
विदेश से MBA करने का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के बीच अमेरिका हमेशा सबसे लोकप्रिय विकल्पों में शामिल रहा है। खासतौर पर स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी (Stanford University) का नाम दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज में लिया जाता है। यहां का Stanford Graduate School of Business MBA प्रोग्राम वैश्विक स्तर पर काफी चर्चित है और QS जैसी अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में इसे अमेरिका के टॉप बिजनेस स्कूलों में गिना जाता है।
अक्सर लोगों के बीच यह धारणा रहती है कि स्टैनफर्ड केवल टेक्नोलॉजी और कंप्यूटर साइंस के लिए मशहूर है, लेकिन बिजनेस एजुकेशन के क्षेत्र में भी यह यूनिवर्सिटी बेहद मजबूत मानी जाती है। दुनिया भर के छात्र यहां MBA करने पहुंचते हैं। हालांकि, यहां पढ़ाई का खर्च काफी ज्यादा है। ऐसे में विदेश में MBA की योजना बना रहे छात्रों के लिए यह जानना जरूरी है कि स्टैनफर्ड में पढ़ाई का कुल खर्च कितना आता है और इसका रिटर्न कितना बेहतर माना जाता है।
स्टैनफर्ड में MBA करने का कुल खर्च कितना है?
स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी का MBA प्रोग्राम दो साल का होता है। यूनिवर्सिटी की ओर से जारी Cost of Attendance (COA) के अनुसार छात्रों को ट्यूशन फीस के अलावा रहने, खाने, हेल्थ इंश्योरेंस और अन्य जरूरी खर्च भी उठाने पड़ते हैं।
एक साल के अनुमानित खर्च की बात करें तो ट्यूशन फीस करीब 85,755 डॉलर है। इसके अलावा हाउसिंग यानी हॉस्टल खर्च लगभग 21,507 डॉलर तक पहुंचता है। वहीं खाने-पीने और निजी खर्च के लिए करीब 19,464 डॉलर का बजट रखना पड़ता है।
मेडिकल इंश्योरेंस पर लगभग 8,232 डॉलर और हेल्थ फीस के रूप में करीब 813 डॉलर अतिरिक्त खर्च होते हैं। इस तरह एक साल में कुल अनुमानित खर्च करीब 1,35,771 डॉलर तक पहुंच जाता है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 1.28 करोड़ रुपये के बराबर है।
चूंकि MBA प्रोग्राम दो साल का है, इसलिए पूरे कोर्स का कुल खर्च लगभग 2.56 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। हालांकि यह राशि छात्रों की लाइफस्टाइल और व्यक्तिगत खर्च के आधार पर थोड़ी अलग भी हो सकती है।
क्या महंगा MBA वाकई फायदे का सौदा है?
स्टैनफर्ड से MBA करना निश्चित रूप से महंगा माना जाता है, लेकिन इसके साथ मिलने वाले अवसर भी काफी बड़े हैं। बिजनेस स्कूल का क्लास साइज छोटा रखा जाता है और हर साल सीमित छात्रों को ही प्रवेश दिया जाता है। इससे छात्रों को बेहतर नेटवर्किंग और व्यक्तिगत सीखने का मौका मिलता है।
स्टैनफर्ड MBA ग्रेजुएट्स की औसत सालाना सैलरी लगभग 1,85,000 डॉलर बताई जाती है। इसमें साइनिंग बोनस और अन्य इंसेंटिव शामिल नहीं होते। ऐसे में कुल पैकेज इससे भी ज्यादा हो सकता है।
रोजगार के आंकड़े भी इस संस्थान की मजबूत प्रतिष्ठा दिखाते हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यहां से MBA करने वाले लगभग 90 प्रतिशत छात्रों को ग्रेजुएशन के तीन महीने के भीतर नौकरी मिल जाती है। दुनिया की कई बड़ी कंपनियां स्टैनफर्ड ग्रेजुएट्स को प्राथमिकता देती हैं।
स्टार्टअप और आंत्रप्रेन्योरशिप के लिए भी मशहूर
स्टैनफर्ड केवल नौकरी के अवसरों के लिए ही नहीं, बल्कि आंत्रप्रेन्योरशिप कल्चर के लिए भी जाना जाता है। यहां पढ़ने वाले कई छात्र खुद की कंपनियां शुरू करते हैं। सिलिकॉन वैली के करीब होने की वजह से छात्रों को स्टार्टअप इकोसिस्टम और निवेशकों तक आसान पहुंच मिलती है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक स्टैनफर्ड से जुड़े छात्र और पूर्व छात्र हर साल बड़ी संख्या में नई कंपनियां शुरू करते हैं। यही वजह है कि बिजनेस और स्टार्टअप की दुनिया में इस यूनिवर्सिटी का मजबूत प्रभाव माना जाता है।
स्कॉलरशिप और ROI भी बनाते हैं खास
भले ही यहां पढ़ाई का खर्च करोड़ों में हो, लेकिन विशेषज्ञ स्टैनफर्ड MBA को मजबूत Return on Investment यानी ROI वाला प्रोग्राम मानते हैं। बेहतर सैलरी और तेजी से मिलने वाले रोजगार अवसरों की वजह से कई छात्र कुछ वर्षों में अपनी पढ़ाई का खर्च निकाल लेते हैं।
इसके अलावा यूनिवर्सिटी की ओर से जरूरतमंद और योग्य छात्रों को कई तरह की स्कॉलरशिप और फाइनेंशियल सहायता भी दी जाती है, जिससे आर्थिक बोझ कुछ हद तक कम हो सकता है।




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