Edinbox Hindi
CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग पर उठे सवाल, छात्र ने टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ियों का किया दावा

CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग पर उठे सवाल, छात्र ने टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ियों का किया दावा

CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग पर उठे सवाल, छात्र ने टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ियों का किया दावा

यह समय सीबीएसई के लिए कई चुनौतियों भरा साबित हो रहा है। एक ओर 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के मूल्यांकन में इस्तेमाल की जा रही ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली की टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पुनर्मूल्यांकन पोर्टल की भुगतान व्यवस्था में आई तकनीकी गड़बड़ी और कथित साइबर हमले ने भी बोर्ड की डिजिटल व्यवस्थाओं को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

हाल ही में 12वीं कक्षा के छात्र सार्थक सिद्धांत ने सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली के लिए जारी टेंडरों की तुलना करते हुए कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने अपने विश्लेषण में दावा किया है कि टेंडर प्रक्रिया के दौरान कुछ महत्वपूर्ण नियमों में बदलाव किए गए, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर प्रश्न खड़े होते हैं।

CBSE की OSM प्रणाली की टेंडर प्रक्रिया पर विवाद

सार्थक सिद्धांत का कहना है कि उन्होंने सीबीएसई द्वारा जारी किए गए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) से जुड़े विभिन्न टेंडर दस्तावेजों का अध्ययन किया और उनमें कई महत्वपूर्ण अंतर पाए। उनके अनुसार, कुल तीन टेंडर जारी किए गए थे। पहला टेंडर बाद में सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल से हटा दिया गया, जबकि दूसरे टेंडर में तकनीकी मूल्यांकन के दौरान सभी बोलीदाता अयोग्य घोषित हो गए। इसके बाद जारी तीसरे टेंडर के माध्यम से परियोजना एक एडटेक कंपनी को प्रदान की गई।

सार्थक का दावा है कि पुराने टेंडर दस्तावेजों में सेवा प्रदाता की जवाबदेही तय करने वाले कुछ स्पष्ट प्रावधान मौजूद थे। इनमें खराब प्रदर्शन की स्थिति में अयोग्यता और अन्य दंडात्मक कार्रवाई के नियम शामिल थे। उनका आरोप है कि बाद के टेंडर संस्करणों में इन प्रावधानों को हटा दिया गया।

उन्होंने यह भी दावा किया कि ब्लैकलिस्टिंग, वित्तीय पात्रता और परियोजना अनुभव से जुड़े कुछ मानदंडों में बदलाव किए गए। उनके अनुसार, इन परिवर्तनों से प्रतिस्पर्धा की प्रकृति प्रभावित हो सकती थी। हालांकि, इन आरोपों पर सीबीएसई की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

मूल्यांकन प्रणाली को लेकर बढ़ रही चर्चा

ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली को उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन के लिए लागू किया गया है। इसका उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और अधिक मानकीकृत बनाना है। लेकिन टेंडर प्रक्रिया से जुड़े सवालों ने इस व्यवस्था की प्रशासनिक पारदर्शिता पर बहस छेड़ दी है।

शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा और मूल्यांकन प्रणाली से जुड़े किसी भी तकनीकी या प्रशासनिक निर्णय में अधिकतम पारदर्शिता जरूरी है, ताकि छात्रों और अभिभावकों का भरोसा बना रहे।

पुनर्मूल्यांकन पोर्टल की भुगतान प्रणाली में गड़बड़ी

इसी बीच सीबीएसई के पुनर्मूल्यांकन (Revaluation) पोर्टल से जुड़ी एक और समस्या सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, पोर्टल के भुगतान गेटवे में कथित साइबर हस्तक्षेप या अनधिकृत पहुंच की वजह से कई छात्रों को शुल्क राशि असामान्य रूप से दिखाई देने लगी।

बताया गया है कि कुछ मामलों में पुनर्मूल्यांकन शुल्क एक रुपये से लेकर लगभग 67,000 से 68,000 रुपये तक अलग-अलग दिखाई दे रहा था। यह समस्या पोर्टल के लाइव होने के तुरंत बाद सामने आई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, करीब 50 छात्र इस तकनीकी गड़बड़ी से प्रभावित हुए।

सूत्रों का कहना है कि यह समस्या भुगतान गेटवे से संबंधित थी। हालांकि, इस मामले में जांच जारी है और अभी तक किसी आधिकारिक जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि घटना तकनीकी खामी का परिणाम थी या किसी दुर्भावनापूर्ण गतिविधि का।

छात्रों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

सीबीएसई देश का सबसे बड़ा स्कूल शिक्षा बोर्ड है और हर वर्ष लाखों छात्र इसकी परीक्षाओं में शामिल होते हैं। ऐसे में मूल्यांकन प्रणाली, टेंडर प्रक्रिया और डिजिटल पोर्टलों की विश्वसनीयता सीधे तौर पर छात्रों के भविष्य से जुड़ी होती है।

OSM प्रणाली को लेकर उठे सवाल और पुनर्मूल्यांकन पोर्टल में आई गड़बड़ी दोनों ही मामलों ने यह संकेत दिया है कि शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल प्रणालियों के साथ-साथ उनकी निगरानी और जवाबदेही को भी मजबूत बनाने की जरूरत है। अब छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा जगत की निगाहें सीबीएसई की आधिकारिक प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

Asmita Sarkar

Add comment

Recent posts

Most popular

Most discussed