
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों के बीच मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। राष्ट्रीय जनता दल के सांसद सुधाकर सिंह समेत कई याचिकाकर्ताओं ने केंद्र सरकार और National Testing Agency के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव की मांग की है।
याचिका में कहा गया है कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा को पारंपरिक पेन-एंड-पेपर मोड में कराने के बजाय पूरी तरह कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट यानी CBT मोड में आयोजित किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि डिजिटल परीक्षा प्रणाली अपनाने से पेपर लीक, नकल और संगठित धांधली जैसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
इस याचिका को सांसद सुधाकर सिंह के अलावा सामाजिक कार्यकर्ता अनुभव गर्ग, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. ध्रुव चौहान और हरिशरण देवगन ने संयुक्त रूप से दाखिल किया है। याचिका अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत और एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड नीमा के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई है।
21 जून के री-एग्जाम को लेकर उठे सवाल
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से आग्रह किया है कि 21 जून 2026 को प्रस्तावित नीट यूजी री-एग्जाम को ऑफलाइन मोड में कराने की बजाय सुरक्षित CBT मोड में आयोजित करने का निर्देश दिया जाए। उनका कहना है कि मौजूदा परीक्षा प्रणाली में प्रश्नपत्रों की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती बन गई है और तकनीक आधारित परीक्षा मॉडल अधिक विश्वसनीय विकल्प साबित हो सकता है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि डिजिटल एन्क्रिप्शन, बायोमेट्रिक सत्यापन और एआई आधारित निगरानी जैसी तकनीकों के इस्तेमाल से परीक्षा प्रक्रिया को ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जा सकता है।
NTA की जगह नई परीक्षा संस्था बनाने की मांग
याचिका में केवल परीक्षा मोड बदलने की बात नहीं कही गई है, बल्कि National Testing Agency की संरचना पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने केंद्र सरकार से मौजूदा एनटीए की जगह एक स्वतंत्र “नेशनल एग्जामिनेशन अथॉरिटी” गठित करने की मांग की है।
प्रस्तावित संस्था में न्यायिक निगरानी, कानूनी जवाबदेही और अत्याधुनिक साइबर सुरक्षा व्यवस्था शामिल करने का सुझाव दिया गया है। उनका कहना है कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के लिए एक अधिक जवाबदेह और पारदर्शी तंत्र की जरूरत है।
हाई लेवल मॉनिटरिंग कमेटी बनाने की अपील
सुप्रीम कोर्ट से एक हाई लेवल मॉनिटरिंग कमेटी गठित करने की मांग भी की गई है। याचिका में सुझाव दिया गया है कि इस समिति में रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज, शिक्षाविद, मनोवैज्ञानिक, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ, फॉरेंसिक वैज्ञानिक और प्रशासनिक अधिकारी शामिल किए जाएं।
यह समिति राष्ट्रीय परीक्षाओं की सुरक्षा, पारदर्शिता और संचालन व्यवस्था में सुधार के लिए सिफारिशें तैयार करेगी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मौजूदा हालात केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि देश की पूरी प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली पर भरोसे का सवाल खड़ा कर रहे हैं।
सीबीआई जांच रिपोर्ट और सेंटर-वाइज रिजल्ट की मांग
याचिका में सीबीआई को निर्देश देने की भी मांग की गई है कि वह चार सप्ताह के भीतर कथित नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले की स्टेटस रिपोर्ट अदालत में पेश करे। रिपोर्ट में जांच के दौरान सामने आए नेटवर्क, गिरफ्तारियां, आरोपियों और अभियोजन की स्थिति का विस्तृत ब्यौरा देने की मांग की गई है।
इसके साथ ही एनटीए से परीक्षा का सेंटर-वाइज रिजल्ट सार्वजनिक करने की मांग भी की गई है, ताकि किसी भी असामान्य पैटर्न या गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच हो सके।
छात्रों से बोले अरविंद केजरीवाल- तनाव न लें
इस बीच अरविंद केजरीवालने भी नीट छात्रों से अपील की है कि वे तनाव और घबराहट से दूर रहें। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक वीडियो संदेश में छात्रों से अपने सुझाव और विचार साझा करने को कहा।
वीडियो में केजरीवाल ने कहा कि परीक्षा रद्द होने और लगातार आ रही खबरों के कारण कई छात्र मानसिक दबाव में हैं। उन्होंने छात्रों से धैर्य बनाए रखने और किसी भी तरह के नकारात्मक कदम से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि छात्र कमेंट या डीएम के जरिए अपने विचार सीधे उनके साथ साझा कर सकते हैं।
परीक्षा प्रणाली पर फिर उठे बड़े सवाल
नीट यूजी देशभर के लाखों छात्रों के मेडिकल करियर से जुड़ी परीक्षा है। ऐसे में बार-बार पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं के आरोपों ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सुप्रीम कोर्ट में दाखिल यह याचिका आने वाले समय में राष्ट्रीय परीक्षाओं के संचालन और सुरक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की दिशा तय कर सकती है।




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