
नीति आयोग (NITI Aayog) ने देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था पर एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की है। “भारत में स्कूली शिक्षा सिस्टम: क्वालिटी बढ़ाने के लिए समय का एनालिसिस और पॉलिसी रोडमैप” नाम की इस रिपोर्ट में पिछले दस वर्षों के दौरान स्कूल शिक्षा क्षेत्र में हुए बदलावों, चुनौतियों और सुधारों का आकलन किया गया है। रिपोर्ट का मुख्य उद्देश्य देशभर में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना और सभी छात्रों को समान सीखने के अवसर उपलब्ध कराना है।
रिपोर्ट को नीति आयोग की वाइस चेयरमैन सुमन बेरी और सीईओ निधि छिब्बर ने जारी किया। इसमें UDISE+ 2024-25, PARAKH राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024, NAS 2017 और 2021 तथा ASER 2024 जैसे बड़े शिक्षा सर्वेक्षणों और डेटाबेस के आधार पर देश के स्कूल शिक्षा सिस्टम का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन में स्कूलों तक पहुंच, नामांकन, इंफ्रास्ट्रक्चर, समावेशिता और सीखने के परिणामों को प्रमुख आधार बनाया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का स्कूल शिक्षा सिस्टम दुनिया का सबसे बड़ा स्कूली नेटवर्क बन चुका है। वर्तमान में देश में करीब 14.71 लाख स्कूल हैं, जहां 24.69 करोड़ से अधिक छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं में तेज सुधार दर्ज किया गया है। बिजली, साफ-सफाई और कार्यशील शौचालय जैसी सुविधाओं के साथ-साथ डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में भी बड़ा विस्तार देखने को मिला है। अब अधिक स्कूलों में कंप्यूटर, इंटरनेट और स्मार्ट क्लासरूम की सुविधा उपलब्ध हो रही है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि शिक्षा में बराबरी और समावेश को बढ़ावा देने में प्रगति हुई है। खासकर लड़कियों की स्कूलों में भागीदारी बढ़ी है और अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के छात्रों का नामांकन भी अलग-अलग स्तरों पर बेहतर हुआ है। महामारी के बाद छात्रों के सीखने के स्तर में भी सुधार के संकेत मिले हैं। बुनियादी पढ़ाई और गणितीय क्षमता में सुधार को National Education Policy 2020, NIPUN Bharat Mission और समग्र शिक्षा अभियान जैसी योजनाओं का असर माना गया है।
हालांकि रिपोर्ट में कई चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया गया है। इसमें 11 बड़ी सिस्टमिक और एकेडमिक समस्याओं की पहचान की गई है, जिन पर आने वाले समय में काम करने की जरूरत बताई गई है। इसके समाधान के लिए 13 प्रमुख सिफारिशों वाला रोडमैप तैयार किया गया है।
रिपोर्ट की आठ बड़ी सिफारिशें स्कूल संरचना को मजबूत करने, इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारने, शिक्षा प्रशासन में पारदर्शिता लाने, शिक्षकों की नियुक्ति और ट्रेनिंग बेहतर करने, डिजिटल लर्निंग बढ़ाने और शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करने पर केंद्रित हैं। वहीं पांच अकादमिक सिफारिशों में पढ़ाने के तरीकों और परीक्षा प्रणाली में बदलाव, बुनियादी साक्षरता को मजबूत करने, छात्रों की समग्र भलाई, व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने और पढ़ाई में AI आधारित इनोवेशन के इस्तेमाल को शामिल किया गया है।
रिपोर्ट में सुधारों को लागू करने के लिए शॉर्ट टर्म, मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म रणनीति भी दी गई है। इसके तहत 33 क्रियान्वयन उपाय और 125 से ज्यादा प्रदर्शन संकेतक तय किए गए हैं ताकि राज्यों और जिलों में शिक्षा सुधार की प्रगति को लगातार मापा जा सके। साथ ही देश के अलग-अलग हिस्सों से अच्छी पहल और सफल मॉडल की केस स्टडी भी रिपोर्ट में शामिल की गई हैं।




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