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तेलंगाना में 11वीं-12वीं के छात्रों को मिलेगा मिड-डे मील, सरकार ने जूनियर कॉलेजों के लिए दी मंजूरी

तेलंगाना में 11वीं-12वीं के छात्रों को मिलेगा मिड-डे मील, सरकार ने जूनियर कॉलेजों के लिए दी मंजूरी

तेलंगाना में 11वीं-12वीं के छात्रों को मिलेगा मिड-डे मील, सरकार ने जूनियर कॉलेजों के लिए दी मंजूरी

तेलंगाना सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में बड़ा फैसला लेते हुए राज्य के सभी जूनियर कॉलेजों में पढ़ने वाले 11वीं और 12वीं के छात्रों के लिए मिड-डे मील योजना शुरू करने को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री A. Revanth Reddy की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर सहमति बनी। सरकार का कहना है कि इस कदम से आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी और पढ़ाई छोड़ने की समस्या को कम करने में मदद मिलेगी।

राज्य सरकार अब शिक्षा, रोजगार, आवास और बुनियादी सुविधाओं को साथ लेकर व्यापक स्तर पर काम करने की तैयारी में है। कैबिनेट बैठक में कई अहम योजनाओं पर चर्चा हुई, लेकिन जूनियर कॉलेजों तक मिड-डे मील योजना का विस्तार सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में माना जा रहा है।

अब 11वीं और 12वीं के छात्रों को भी मिलेगा मुफ्त भोजन

कैबिनेट बैठक के बाद सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री ने जानकारी दी कि राज्य के सभी जूनियर कॉलेजों में मिड-डे मील योजना लागू की जाएगी। इसका सीधा लाभ इंटरमीडिएट यानी 11वीं और 12वीं में पढ़ने वाले छात्रों को मिलेगा।

अब तक मिड-डे मील योजना मुख्य रूप से प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों तक सीमित थी। पहली बार इसे जूनियर कॉलेज स्तर तक बढ़ाने का फैसला लिया गया है। सरकार का मानना है कि कई छात्र आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई बीच में छोड़ देते हैं। ऐसे में मुफ्त भोजन मिलने से गरीब और ग्रामीण परिवारों के बच्चों को पढ़ाई जारी रखने में मदद मिलेगी।

स्कूल ड्रॉपआउट कम करने पर सरकार का फोकस

सरकार का फोकस खासतौर पर उन छात्रों पर है जो परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण नियमित रूप से कॉलेज नहीं जा पाते। विशेषज्ञों का मानना है कि मिड-डे मील जैसी योजनाएं छात्रों की उपस्थिति बढ़ाने और ड्रॉपआउट दर कम करने में असरदार साबित होती हैं।

तेलंगाना सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब कई राज्यों में उच्च माध्यमिक स्तर पर छात्रों की पढ़ाई छोड़ने की चुनौती बनी हुई है। सरकार को उम्मीद है कि इस योजना से छात्रों की पोषण स्थिति में भी सुधार होगा और उनकी पढ़ाई पर सकारात्मक असर पड़ेगा।

शिक्षा क्षेत्र में बड़ा कदम माना जा रहा फैसला

शिक्षा विशेषज्ञ इस फैसले को राज्य के लिए अहम पहल मान रहे हैं। उनका कहना है कि इंटरमीडिएट स्तर पर पढ़ाई का दबाव अधिक होता है और ऐसे में पोषण और नियमित उपस्थिति दोनों जरूरी हैं। मुफ्त भोजन की सुविधा मिलने से छात्र पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान दे पाएंगे।

सरकार आने वाले समय में इस योजना के संचालन, बजट और लागू करने की प्रक्रिया को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर सकती है। फिलहाल कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे शिक्षा क्षेत्र में छात्रों के हित में बड़ा निर्णय माना जा रहा है।

Asmita Sarkar

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