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JNU में विवाहित शोधार्थियों के हॉस्टल नियम बदले, अब सिर्फ 4 साल तक मिलेगी रहने की अनुमति

JNU में विवाहित शोधार्थियों के हॉस्टल नियम बदले, अब सिर्फ 4 साल तक मिलेगी रहने की अनुमति

JNU में विवाहित शोधार्थियों के हॉस्टल नियम बदले, अब सिर्फ 4 साल तक मिलेगी रहने की अनुमति

दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय यानी Jawaharlal Nehru University (JNU) ने विवाहित पीएचडी शोधार्थियों के लिए बने महानदी एक्सटेंशन यानी सुबनसिर हॉस्टल से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने हॉस्टल आवंटन प्रक्रिया, रहने की समय सीमा और शुल्क संरचना में संशोधन करते हुए नई अधिसूचना जारी की है। यह फैसला गठित समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है और इसे डीन ऑफ स्टूडेंट्स कार्यालय की ओर से लागू किया गया है।

नई अधिसूचना के अनुसार विश्वविद्यालय ने हॉस्टल मैनुअल से एमफिल कार्यक्रम से जुड़े सभी प्रावधान हटा दिए हैं। दरअसल, University Grants Commission ने 2022 के पीएचडी नियमों के तहत एमफिल कार्यक्रम को समाप्त कर दिया था। इसी वजह से अब हॉस्टल नियमावली में उससे संबंधित किसी भी व्यवस्था को शामिल नहीं रखा गया है। इसके अलावा जीरो सेमेस्टर से जुड़े संदर्भ भी हटाए गए हैं क्योंकि नई पीएचडी अध्यादेश में यह व्यवस्था शामिल नहीं है।

पीएचडी छात्रों के लिए चार साल की सीमा तय

विश्वविद्यालय ने हॉस्टल में रहने की अधिकतम अवधि को लेकर भी स्पष्ट नियम बना दिए हैं। नए प्रावधानों के तहत भारतीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों श्रेणी के शोधार्थी पीएचडी में प्रवेश की तारीख से अधिकतम चार वर्ष तक ही हॉस्टल में रह सकेंगे।

प्रशासन ने कहा है कि शोध प्रबंध जमा करने के लिए आवेदन करते समय और विश्वविद्यालय से संबंधित किसी भी बकाया के बिना हॉस्टल खाली करना अनिवार्य होगा। अधिसूचना में यह भी साफ कर दिया गया है कि तय समय सीमा के बाद किसी भी परिस्थिति में हॉस्टल में रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

गर्भवती छात्राओं और नई माताओं को प्राथमिकता

हॉस्टल आवंटन नियमों में सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को भी शामिल किया गया है। विश्वविद्यालय ने कहा है कि गर्भवती छात्राओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को हॉस्टल आवंटन में प्राथमिकता दी जाएगी।

इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए भी अब वही नियम लागू होंगे जो भारतीय छात्रों पर लागू हैं। इससे पहले कुछ मामलों में अलग व्यवस्थाएं लागू थीं, लेकिन अब आवंटन और प्रवास की नीति को समान बनाया गया है।

हॉस्टल फीस में भी बड़ा बदलाव

नई अधिसूचना के तहत विवाहित शोधार्थियों को अब 30 हजार रुपये का रिफंडेबल सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा करना होगा। वहीं कमरे का किराया और एस्टेब्लिशमेंट शुल्क मिलाकर पांच हजार रुपये प्रति माह तय किया गया है।

बिजली और पानी का शुल्क वास्तविक खपत के आधार पर लिया जाएगा। विश्वविद्यालय ने यह भी कहा है कि सिक्योरिटी डिपॉजिट, किराया और अन्य शुल्कों में हर साल 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाएगी।

आवेदन प्रक्रिया 1 जून से शुरू

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार विवाहित पीएचडी शोधार्थियों के लिए हॉस्टल आवेदन प्रक्रिया 1 जून से शुरू होगी। आवेदन करने वाले छात्रों को प्रवेश से पहले निर्धारित प्रारूप में शपथ पत्र देना होगा। इसके साथ ही स्वयं और जीवनसाथी की नौकरी तथा आय से संबंधित घोषणा भी जमा करनी होगी।

जेएनयू का यह फैसला ऐसे समय आया है जब विश्वविद्यालयों में शोधार्थियों के लिए आवास सुविधाओं और संसाधनों को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। नई व्यवस्था का उद्देश्य सीमित हॉस्टल क्षमता का बेहतर प्रबंधन और आवंटन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना बताया जा रहा है।

Asmita Sarkar

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