
दिल्ली विश्वविद्यालय (University of Delhi) ने तकनीकी शिक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। विश्वविद्यालय ने घोषणा की है कि शैक्षणिक सत्र 2026 से माइक्रोवेव और कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग के एमटेक प्रोग्राम में प्रवेश के लिए पहली बार GATE स्कोर को मान्यता दी जाएगी। अब तक दिल्ली विश्वविद्यालय केवल पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में ही GATE अंकों का उपयोग करता था।
विश्वविद्यालय का मानना है कि नई व्यवस्था से तकनीकी कोर्स की गुणवत्ता बेहतर होगी और योग्य छात्रों को प्रवेश प्रक्रिया में अधिक पारदर्शी तरीके से मौका मिल सकेगा। यह बदलाव All India Council for Technical Education की मंजूरी मिलने के बाद लागू किया गया है।
पहली बार PG टेक्निकल कोर्स में लागू होगा GATE स्कोर
दिल्ली विश्वविद्यालय के अनुसार 2026 से एमटेक (माइक्रोवेव एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग) कोर्स में दाखिले के लिए वैध GATE स्कोर को प्राथमिक आधार बनाया जाएगा। यह पहली बार है जब विश्वविद्यालय किसी पोस्टग्रेजुएट टेक्निकल प्रोग्राम में प्रवेश के लिए GATE अंकों का इस्तेमाल करेगा।
अब तक विश्वविद्यालय में इस प्रकार के कोर्स में प्रवेश अन्य शैक्षणिक मानदंडों के आधार पर होता था, जबकि GATE स्कोर केवल शोध कार्यक्रमों यानी पीएचडी एडमिशन में मान्य था।
GATE उम्मीदवारों को मिलेगी प्राथमिकता
विश्वविद्यालय की अधिसूचना के अनुसार जिन छात्रों के पास वैध GATE स्कोर होगा, उन्हें प्रवेश प्रक्रिया में सबसे पहले मौका दिया जाएगा। श्रेणीवार मेरिट सूची GATE अंकों के आधार पर तैयार की जाएगी।
अगर सभी सीटें GATE उम्मीदवारों से नहीं भरती हैं, तो बची हुई सीटों पर CUET-PG 2026 मेरिट के आधार पर प्रवेश दिया जाएगा। इससे उन छात्रों को भी अवसर मिलेगा जिनके पास GATE स्कोर नहीं है लेकिन उन्होंने CUET-PG में अच्छा प्रदर्शन किया है।
कौन कर सकेगा आवेदन?
एमटेक कार्यक्रम में आवेदन के लिए उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से BTech, BE, BSc इंजीनियरिंग, MSc या समकक्ष डिग्री होना जरूरी है।
पात्रता में इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियरिंग और रेडियो फिजिक्स जैसे विषय शामिल किए गए हैं। विश्वविद्यालय का कहना है कि तकनीकी पृष्ठभूमि वाले छात्रों को इस कोर्स में रिसर्च और इंडस्ट्री आधारित सीखने का बेहतर अवसर मिलेगा।
कुल 30 सीटों पर होगा दाखिला
दिल्ली विश्वविद्यालय ने इस एमटेक प्रोग्राम के लिए कुल 30 सीटें निर्धारित की हैं। इनमें 13 सीटें सामान्य वर्ग, 8 ओबीसी, 4 एससी, 2 एसटी और 3 सीटें अल्पसंख्यक वर्ग के लिए आरक्षित रहेंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि सीमित सीटों और GATE आधारित चयन प्रक्रिया से कोर्स में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। इससे विश्वविद्यालय में तकनीकी शिक्षा का स्तर और मजबूत होने की उम्मीद है।
अलग पोर्टल के जरिए होंगे आवेदन
विश्वविद्यालय ने साफ किया है कि एमटेक प्रवेश प्रक्रिया सामान्य CSAS-PG पोर्टल के तहत नहीं चलेगी। इसके लिए अलग से एडमिशन पोर्टल शुरू किया जाएगा, जहां उम्मीदवार आवेदन कर सकेंगे।
उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी होने वाले विस्तृत दिशा-निर्देश और आवेदन तिथियों पर नजर बनाए रखें।
तकनीकी शिक्षा और रिसर्च के क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच दिल्ली विश्वविद्यालय का यह फैसला छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। इससे राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा के जरिए प्रतिभाशाली छात्रों को बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है।




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