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विदेश में मेडिकल पढ़ाई का बढ़ता रुझान: भारतीय छात्रों के लिए अगस्त 2026 इंटेक के आवेदन शुरू

विदेश में मेडिकल पढ़ाई का बढ़ता रुझान: भारतीय छात्रों के लिए अगस्त 2026 इंटेक के आवेदन शुरू

विदेश में मेडिकल पढ़ाई का बढ़ता रुझान: भारतीय छात्रों के लिए अगस्त 2026 इंटेक के आवेदन शुरू

भारतीय छात्रों के बीच विदेश में मेडिकल शिक्षा हासिल करने की रुचि लगातार बढ़ रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए कई अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय अब अपने एडमिशन शेड्यूल और कोर्स संरचना को इस तरह तैयार कर रहे हैं, जिससे छात्रों को पढ़ाई के बीच गैप न लेना पड़े और उन्हें सीधे ग्लोबल ट्रेनिंग के अवसर मिल सकें। छात्रों के लिए अकादमिक लचीलापन, क्लिनिकल अनुभव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने के अवसर अब सबसे अहम कारक बन गए हैं।

इसी कड़ी में St George’s University School of Medicine ने अगस्त 2026 इंटेक के लिए भारत से आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस इंटेक को भारतीय शैक्षणिक कैलेंडर के अनुरूप तैयार किया गया है, ताकि छात्र बिना किसी गैप ईयर के सीधे मेडिकल पढ़ाई शुरू कर सकें।

वेस्ट इंडीज के ग्रेनेडा में स्थित इस विश्वविद्यालय का वैश्विक स्तर पर मजबूत नेटवर्क है। इसके 25,000 से अधिक पूर्व छात्र दुनिया के 50 से ज्यादा देशों में प्रैक्टिस कर रहे हैं। वर्ष 2026 में यहां के छात्रों ने अमेरिका में 23 मेडिकल स्पेशलिटी में 800 से अधिक रेजिडेंसी पोजीशन हासिल कीं, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पोस्टग्रेजुएट क्लिनिकल ट्रेनिंग के स्थापित रास्तों को दर्शाता है।

विश्वविद्यालय ने अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम में 75 से अधिक संबद्ध अस्पतालों और हेल्थ सेंटर्स के साथ क्लिनिकल ट्रेनिंग नेटवर्क भी विकसित किया है। इसका उद्देश्य छात्रों को पढ़ाई के दौरान व्यावहारिक अनुभव और वास्तविक हेल्थकेयर सेटअप का एक्सपोजर देना है।

साल 2007 से Northumbria University के साथ अकादमिक साझेदारी के तहत पात्र छात्र अपने कोर्स का एक हिस्सा यूनाइटेड किंगडम में भी पूरा कर सकते हैं। अगस्त इंटेक के तहत दाखिला लेने वाले छात्र अपनी पसंद के अनुसार ग्रेनेडा या यूके में पढ़ाई शुरू कर सकते हैं। कोर्स पूरा होने पर उन्हें SGU से डॉक्टर ऑफ मेडिसिन (MD) और नॉर्थम्ब्रिया यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ मेडिकल साइंसेज (BMedSci) की डिग्री दी जाती है।

Kevin Romao, एशिया के रीजनल डायरेक्टर, SGU के अनुसार, अगस्त इंटेक खास तौर पर भारतीय छात्रों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, ताकि वे अपनी स्थानीय पढ़ाई के बाद आसानी से मेडिकल प्रोग्राम में प्रवेश ले सकें। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका में रेजिडेंसी प्रोग्राम्स में विश्वविद्यालय का रिकॉर्ड अंतरराष्ट्रीय करियर के अवसरों को दर्शाता है।

संस्थान ने यह भी जानकारी दी है कि अंतरराष्ट्रीय छात्रों, खासकर भारत से आवेदन करने वालों के लिए फाइनेंशियल सहायता और मेरिट आधारित स्कॉलरशिप उपलब्ध हैं, जिससे विदेश में मेडिकल शिक्षा हासिल करना और आसान हो सके।

कुल मिलाकर, बढ़ती मांग के बीच इस तरह के प्रोग्राम यह दिखाते हैं कि विश्वविद्यालय अब भारतीय छात्रों की जरूरतों, शैक्षणिक समय-सीमा और करियर उम्मीदों के अनुसार खुद को ढाल रहे हैं। साथ ही, वे छात्रों को वैश्विक हेल्थकेयर सिस्टम का अनुभव भी दे रहे हैं।

Asmita Sarkar

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