
विदेश में पढ़ाई का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के लिए ऑस्ट्रेलिया हमेशा से एक आकर्षक विकल्प रहा है। बेहतर शिक्षा व्यवस्था, रिसर्च के मौके और ग्लोबल एक्सपोजर के कारण हर साल हजारों छात्र यहां का रुख करते हैं। लेकिन ऊंची फीस और महंगा रहन-सहन कई छात्रों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे में अगर किसी टॉप यूनिवर्सिटी में बिना फीस के पढ़ाई और रहने के लिए लाखों रुपये भी मिलें, तो यह किसी बड़े मौके से कम नहीं है।
ऐसा ही एक अवसर University of Melbourne भारतीय छात्रों को दे रही है। यूनिवर्सिटी की ओर से “Human Rights Scholarship” की पेशकश की गई है, जिसमें ट्यूशन फीस से लेकर रहने का खर्च तक शामिल है।
किन छात्रों के लिए है यह स्कॉलरशिप
यह स्कॉलरशिप उन छात्रों के लिए है, जो मास्टर्स बाय रिसर्च या पीएचडी प्रोग्राम में दाखिला लेना चाहते हैं। खास बात यह है कि आवेदन करने वाले छात्र का रिसर्च विषय मानवाधिकार से जुड़ा होना चाहिए। यदि किसी छात्र ने पहले से इसी स्तर की रिसर्च डिग्री पूरी कर ली है या उससे ऊंची योग्यता रखता है, तो वह इस स्कॉलरशिप के लिए पात्र नहीं होगा।
आवेदन के लिए जरूरी है कि छात्र के पास 2026 इनटेक के लिए यूनिवर्सिटी का ऑफर लेटर हो, जिसमें मास्टर्स बाय रिसर्च या डॉक्टोरल प्रोग्राम में प्रवेश की पुष्टि हो।
स्कॉलरशिप में क्या मिलेगा
इस स्कॉलरशिप के तहत छात्रों को पूरी ट्यूशन फीस से छूट दी जाती है। इसके अलावा रहने-खाने के लिए हर साल 44,500 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर, यानी करीब 30 लाख रुपये से ज्यादा की आर्थिक मदद मिलती है।
मास्टर्स करने वाले छात्रों को यह सहायता 2 साल तक मिलती है, जबकि पीएचडी छात्रों को 3.5 से 4 साल तक इसका लाभ दिया जाता है। इसके साथ ही ऑस्ट्रेलिया जाने के लिए लगभग 3,000 डॉलर का ट्रैवल ग्रांट भी मिलता है। स्वास्थ्य बीमा की सुविधा भी इस स्कॉलरशिप का हिस्सा है, जिससे छात्रों को मेडिकल खर्च की चिंता नहीं रहती।
आवेदन कैसे करें और क्या ध्यान रखें
इस स्कॉलरशिप के लिए आवेदन प्रक्रिया जारी है और अंतिम तारीख 31 अक्टूबर 2026 तय की गई है। इच्छुक छात्र यूनिवर्सिटी की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
आवेदन करते समय छात्रों को दो बातों पर खास ध्यान देना होगा। पहली, उन्होंने अब तक मानवाधिकार से जुड़े क्षेत्र में क्या काम किया है—जैसे किसी एनजीओ में काम या वॉलंटियरिंग। दूसरी, वे जो रिसर्च करने जा रहे हैं, उसका समाज और मानवाधिकारों पर क्या असर पड़ेगा।
क्यों खास है यह मौका
ऑस्ट्रेलिया जैसे देश में पढ़ाई करना आम तौर पर महंगा माना जाता है, जहां यूनिवर्सिटी फीस और रहने का खर्च मिलाकर हर साल लाखों रुपये खर्च हो सकते हैं। ऐसे में यह स्कॉलरशिप न केवल आर्थिक बोझ कम करती है, बल्कि छात्रों को एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाने का मौका भी देती है।
जो छात्र सामाजिक मुद्दों पर काम करना चाहते हैं और रिसर्च के जरिए बदलाव लाना चाहते हैं, उनके लिए यह एक मजबूत शुरुआत साबित हो सकती है।




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