
Central Board of Secondary Education द्वारा जारी 2026 के ग्रेड मार्क्स रेंज डेटा ने इस साल छात्रों के प्रदर्शन को लेकर कई अहम संकेत दिए हैं। आंकड़ों से पता चलता है कि साइंस और कॉमर्स स्ट्रीम के कई प्रमुख विषयों में छात्रों का औसत प्रदर्शन पिछले वर्षों की तुलना में थोड़ा कमजोर रहा है। इसका असर सीधे A1 ग्रेड की कट-ऑफ पर देखने को मिला, जो कई विषयों में नीचे आई है। वहीं ह्यूमैनिटीज विषयों में प्रदर्शन लगभग स्थिर बना हुआ है।
इस बार सबसे ज्यादा चर्चा फिजिक्स और अकाउंटेंसी जैसे विषयों की हो रही है, जहां A1 ग्रेड हासिल करने के लिए जरूरी अंक पिछले वर्षों की तुलना में काफी कम हुए हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इसका कारण पेपर का कठिन स्तर, कॉन्सेप्ट आधारित सवालों में बढ़ोतरी और छात्रों की तैयारी के पैटर्न में बदलाव हो सकता है।
साइंस स्ट्रीम में फिजिक्स और मैथ्स ने बढ़ाई चुनौती
साइंस स्ट्रीम में सबसे बड़ा बदलाव फिजिक्स विषय में देखने को मिला है। 2024 में जहां A1 ग्रेड के लिए 84 अंक जरूरी थे, वहीं 2026 में यह कट-ऑफ घटकर 79 अंक तक पहुंच गई। इससे संकेत मिलता है कि इस बार बड़ी संख्या में छात्र फिजिक्स में अपेक्षित स्कोर हासिल नहीं कर सके।
मैथ्स में भी लगातार तीसरे साल A1 कट-ऑफ में गिरावट दर्ज की गई है। 2024 में A1 ग्रेड की शुरुआत 88 अंकों से होती थी, जो 2025 में 86 और अब 2026 में 85 अंक पर पहुंच गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक मैथ्स में एप्लिकेशन और लॉजिकल आधारित सवाल बढ़ने से छात्रों को ज्यादा चुनौती का सामना करना पड़ा।
केमिस्ट्री में भी इसी तरह का ट्रेंड देखने को मिला। पहले जहां A1 ग्रेड के लिए 92 अंक तक की जरूरत थी, अब यह सीमा घटकर 87 अंक तक पहुंच गई है। हालांकि बायोलॉजी में प्रदर्शन अपेक्षाकृत स्थिर रहा। पिछले कुछ वर्षों की तरह इस बार भी A1 ग्रेड की रेंज करीब 91 से 100 अंकों के बीच बनी हुई है।
कॉमर्स स्ट्रीम में अकाउंटेंसी ने गिराई औसत रेंज
कॉमर्स स्ट्रीम में भी A1 ग्रेड की कट-ऑफ में गिरावट दर्ज की गई है। इकोनॉमिक्स विषय में पहले जहां A1 ग्रेड 91 अंकों से शुरू होता था, अब यह घटकर 89 अंक हो गया है। बिजनेस स्टडीज़ में भी हल्की गिरावट देखने को मिली और कट-ऑफ 91 से घटकर 90 अंक पर पहुंच गई।
सबसे ज्यादा बदलाव अकाउंटेंसी में दर्ज किया गया। 2024 में A1 ग्रेड पाने के लिए छात्रों को 93 अंक की जरूरत थी, लेकिन 2026 में यह कट-ऑफ घटकर 89 अंक तक आ गई। इससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार अकाउंटेंसी का पेपर अपेक्षाकृत कठिन रहा या छात्रों को लंबे और विश्लेषणात्मक सवालों में परेशानी हुई।
ह्यूमैनिटीज स्ट्रीम में प्रदर्शन रहा संतुलित
जहां साइंस और कॉमर्स में कट-ऑफ नीचे आई, वहीं ह्यूमैनिटीज विषयों में ज्यादा बदलाव नहीं देखा गया। हिस्ट्री में A1 कट-ऑफ 86 से बढ़कर 87 अंक हुई है। पॉलिटिकल साइंस में भी हल्का बदलाव दर्ज किया गया और A1 रेंज 87 से बढ़कर 89 तक पहुंच गई।
जियोग्राफी विषय लगभग स्थिर बना रहा और इसकी कट-ऑफ पिछले वर्षों की तरह 89 से 90 अंक के बीच रही। वहीं इंग्लिश कोर सबसे स्थिर विषय के रूप में सामने आया, जिसमें पिछले तीन वर्षों से A1 ग्रेड की रेंज 92 से 100 अंक के बीच बनी हुई है।
क्या बताते हैं ये आंकड़े?
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रेड कट-ऑफ में गिरावट केवल कमजोर प्रदर्शन का संकेत नहीं होती, बल्कि यह परीक्षा के कठिनाई स्तर और मूल्यांकन पैटर्न में बदलाव को भी दर्शाती है। CBSE हर साल छात्रों के ओवरऑल प्रदर्शन के आधार पर ग्रेड रेंज तय करता है। ऐसे में कट-ऑफ का नीचे आना इस बात का संकेत हो सकता है कि पेपर अपेक्षाकृत कठिन था या प्रश्नों का स्तर ज्यादा विश्लेषणात्मक रहा।
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि आने वाले वर्षों में बोर्ड परीक्षाओं में रटने के बजाय कॉन्सेप्ट क्लैरिटी और एप्लिकेशन आधारित तैयारी पर ज्यादा ध्यान देना होगा। खासकर साइंस और कॉमर्स के छात्रों के लिए समय प्रबंधन और प्रैक्टिस आधारित तैयारी पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है।




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