
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर सामने आ रहे दावों को खारिज करते हुए कहा है कि उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग और मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी तरह तय मानकों के अनुसार की गई थी। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पर चल रहे ऐसे दावे तथ्यहीन हैं, जिनमें कहा जा रहा था कि जल्दबाजी या तैयारी की कमी के कारण स्कैनिंग प्रक्रिया प्रभावित हुई।
सीबीएसई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक आधिकारिक बयान में कहा कि ओएसएम प्रक्रिया के हर चरण, जैसे उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग, क्वालिटी चेक, डिजिटल मार्किंग और मूल्यांकन को लगातार निगरानी और निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत पूरा किया गया। बोर्ड के मुताबिक पूरी व्यवस्था पारदर्शिता और निष्पक्षता को ध्यान में रखकर लागू की गई थी।
बोर्ड ने छात्रों और अभिभावकों से की अपील
सीबीएसई ने कहा कि परीक्षा और मूल्यांकन प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसी वजह से हर स्तर पर गुणवत्ता जांच और तकनीकी निगरानी की व्यवस्था की गई थी ताकि मूल्यांकन प्रक्रिया में किसी तरह की त्रुटि न हो।
बोर्ड ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों से जारी जानकारी पर ही भरोसा करें और सोशल मीडिया या अन्य प्लेटफॉर्म पर फैल रही भ्रामक खबरों से सावधान रहें।
रिजल्ट के बाद उठे थे सवाल
दरअसल, सीबीएसई ने 13 मई को कक्षा 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 के परिणाम घोषित किए थे। इस साल 85 प्रतिशत से अधिक छात्र परीक्षा में सफल हुए, लेकिन पिछले वर्ष की तुलना में कुल पास प्रतिशत में तीन प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।
इसी सत्र में पहली बार बोर्ड ने बड़े स्तर पर ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम के जरिए उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कराया। रिजल्ट जारी होने के बाद कुछ छात्रों और अभिभावकों ने कॉपियों की स्कैनिंग क्वालिटी और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए थे। सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाएं सामने आईं, जिसके बाद बोर्ड को सफाई जारी करनी पड़ी।
क्या है ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम
ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम के तहत उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करके डिजिटल फॉर्मेट में परीक्षकों तक पहुंचाया जाता है। परीक्षक कंप्यूटर स्क्रीन पर ही उत्तरों का मूल्यांकन करते हैं। इस प्रणाली का उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक तेज, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना माना जाता है।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली से कॉपी ट्रैकिंग, मॉडरेशन और निगरानी आसान हो जाती है। हालांकि किसी भी नई व्यवस्था के शुरुआती चरण में तकनीकी सवाल और छात्रों की चिंताएं सामने आना सामान्य माना जाता है।
लगातार बढ़ रहा है डिजिटल मूल्यांकन का इस्तेमाल
पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न शिक्षा बोर्ड और विश्वविद्यालय डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली की ओर तेजी से बढ़े हैं। CBSE भी परीक्षा प्रक्रिया को आधुनिक बनाने और परिणाम जारी करने में लगने वाले समय को कम करने के लिए तकनीक आधारित मॉडल अपना रहा है।
बोर्ड का कहना है कि भविष्य में भी मूल्यांकन प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी तथा भरोसेमंद बनाने के लिए तकनीकी सुधार जारी रहेंगे।




Add comment