
दुनियाभर के स्कूल बढ़ते लर्निंग गैप और छात्रों की पढ़ाई में कम होती रुचि जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में शिक्षक और शोधकर्ता अब Explainable Artificial Intelligence (XAI) की ओर तेजी से ध्यान दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि प्राइवेसी को ध्यान में रखकर तैयार किए गए टिकाऊ AI सिस्टम स्कूलों को उन छात्रों की जल्दी पहचान करने में मदद कर सकते हैं जो पढ़ाई में पिछड़ने लगे हैं, ताकि समय रहते उन्हें जरूरी सहायता दी जा सके।
पारंपरिक AI सिस्टम्स को अक्सर “ब्लैक बॉक्स” कहा जाता है क्योंकि उनमें यह साफ नहीं होता कि निर्णय कैसे लिए गए। वहीं Explainable AI पारदर्शिता पर जोर देता है। यह स्पष्ट रूप से बताता है कि किसी छात्र को लेकर अलर्ट क्यों जारी हुआ, किन संकेतों के आधार पर भविष्यवाणी की गई और कौन-से फैक्टर्स उस निर्णय में शामिल थे।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इससे शिक्षक AI द्वारा दिए गए सुझावों को बेहतर तरीके से समझ और जांच सकते हैं, बजाय इसके कि वे केवल मशीन के फैसलों पर निर्भर रहें।
कैसे काम करती है Explainable AI?
ये सिस्टम छात्रों की नियमित शैक्षणिक गतिविधियों से जुड़े डेटा का विश्लेषण करते हैं। इसमें उपस्थिति, डिजिटल लर्निंग सामग्री के साथ इंटरैक्शन, असाइनमेंट में भागीदारी और ऑनलाइन एक्टिविटी पैटर्न जैसे संकेत शामिल होते हैं।
इन जानकारियों के आधार पर AI उन छात्रों की पहचान कर सकता है जो भविष्य में अकादमिक रूप से कमजोर पड़ सकते हैं। खास बात यह है कि यह पहचान परीक्षा परिणाम खराब आने से काफी पहले हो सकती है।
हाल ही में हुई एक रिसर्च में पाया गया कि Explainable AI सिस्टम लगभग 93 प्रतिशत तक की सटीकता के साथ कोर्स रिजल्ट और जोखिम वाले छात्रों की पहचान करने में सक्षम रहे।
शोधकर्ताओं के अनुसार, ये सिस्टम इसलिए प्रभावी हैं क्योंकि ये केवल परीक्षा आधारित मूल्यांकन पर निर्भर नहीं रहते, बल्कि छात्रों की लगातार बदलती सीखने की गतिविधियों को ट्रैक करते हैं। उदाहरण के लिए, अगर कोई छात्र लर्निंग रिसोर्स कम देखने लगे या ऑनलाइन गतिविधियों में कम हिस्सा लेने लगे, तो यह उसकी घटती रुचि या सीखने में परेशानी का शुरुआती संकेत हो सकता है।
कई संस्थान कर रहे हैं AI आधारित सिस्टम का इस्तेमाल
दुनियाभर के कई शैक्षणिक संस्थान अब AI आधारित अलर्ट सिस्टम को छात्र सहायता कार्यक्रमों के साथ जोड़ने का प्रयोग कर रहे हैं।
RADAR जैसे प्लेटफॉर्म छात्रों के अकादमिक रिकॉर्ड, उपस्थिति, वर्तमान प्रदर्शन और कुछ सॉफ्ट स्किल संकेतकों को मिलाकर उनकी प्रगति की लगातार निगरानी करते हैं।
अगर किसी छात्र का लर्निंग पैटर्न सामान्य अपेक्षाओं से अलग दिखाई देने लगता है, तो सिस्टम शिक्षकों और सलाहकारों को अलर्ट भेजता है। इसके बाद छात्रों को ट्यूटर सपोर्ट, अतिरिक्त मार्गदर्शन, वर्कलोड एडजस्टमेंट या अकादमिक काउंसलिंग जैसी मदद दी जा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन सिस्टम्स की सबसे बड़ी ताकत केवल भविष्यवाणी की सटीकता नहीं, बल्कि यह है कि स्कूल कितनी जल्दी उस जानकारी के आधार पर कार्रवाई कर पाते हैं।
शिक्षा में टिकाऊ AI क्यों बन रहा है जरूरी?
शिक्षा में Sustainable AI की बढ़ती चर्चा केवल तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध समान अवसर और बेहतर शैक्षणिक परिणामों से भी है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, अगर किसी छात्र की समस्याओं की पहचान देर से होती है, तो इससे उसका तनाव बढ़ सकता है, परिवार और संस्थान के बीच भरोसा कमजोर हो सकता है और बाद में सुधार के लिए स्कूलों को ज्यादा संसाधन खर्च करने पड़ते हैं।
इसके मुकाबले शुरुआती पहचान और व्यक्तिगत सहायता को ज्यादा मानवीय और प्रभावी तरीका माना जा रहा है, जो छात्रों के भविष्य और रोजगार क्षमता दोनों को बेहतर बना सकता है।
AI के इस्तेमाल को लेकर क्या हैं चिंताएं?
हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि ऐसे Early Warning Systems को जिम्मेदारी के साथ लागू करना बेहद जरूरी है।
आलोचकों का कहना है कि अगर AI टूल्स सही तरीके से डिजाइन नहीं किए गए, तो वे छात्रों को गलत तरीके से लेबल कर सकते हैं, पक्षपात बढ़ा सकते हैं या स्कूलों में जरूरत से ज्यादा निगरानी को बढ़ावा दे सकते हैं।
इन्हीं जोखिमों को कम करने के लिए शोधकर्ता सख्त प्राइवेसी सुरक्षा, सीमित डेटा कलेक्शन, नियमित बायस टेस्टिंग और लगातार मानवीय निगरानी की जरूरत पर जोर दे रहे हैं।
शिक्षकों को भी सलाह दी जा रही है कि वे AI को अंतिम निर्णय लेने वाले सिस्टम की बजाय केवल सहायता उपकरण के रूप में इस्तेमाल करें, ताकि हस्तक्षेप से जुड़े सभी अहम फैसलों में इंसानी भूमिका बनी रहे।
शिक्षा में AI का भविष्य किस दिशा में जा रहा है?
जैसे-जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शिक्षा प्रणाली का हिस्सा बनता जा रहा है, वैसे-वैसे बहस इस बात से आगे बढ़ रही है कि AI का इस्तेमाल होना चाहिए या नहीं। अब चर्चा इस बात पर केंद्रित हो रही है कि इसे नैतिक और टिकाऊ तरीके से कैसे लागू किया जाए।
समर्थकों का मानना है कि अगर Explainable AI को पारदर्शिता, जवाबदेही और समय पर सहायता देने वाले सिस्टम के साथ जोड़ा जाए, तो यह शिक्षा को ज्यादा समावेशी, अनुकूल और छात्र-केंद्रित बना सकता है।
इस तरह की तकनीक केवल शैक्षणिक प्रक्रियाओं को ऑटोमेट करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वास्तव में छात्रों के हित में काम करने वाली शिक्षा व्यवस्था तैयार करने में मदद कर सकती है।




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