
NEET-UG री-एग्जाम को लेकर केंद्र सरकार पूरी तरह सतर्क नजर आ रही है। परीक्षा को सुरक्षित, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आयोजित कराने के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की। बैठक में शिक्षा मंत्रालय और National Testing Agency (NTA) के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
सूत्रों के मुताबिक बैठक में परीक्षा से पहले किसी भी प्रकार की गड़बड़ी, पेपर लीक या अफवाहों को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की गई। परीक्षा केंद्रों की निगरानी, डिजिटल ट्रैकिंग और ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
सोशल मीडिया पर फर्जी दावों को लेकर सरकार सख्त
सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फैल रही अफवाहों और फर्जी जानकारी को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया है। इस संबंध में मेटा, गूगल और टेलीग्राम जैसी बड़ी टेक कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ अलग बैठक की गई। बैठक में फर्जी पेपर लीक, भ्रामक पोस्ट और डर फैलाने वाले टेलीग्राम चैनलों को लेकर चिंता जताई गई।
अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा से पहले कई टेलीग्राम चैनल अचानक सक्रिय हो जाते हैं और छात्रों को फर्जी पेपर, क्लिकबेट मैसेज और अपुष्ट जानकारियों के जरिए भ्रमित करने की कोशिश करते हैं। कई मामलों में छात्रों को संदिग्ध लिंक के माध्यम से फर्जी ग्रुप और ऑटोमेटेड बॉट्स तक पहुंचाया जाता है।
संदिग्ध नेटवर्क पर एजेंसियों की नजर
खुफिया एजेंसियों की शुरुआती जांच में यह संकेत भी मिले हैं कि कुछ संदिग्ध चैनल सीमित मोबाइल नंबरों और समन्वित नेटवर्क के जरिए संचालित किए जा रहे हैं। अधिकारियों को आशंका है कि ये नेटवर्क सुनियोजित तरीके से छात्रों और अभिभावकों के बीच डर और भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं।
सरकारी सूत्रों के अनुसार साइबर मॉनिटरिंग एजेंसियों को ऐसे चैनलों और अकाउंट्स की पहचान करने का काम सौंपा गया है, ताकि परीक्षा से पहले किसी भी तरह की भ्रामक गतिविधि को रोका जा सके।
शिक्षा मंत्री ने दिए सख्त निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने फर्जी जानकारी फैलाने वाले चैनलों को तुरंत चिन्हित कर ब्लॉक और हटाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया कंपनियों को शिक्षा मंत्रालय, एनटीए और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर तेजी से कार्रवाई करनी होगी।
सरकार का कहना है कि छात्रों को अफवाहों और गलत सूचनाओं से बचाना उसकी प्राथमिकता है। साथ ही परीक्षा प्रणाली में छात्रों और अभिभावकों का भरोसा बनाए रखना भी बेहद जरूरी है।
पिछले विवादों के बाद बढ़ाई गई सतर्कता
पिछले वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर पेपर लीक और ऑनलाइन अफवाहों के कई मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे में इस बार NEET-UG री-एग्जाम को लेकर सरकार अतिरिक्त सतर्कता बरत रही है। शिक्षा मंत्रालय चाहता है कि परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रहे और किसी भी प्रकार की तकनीकी या सुरक्षा संबंधी चूक की गुंजाइश न रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ती फर्जी गतिविधियों को देखते हुए परीक्षा सुरक्षा अब केवल परीक्षा केंद्रों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि साइबर स्पेस की निगरानी भी उतनी ही जरूरी हो गई है।




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