
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी Central Board of Secondary Education (CBSE) की मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। केरल के सामान्य शिक्षा मंत्री एन शमसुद्दीन ने सीबीएसई पर उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में “लापरवाही” बरतने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि इस तरह की गड़बड़ियां छात्रों के भविष्य पर गंभीर असर डाल सकती हैं और राज्य सरकार इस मामले में केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग करेगी।
एक टीवी चैनल से बातचीत में मंत्री ने कहा कि कई छात्रों और अभिभावकों की ओर से मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। उनका कहना था कि यदि उत्तर पुस्तिकाओं की जांच में सावधानी नहीं बरती जाती, तो इसका सीधा असर छात्रों के करियर, उच्च शिक्षा में प्रवेश और भविष्य के अवसरों पर पड़ता है।
मंत्री ने यह भी कहा कि केरल सरकार केंद्र सरकार से पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया की अंतिम तारीख बढ़ाने का अनुरोध करेगी ताकि जिन छात्रों को अपने अंकों को लेकर संदेह है, उन्हें पर्याप्त समय मिल सके। हाल के दिनों में सीबीएसई की स्कैन कॉपी और पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर कई तकनीकी और प्रशासनिक शिकायतें सामने आई हैं, जिसके बाद यह मुद्दा और अधिक चर्चा में आ गया है।
एन शमसुद्दीन ने कहा कि बोर्ड को यह समझना चाहिए कि परीक्षा परिणाम केवल अंक नहीं होते, बल्कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सीबीएसई की ओर से दिखाई गई लापरवाही को गंभीरता से लेने की जरूरत है।
हालांकि, अब तक सीबीएसई की ओर से केरल सरकार के आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। बोर्ड पहले ही छात्रों को यह सलाह दे चुका है कि वे केवल आधिकारिक वेबसाइट और सत्यापित सूचनाओं पर भरोसा करें।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बोर्ड परीक्षाओं में पारदर्शिता और सटीक मूल्यांकन बेहद जरूरी है, क्योंकि छोटे अंतर भी छात्रों के कॉलेज एडमिशन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर असर डाल सकते हैं। ऐसे में पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक भरोसेमंद और समयबद्ध बनाने की मांग लगातार उठ रही है।




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