
नौकरी की दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। कंपनियां भर्ती प्रक्रिया को तेज और आसान बनाने के लिए AI आधारित एप्लीकेंट ट्रैकिंग सिस्टम (ATS) का उपयोग कर रही हैं। लेकिन अब एक नई रिसर्च ने इस तकनीक को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अध्ययन में पाया गया है कि AI सिस्टम, इंसानों द्वारा लिखे गए रिज्यूमे की तुलना में AI से तैयार किए गए रिज्यूमे को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं।
यह रिसर्च भर्ती प्रक्रिया में बढ़ते ऑटोमेशन और उसके संभावित प्रभावों को समझने के लिए की गई थी। अध्ययन के दौरान 2,245 मानव द्वारा लिखे गए रिज्यूमे का विश्लेषण किया गया। इसके बाद उन्हीं रिज्यूमे के कई AI जनरेटेड संस्करण तैयार किए गए और उन्हें 24 अलग-अलग प्रकार की नौकरियों के लिए टेस्ट किया गया।
AI सिस्टम ने AI रिज्यूमे को दी ज्यादा प्राथमिकता
रिसर्च में सामने आया कि AI आधारित भर्ती सिस्टम ने AI से लिखे गए रिज्यूमे को इंसानों द्वारा तैयार रिज्यूमे की तुलना में लगभग 23 प्रतिशत से 60 प्रतिशत तक ज्यादा पसंद किया। विशेषज्ञों के अनुसार यह अंतर काफी बड़ा माना जा रहा है और इससे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं।
अध्ययन में यह भी देखा गया कि AI सिस्टम रिज्यूमे की भाषा, फॉर्मेटिंग और लिखने के तरीके से काफी प्रभावित हो रहे थे। यानी जिन रिज्यूमे में AI टूल्स द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली संरचना और प्रोफेशनल स्टाइल दिखाई दी, उन्हें अधिक सकारात्मक स्कोर मिला।
किन क्षेत्रों में ज्यादा दिखा असर?
रिपोर्ट के अनुसार अकाउंटिंग, सेल्स और फाइनेंस जैसे क्षेत्रों में यह प्रभाव ज्यादा देखने को मिला। इन सेक्टर में रिज्यूमे की भाषा, प्रस्तुति और प्रोफेशनल टोन को काफी महत्व दिया जाता है। ऐसे में AI आधारित सिस्टम उन रिज्यूमे को तेजी से आगे बढ़ा रहे थे जो मशीन द्वारा तैयार किए गए लग रहे थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे उन उम्मीदवारों को नुकसान हो सकता है जो योग्य होने के बावजूद तकनीकी रूप से आकर्षक रिज्यूमे तैयार नहीं कर पाते। खासकर छोटे शहरों या सीमित संसाधनों वाले छात्रों और नौकरी तलाशने वालों पर इसका असर अधिक पड़ सकता है।
भर्ती प्रक्रिया में बढ़ सकता है नया पक्षपात
रिसर्च से जुड़े विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह स्थिति भर्ती प्रक्रिया में एक नए प्रकार का पक्षपात पैदा कर सकती है। अगर कंपनियां केवल AI आधारित स्क्रीनिंग सिस्टम पर निर्भर रहेंगी, तो कई योग्य उम्मीदवार शुरुआती चरण में ही बाहर हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि AI सिस्टम अक्सर पैटर्न और भाषा शैली के आधार पर निर्णय लेते हैं। ऐसे में जिन लोगों को AI टूल्स का बेहतर इस्तेमाल आता है, उन्हें चयन प्रक्रिया में अतिरिक्त फायदा मिल सकता है। इससे भर्ती प्रक्रिया में समान अवसर का सिद्धांत प्रभावित हो सकता है।
शिक्षा और प्रोफेशनल सेक्टर पर भी पड़ सकता है असर
रिसर्च में यह भी कहा गया है कि यदि इस समस्या को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में इसका असर सिर्फ नौकरी तक सीमित नहीं रहेगा। शिक्षा, प्रोफेशनल ट्रेनिंग और अन्य मूल्यांकन प्रक्रियाओं में भी AI आधारित निर्णय प्रणाली असंतुलन पैदा कर सकती है।
दुनियाभर में AI टूल्स का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में विशेषज्ञ अब इस बात पर जोर दे रहे हैं कि कंपनियां और संस्थान AI सिस्टम का इस्तेमाल करते समय मानवीय समीक्षा और पारदर्शिता को भी बराबर महत्व दें।
क्या पूरी तरह AI पर निर्भर होना सही है?
भर्ती विशेषज्ञों का मानना है कि AI तकनीक भर्ती प्रक्रिया को तेज और व्यवस्थित जरूर बनाती है, लेकिन अंतिम निर्णय में मानव मूल्यांकन की भूमिका खत्म नहीं होनी चाहिए। AI केवल एक सहायक उपकरण हो सकता है, लेकिन उम्मीदवार की वास्तविक क्षमता, अनुभव और सोच को समझने के लिए मानवीय दृष्टिकोण अब भी जरूरी है।
तेजी से बदलती नौकरी की दुनिया में यह रिसर्च एक महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है, जो बताती है कि तकनीक की सुविधा के साथ उसके संभावित जोखिमों को समझना भी उतना ही जरूरी है।




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