमें ऑडिटोरियम, रिसर्च लैब, कॉन्फ्रेंस रूम और ऑर्गेनिक इनपुट्स के लिए विशेष स्टोरेज शामिल होंगे। इसकी एक खास बात एआई आधारित इंटरैक्टिव म्यूजियम होगा, जो किसानों, छात्रों और कृषि शोधकर्ताओं को अनुभव आधारित सीखने का मौका देगा।
किसानों, रिसर्च और स्किल डेवलपमेंट को मिलेगा फायदा
यह ट्रेनिंग-कम-डेमो फार्म उत्तर प्रदेश और पड़ोसी Uttarakhand के किसानों के लिए काफी लाभदायक साबित होगा। यहां किसानों को प्रैक्टिकल ट्रेनिंग, क्षमता विकास कार्यक्रम और वैज्ञानिक सलाह उपलब्ध कराई जाएगी। यह केंद्र कृषि विशेषज्ञों और छात्रों के लिए भी एक रिसोर्स सेंटर के रूप में काम करेगा, जिससे स्किल-बेस्ड और टेक्नोलॉजी आधारित खेती को बढ़ावा मिलेगा।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री Jitin Prasada ने पीलीभीत को एक उभरते बासमती उत्पादक क्षेत्र के रूप में रेखांकित करते हुए कहा कि यहां ऑर्गेनिक खेती का विस्तार और किसानों की भागीदारी बढ़ाना जरूरी है।
एआई आधारित बासमती सर्वे से बदलेगी फसल योजना
इसके साथ ही सरकार ने 2026 से 2028 तक चलने वाला एआई आधारित बासमती धान सर्वे शुरू करने की योजना भी पेश की है। इस सर्वे में करीब 40 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर किया जाएगा और 5 लाख से अधिक किसानों को जोड़ा जाएगा।
इस परियोजना में 1.5 लाख से ज्यादा ग्राउंड-ट्रुथ पॉइंट्स से डेटा लिया जाएगा, जिससे फसल का सटीक आकलन, किस्मों की पहचान और वैज्ञानिक सलाह देना संभव होगा। यह डेटा आधारित मॉडल कृषि उत्पादन, निर्यात योजना और सप्लाई चेन को अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगा।
भारत के एग्री-एक्सपोर्ट इकोसिस्टम को मिलेगा मजबूती
इस नई सुविधा को All India Coordinated Research Project के तहत भी शामिल किया गया है, जिससे यहां विभिन्न जलवायु परिस्थितियों के लिए नई बासमती किस्मों पर राष्ट्रीय स्तर के परीक्षण किए जा सकेंगे।
वैश्विक स्तर पर ऑर्गेनिक और प्रीमियम चावल की मांग बढ़ रही है। ऐसे में पीलीभीत की यह पहल भारत के कृषि निर्यात, किसानों की आय और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
भारत जैसे-जैसे कृषि में एआई, ऑर्गेनिक खेती और निर्यात आधारित विकास को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, पीलीभीत का यह बासमती ट्रेनिंग सेंटर भविष्य के एग्री-इनोवेशन हब का मॉडल बन सकता है।




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