
इंजीनियरिंग शिक्षा में अब केवल किताबों और थ्योरी तक सीमित पढ़ाई नहीं रह गई है। तेजी से बदलती टेक्नोलॉजी दुनिया में अब कॉलेज और टेक कंपनियां छात्रों को प्रैक्टिकल अनुभव देने पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं। यही वजह है कि हैकाथॉन और इंडस्ट्री से जुड़े इनोवेशन चैलेंज इंजीनियरिंग छात्रों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग और प्रोडक्ट डेवलपमेंट जैसी नई तकनीकों पर काम करने का मौका मिल रहा है।
इसी दिशा में आईटी कंपनी Cognizant ने 7 मई 2026 को पुणे स्थित अपने केंद्र में Technoverse Hackathon 2026 का आयोजन पूरा किया। इस प्रतियोगिता में देशभर के 160 से ज्यादा शहरों और 450 से अधिक इंजीनियरिंग कॉलेजों के 22 हजार से ज्यादा प्री-फाइनल ईयर छात्रों ने हिस्सा लिया। इसमें IIT, NIT और IIIT जैसे प्रमुख संस्थानों के छात्र भी शामिल रहे।
छात्राओं की भागीदारी ने खींचा ध्यान
इस हैकाथॉन की खास बात छात्राओं की बड़ी भागीदारी रही। कंपनी के मुताबिक कुल प्रतिभागियों में 62 प्रतिशत महिलाएं थीं। प्रतियोगिता में शामिल 5,600 से ज्यादा टीमों में से 1,100 से अधिक टीमें पूरी तरह महिला सदस्यों की थीं।
प्रतियोगिता के नियमों के अनुसार, हर चार सदस्यीय टीम में कम से कम दो महिला सदस्यों का होना अनिवार्य रखा गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहल टेक्नोलॉजी क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकती है।
इन शहरों से सबसे ज्यादा भागीदारी
भागीदारी के मामले में हैदराबाद, चेन्नई, बेंगलुरु, कोयंबटूर और पुणे शीर्ष पांच शहरों में शामिल रहे। इससे साफ है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी आधारित इनोवेशन को लेकर छात्रों में रुचि तेजी से बढ़ रही है।
24 घंटे तक चला फाइनल राउंड
हैकाथॉन की शुरुआत अप्रैल 2026 में हुई थी। कई चरणों के बाद 24 टीमों को फाइनल राउंड के लिए चुना गया। फाइनल मुकाबले में छात्रों को 24 घंटे के भीतर अपने Minimum Viable Product (MVP) तैयार कर जूरी के सामने प्रस्तुत करना था।
फाइनल चरण के दौरान प्रतिभागियों को Amazon Web Services (AWS) के सहयोग से क्लाउड आधारित डेवलपमेंट टूल्स और इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराया गया। इससे छात्रों को इंडस्ट्री लेवल टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म्स पर काम करने का अनुभव मिला।
इंडस्ट्री रेडी स्किल्स पर जोर
Cognizant के अधिकारियों के अनुसार, इस कार्यक्रम का उद्देश्य इंजीनियरिंग छात्रों को इंडस्ट्री के लिए बेहतर तरीके से तैयार करना और टेक्नोलॉजी आधारित इनोवेशन में उनकी भागीदारी बढ़ाना था।
विशेषज्ञों का कहना है कि आज कंपनियां केवल डिग्री नहीं, बल्कि समस्या समाधान क्षमता, टीमवर्क, प्रैक्टिकल स्किल्स और रियल-वर्ल्ड प्रोजेक्ट्स पर काम करने का अनुभव भी देख रही हैं। ऐसे में हैकाथॉन छात्रों को सीखने और खुद को साबित करने का बड़ा अवसर दे रहे हैं।
इन टीमों ने जीता मुकाबला
प्रतियोगिता में चेन्नई इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की टीम “AeroFyta” ने पहला स्थान हासिल किया और 3 लाख रुपये का पुरस्कार जीता। वहीं Techno Main Salt Lake की टीम “Owlgorithms” पहले रनर-अप रही। करुण्या इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंसेज की टीम “Devtronix” दूसरे रनर-अप के रूप में चुनी गई।
पहले और दूसरे रनर-अप टीमों को क्रमशः 2 लाख रुपये और 1 लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी गई।
क्यों बढ़ रही है हैकाथॉन की अहमियत
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इंजीनियरिंग शिक्षा और ज्यादा स्किल आधारित होने वाली है। केवल परीक्षा और अंक अब पर्याप्त नहीं माने जा रहे। कंपनियां ऐसे छात्रों की तलाश में हैं जो नई तकनीकों को समझने के साथ उन्हें वास्तविक समस्याओं के समाधान में इस्तेमाल कर सकें।
इसी वजह से हैकाथॉन अब केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि सीखने, नेटवर्किंग और करियर ग्रोथ का महत्वपूर्ण मंच बनते जा रहे हैं।




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