
देशभर में हजारों Allied Healthcare कोर्स में दाखिला लेने की तैयारी कर रहे छात्र इन दिनों एडमिशन नियमों को लेकर असमंजस की स्थिति का सामना कर रहे हैं। फिजियोथेरेपी, ऑप्टोमेट्री, मेडिकल लेबोरेटरी साइंस और इमरजेंसी मेडिकल टेक्नोलॉजी जैसे कोर्स के लिए National Commission for Allied and Healthcare Professions (NCAHP) के तहत तय की गई पात्रता शर्तें अलग-अलग दस्तावेजों में बिखरी हुई और अस्पष्ट बताई जा रही हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, छात्रों, अभिभावकों और शिक्षाविदों ने इस बात पर चिंता जताई है कि अभी तक ऐसा कोई एक स्पष्ट और आधिकारिक दिशानिर्देश मौजूद नहीं है, जिसमें कोर्स-वार पात्रता नियम साफ तौर पर बताए गए हों।
सबसे ज्यादा भ्रम 12वीं में जरूरी विषय संयोजन, बायोलॉजी से जुड़े विषयों की परिभाषा, न्यूनतम अंकों की शर्त और आरक्षित वर्गों के लिए मिलने वाली छूट को लेकर बना हुआ है।
2026-27 सत्र से बढ़ सकता है बदलाव
यह अनिश्चितता ऐसे समय में बढ़ी है जब NCAHP 2026-27 शैक्षणिक सत्र से Allied Healthcare प्रोग्राम्स में एडमिशन प्रक्रिया को मानकीकृत करने की दिशा में काम कर रहा है।
कई अधिसूचनाओं में संकेत दिया गया है कि Bachelor of Physiotherapy (BPT) और Bachelor of Occupational Therapy (BOT) जैसे प्रमुख कोर्स में दाखिले के लिए NEET-UG अनिवार्य किया जा सकता है। हालांकि रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ कोर्स के लिए इसकी लागू होने की समयसीमा में बदलाव और देरी भी हुई है।
पात्रता नियमों की भाषा से बढ़ रही परेशानी
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि पात्रता नियमों में इस्तेमाल की गई अलग-अलग भाषा छात्रों के लिए बड़ी परेशानी बन रही है।
उदाहरण के तौर पर, कुछ कोर्स में Physics, Chemistry और Biology के साथ Botany तथा Zoology को अनिवार्य बताया गया है, जबकि कुछ अन्य कोर्स में Mathematics को विकल्प के रूप में स्वीकार किया गया है।
इसी तरह यह भी स्पष्ट नहीं है कि Biotechnology को “Biology” श्रेणी के अंतर्गत माना जाएगा या नहीं।
कई छात्रों ने शिकायत की है कि उन्हें एडमिशन प्रक्रिया के दौरान कोर्स शॉर्टलिस्ट करने के बाद पता चलता है कि वे पात्रता मानदंड पूरे नहीं करते।
ग्रामीण छात्रों पर ज्यादा असर की आशंका
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि स्पष्ट दिशानिर्देशों की कमी का सबसे ज्यादा असर ग्रामीण और पहली पीढ़ी के शिक्षार्थियों पर पड़ सकता है, क्योंकि ऐसे छात्र सरल और स्पष्ट एडमिशन प्रक्रिया पर अधिक निर्भर रहते हैं।
इसके अलावा Allied Healthcare कोर्स में NEET आधारित एडमिशन बढ़ने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि केवल बायोलॉजी आधारित एक परीक्षा फिजियोथेरेपी, साइकोलॉजी, न्यूट्रिशन और रिहैबिलिटेशन साइंस जैसे क्षेत्रों के लिए जरूरी कौशल का सही आकलन नहीं कर सकती।
Allied Healthcare सेक्टर को मजबूत करने की कोशिश
हालांकि इस भ्रम के बीच विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि ये बदलाव भारत में Allied Healthcare शिक्षा को अधिक व्यवस्थित और पेशेवर पहचान देने की बड़ी प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
NCAHP पहले ही कई Allied Healthcare विषयों के लिए competency-based curriculum जारी कर चुका है, जिसका उद्देश्य पूरे देश में एक समान शैक्षणिक मानक तैयार करना और कार्यबल की गुणवत्ता बेहतर बनाना है।
विशेषज्ञों के अनुसार, फिजियोथेरेपिस्ट, इमेजिंग टेक्नोलॉजिस्ट, लेबोरेटरी साइंटिस्ट और रिहैबिलिटेशन विशेषज्ञ जैसे Allied Healthcare प्रोफेशनल्स भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था में तेजी से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, क्योंकि देश में कुशल मेडिकल सपोर्ट स्टाफ की मांग लगातार बढ़ रही है।




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