
Central Board of Secondary Education के 12वीं बोर्ड परीक्षा परिणाम हर साल लाखों छात्रों के भविष्य की दिशा तय करते हैं। लेकिन पिछले एक दशक के रिजल्ट आंकड़ों में एक ऐसा ट्रेंड लगातार दिखाई दिया है, जिसने शिक्षा विशेषज्ञों और अभिभावकों दोनों का ध्यान खींचा है। साल दर साल बदलते पास प्रतिशत और परीक्षा पैटर्न के बीच एक बात लगभग स्थिर रही है—लड़कियों का प्रदर्शन लड़कों से बेहतर रहा है।
CBSE 12वीं के 2026 परिणामों से पहले पिछले दस वर्षों के आंकड़े फिर चर्चा में हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, 2015 से 2025 तक हर साल लड़कियों ने पास प्रतिशत में लड़कों को पीछे छोड़ा है। हालांकि अच्छी बात यह है कि अब दोनों के बीच का अंतर पहले की तुलना में काफी कम हो गया है।
साल 2015 में लड़कियों का पास प्रतिशत 87.56 प्रतिशत था, जबकि लड़कों का रिजल्ट 77.77 प्रतिशत दर्ज किया गया था। उस समय दोनों के बीच लगभग 9.79 प्रतिशत का बड़ा अंतर था। शिक्षा क्षेत्र में इसे गंभीर जेंडर गैप माना जाता था।
इसके बाद के वर्षों में लड़कों के प्रदर्शन में लगातार सुधार देखने को मिला। पिछले दशक में लड़कों के पास प्रतिशत में 10 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो लड़कियों की तुलना में तेज सुधार माना गया। इसके बावजूद लड़कियां हर साल आगे बनी रहीं।
2025 तक आते-आते तस्वीर काफी बदली हुई दिखाई दी। लड़कियों का पास प्रतिशत बढ़कर 91.64 प्रतिशत तक पहुंच गया, जबकि लड़कों ने भी अपने प्रदर्शन में सुधार किया। अब दोनों के बीच का अंतर करीब 6 प्रतिशत के आसपास सिमट गया है। यानी दस साल में जेंडर गैप में लगभग 39 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
इस पूरे दौर में सबसे बड़ा बदलाव 2019 और 2020 के बीच देखने को मिला। महामारी के दौरान परीक्षा प्रणाली और मूल्यांकन प्रक्रिया में बदलाव हुए, जिससे ओवरऑल पास प्रतिशत में तेजी आई। इसी दौरान लड़कियों और लड़कों के रिजल्ट का अंतर 9.30 प्रतिशत से घटकर करीब 5.96 प्रतिशत तक पहुंच गया।
हालांकि 2023 के बाद जब बोर्ड परीक्षाएं फिर सामान्य पैटर्न पर लौटीं, तब यह अंतर दोबारा स्थिर हो गया और लगभग 6 प्रतिशत के आसपास बना रहा। इससे साफ है कि लड़कों ने प्रदर्शन में सुधार जरूर किया है, लेकिन लड़कियां अब भी लगातार बढ़त बनाए हुए हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रेंड केवल परीक्षा परिणामों का आंकड़ा नहीं, बल्कि समाज में बदलती तस्वीर को भी दर्शाता है। पिछले कुछ वर्षों में लड़कियों की शिक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ी है और परिवारों का समर्थन भी मजबूत हुआ है। इसका असर बोर्ड परीक्षाओं के नतीजों में साफ दिखाई देता है।
लगातार बेहतर प्रदर्शन यह भी दिखाता है कि पढ़ाई के प्रति गंभीरता, नियमित तैयारी और अनुशासन के मामले में छात्राएं मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं। यही वजह है कि CBSE 12वीं के नतीजों में लड़कियों की बढ़त पिछले दस साल से कायम है, भले ही अब यह अंतर पहले से काफी कम हो गया हो।




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