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KR Mangalam University और University of East Anglia के बीच समझौता, भारतीय छात्रों को मिलेगा विदेश में पढ़ाई का मौका

KR Mangalam University और University of East Anglia के बीच समझौता, भारतीय छात्रों को मिलेगा विदेश में पढ़ाई का मौका

KR Mangalam University और University of East Anglia के बीच समझौता, भारतीय छात्रों को मिलेगा विदेश में पढ़ाई का मौका

भारतीय विश्वविद्यालयों में अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। इसी कड़ी में अब सेमेस्टर-अब्रॉड प्रोग्राम छात्रों के बीच लोकप्रिय विकल्प बनते जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों के जरिए छात्र अपने भारतीय संस्थान में नामांकन बनाए रखते हुए विदेश में पढ़ाई का अनुभव हासिल कर सकते हैं।

इसी दिशा में यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट एंग्लिया (UEA) और केआर मंगलम यूनिवर्सिटी (KRMU) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता (MoU) हुआ है। इस साझेदारी के तहत भारतीय छात्रों के लिए BBA Semester-Abroad Programme शुरू किया जाएगा।

ब्रिटेन में पढ़ाई का मिलेगा अवसर

इस समझौते के तहत KR Mangalam University के छात्र ब्रिटेन स्थित UEA के नॉरविच कैंपस में एक सेमेस्टर या पूरा शैक्षणिक वर्ष पढ़ाई कर सकेंगे। खास बात यह है कि छात्र अपनी डिग्री भारतीय विश्वविद्यालय से जारी रखते हुए विदेश में अकादमिक अनुभव प्राप्त कर पाएंगे।

दोनों संस्थानों ने कार्यक्रम को इस तरह तैयार किया है कि छात्रों के क्रेडिट्स का समन्वय बना रहे और उनकी पढ़ाई में कोई रुकावट न आए।

क्रेडिट सिस्टम के तहत होगी पढ़ाई

संस्थानों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस प्रोग्राम में शामिल छात्रों को प्रति सेमेस्टर 60 क्रेडिट या पूरे शैक्षणिक वर्ष में 120 क्रेडिट पूरे करने होंगे।

पाठ्यक्रम के मॉड्यूल KR Mangalam University के साथ परामर्श करके तय किए जाएंगे ताकि वे मौजूदा पाठ्यक्रम के अनुरूप रहें। प्रत्येक मॉड्यूल 20 क्रेडिट का होगा और इसमें संरचित शिक्षण एवं अकादमिक गतिविधियां शामिल होंगी।

छात्रों को मिलेगा अकादमिक सपोर्ट

इस कार्यक्रम में शामिल छात्रों को UEA के शैक्षणिक सलाहकारों की ओर से विशेष सहायता भी दी जाएगी। इसके साथ ही उनकी परीक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया विश्वविद्यालय के अन्य छात्रों की तरह ही होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय छात्रों को अंतरराष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली को समझने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए खुद को तैयार करने में मदद मिलेगी।

फीस में भी मिलेगी राहत

इस साझेदारी में ट्यूशन फीस वेवर का प्रावधान भी शामिल किया गया है, ताकि विदेश में पढ़ाई छात्रों के लिए आर्थिक रूप से ज्यादा सुलभ बन सके।

दोनों संस्थानों का कहना है कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को अंतरराष्ट्रीय अनुभव, विभिन्न संस्कृतियों की समझ और इंडस्ट्री आधारित शिक्षा प्रदान करना है। खासतौर पर मैनेजमेंट और बिजनेस एजुकेशन के छात्रों को इससे बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।

भारतीय विश्वविद्यालयों में बढ़ रहा ग्लोबल एजुकेशन का ट्रेंड

पिछले कुछ वर्षों में भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों में अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को लेकर रुचि तेजी से बढ़ी है। कई विश्वविद्यालय अब जॉइंट प्रोग्राम, सेमेस्टर एक्सचेंज और क्रेडिट ट्रांसफर व्यवस्था के जरिए छात्रों को वैश्विक शिक्षा से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के कार्यक्रम छात्रों को केवल विदेशी डिग्री अनुभव ही नहीं देते, बल्कि उन्हें वैश्विक नौकरी बाजार और बहुराष्ट्रीय कंपनियों की जरूरतों के अनुरूप भी तैयार करते हैं।

Asmita Sarkar

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